दो बार के ओलंपिक चैंपियन रसेल मार्क की नज़र में एथेंस 2004 के रजत पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ एक मुश्किल प्रतिद्वंदी थे

ऑस्ट्रेलियाई चैंपियन रसेल मार्क ने राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को ट्रेनिंग दी थी और एथेंस 2004 ओलंपिक में राज्यवर्धन सिंह राठौर रजत पदक में दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

1996 अटलांटा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले और सिडनी 2000 के खेलों में रजत पदक जीतने वाले दिग्गज ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी रसेल मार्क (Russel Mark) ने भारतीय निशानेबाज़ राज्यवर्धन सिंह राठौड़ (Rajyavardhan Singh Rathore) को सबसे कठिन प्रतियोगियों में से एक बताया।

1994 में पहली बार किसी भारतीय शॉटगन निशानेबाज़ का सामना करने के बाद रसेल मार्क भारत को इतनी तेज़ी से निशानेबाज़ की दुनिया में आगे बढ़ते देखकर हैरान थे। उस समय मनशेर सिंह (Mansher Singh) ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीता था।

2002 कॉमनवेल्थ गेम्स में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और मोराद अली ख़ान
2002 कॉमनवेल्थ गेम्स में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और मोराद अली ख़ान2002 कॉमनवेल्थ गेम्स में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और मोराद अली ख़ान

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने 2002 मैनचेस्टर में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में रसेल मार्क के खिलाफ मुकाबला किया, जहाँ जैसलमेर के निशानेबाज़ ने ऑस्ट्रेलिया शूटर को दोनों डबल ट्रैप इवेंट में पराजित किया था। व्यक्तिगत स्पर्धा में हराने के बाद उन्होंने नारद अली खान (Narad Ali Khan) के साथ डबल्स में भी जीत हासिल की।

रसेल मार्क ने मानव रचना एजुकेसनल इंस्टिट्यूट द्वारा आयोजित एक वेबिनार के दौरान कहा, "चिल्ली (राठौड़) को मैनचेस्टर तक मैं उन्हें अच्छी तरह से नहीं जानता था।" उन्होंने कहा, '' डबल्स स्पर्धा में हम भारतीय टीम से एक अंक पीछे थे और हमें लग रहा था कि हम उनसे आगे निकल जाएंगे, हम अंतिम दौर में पकड़ बनाएंगे। लेकिन उन्होंने शानदार खेल दिखाया। दो दिन बाद चिल्ली ने मुझे व्यक्तिगत स्पर्धा में हरा दिया। हम सोचने लगे कि कितने भारतीय हैं।''

रसेल मार्क ने आगे कहा, "उनके जैसे रोंजन सोढ़ी (Ronjan Sodhi) और अन्य भारतीयों का प्रदर्शन अभी बाकी था। भारत में अच्छे शूटर्स की संख्या बढ़ती गई।” छह ओलंपिक खेलों में भाग लेने वाले 56 वर्षीय ऑस्ट्रेलियाई अंतरराष्ट्रीय शूटर ने भारत को नब्बे के दशक में शूटिंग के क्षेत्र में एक दावेदार के रूप में देखा।

रसेल मार्क का मानना ​​है कि 2004 के एथेंस गेम्स में राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के रजत पदक जीतने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जहां उन्होंने राठौड़ के कोच थे। रसेल मार्क ने कहा, "मैं चिली (राठौड़) के इस शानदार सफर का हिस्सा बनकर बहुत खुश हूं। एथेंस में पदक जीतने के बाद मैंने उनके चेहरे पर जो राहत देखी, वह मुझे याद है। इसने भारतीय शूटिंग के लिए खेल को बदल दिया।''

जितना अधिक प्रतिस्पर्धा, उतना सटीक निशाना

राठौड़ के अलावा रसेल मार्क ने रोंजन सोढ़ी को भी कोचिंग दी, जिन्होंने 2011 में फिरोजपुर डबल ट्रैप शूटर को दुनिया की नंबर 1 रैंक तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि ये भारतीय शॉटगन निशानेबाजों के लिए सबसे बेहतर पल था।

अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra), गगन नारंग (Gagan Narang) और विजय कुमार (Vijay Kumar) के माध्यम से पिस्टल और राइफल स्पर्धाओं में सफलता के बावजूद, भारत को शॉटगन निशानेबाज़ी में शायद ही रोंजन सोढी या राज्यवर्धन सिंह राठौड़ जैसा निशानेबाज़ मिला है।

जहां डबल ट्रैप स्पर्धा टोक्यो ओलंपिक का हिस्सा नहीं होगा, तो भारत के पास केवल अंगद वीर सिंह बाजवा (Angad Vir Singh Bajwa) हैं जिन्होंने पुरुषों की स्कीट में कोटा स्थान हासिल किया है। मार्क रसेल का मानना ​​है कि स्थिति को सुधारने का एकमात्र तरीका है, इसके लिए निशानेबाजों के लिए अधिक से अधिक प्रतियोगिताओं का आयोजन करना होगा।

रसेल ने कहा “प्रतिस्पर्धा से डरना नहीं चाहिए। प्रतिस्पर्धा आपको बेहतर बनाती है। बस आप कड़ी मेहनत करें, जिससे आप और आगे जा सकें।” उन्होंने 1996 और 2000 के ओलंपिक में ट्रैप में स्वर्ण पदक विजेता हमवतन माइकल डायमंड (Michael Diamond) का उदाहरण भी दिया, जिन्होंने रसेल को एक बेहतर निशानेबाज़ बनाया था।

उन्होंने कहा, “माइकल डायमंड साथ आए और उसने मुझे आगे तक ले गए। हमने धीरे-धीरे एक-दूसरे से सीखा और 1996 (डबल ट्रैप और ट्रैप) में जीत हासिल की। ये छह-सात साल की कोशिश थी।”

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