भारतीय स्टार धावक हिमा दास ने एक बार फिर की ज़रूरतमंदों की मदद

इसके साथ ही भारतीय धावक ने दिल को छू लेने वाली कहानी सुनाई कि कैसे उन्होंने अपने पिता को गौरवान्वित किया।

भारतीय स्प्रिंटर हिमा दास (Hima Das) ने सुबह 4 बजे उठकर धान के खेतों में प्रैक्टिस करने के बाद एक लंबा सफर तय किया है। हिमा दास अब घर घर जानी जाती हैं लेकिन इसके बावजूद असम के धींग शहर के पास एक गाँव से आने वाली ये धावक नहीं भूली हैं कि वह कहां से आई हैं। इसके साथ ही वह उसी जड़ों से जुड़ी हैं, जहां से उनकी शुरुआत हुई।

धींग एक्सप्रेस के नाम से पहचान बनाने वाली हिमा दास ज़रूरतमंदों की मदद कर रही हैं क्योंकि वह भी इसी दौर से बाहर निकली हैं। हाल ही में उन्होंने अपनी एक महीने की सैलेरी असम कोरोना वायरस (COVID-19) रिलीफ फंड में दान दी है।

IAAF वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप के फ़ाइनल में वुमेंस 400 मीटर का गोल्ड मेडल जीतने के बाद जश्न मनाती हुई भारतीय धावक हिमा दास
IAAF वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप के फ़ाइनल में वुमेंस 400 मीटर का गोल्ड मेडल जीतने के बाद जश्न मनाती हुई भारतीय धावक हिमा दासIAAF वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप के फ़ाइनल में वुमेंस 400 मीटर का गोल्ड मेडल जीतने के बाद जश्न मनाती हुई भारतीय धावक हिमा दास

हिमा दास ने आईओएस स्पोर्ट्स एंड एंटरटेनमेंट से इंस्टाग्राम लाइव के दौरान कहा कि “असम के लोगों ने मेरा बहुत सपोर्ट किया और हमेशा मुझे प्यार दिया है, इसलिए मुझे ये लगता है कि इस समय उनकी मदद करना मेरी ज़िम्मेदारी है।”

असम में आई बाढ़ के बाद मदद

असम की ब्रांड एंबेसेडर का कोविड-19 रिलीफ फंड में दान देकर मदद करना पहली बार नहीं है। यह खिलाड़ी उस समय भी आगे आई थी, जब उनके राज्य में मुसीबत का पहाड़ टूटा था।

हिमा दास ने बताया कि “पिछले साल जब असम में बाढ़ आई थी तो मैं उस दौरान विदेश में प्रतिस्पर्धा के लिए गई हुई थी और अचानक मेरा ध्यान इस तरफ गया। टूर्नामेंट के दौरान हम मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा नहीं करते लेकिन इसके बावजूद मैंने फोटो और वीडियो में देखा कि मेरे घर पर स्थिति कितनी खराब है और इसके बाद मुझे काफी बुरा लगा।”

भारतीय स्टार ने बताया कि “इसके बाद जब मैं घर पहुंची तो फैन क्लब ने भी मदद की अपील की और उन्होंने जब भी जरुरत पड़ी हमेशा मदद की।” हिमा दास ने पिछले साल बाढ़ रिलीफ फंड में आधी सैलेरी दान की थी और अब कोराना वायरस महामारी के वक्त भी मदद के लिए आगे आईं हैं।

सफलता की सीढ़ियां

हिमा दास जो धींग जैसे छोटे गांव से आकर सभी के लिए प्रेरणा बनीं है। जूतों पर वह अपने हाथ से ब्रांड का नाम लिखती थी, अब उनका जीवन पूरी तरह से बदल गया है।

इस धावक ने अपना नाम ना केवल राष्ट्रीय लेवल पर बनाया है बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी उन्होंने अपना नाम बनाया है और उम्मीद है कि वह इसी तरह अच्छा प्रदर्शन करती रहेंगी।

हिमा दास ने बताया कि “जब मैं घर पर खेल खेलती थी और बड़े होने के दौरान सीख रही थी तो मैं अपने घर के ऊपर उड़ने वाले विमानों की आवाज़ें सुना करती थी और फिर अपने पिता से कहती थी कि 'पिताजी, एक दिन मैं उस विमान से जाऊंगी।"

इस धावक ने कहा कि “अब मेरे पिता अपने दोस्तों को बताते हैं कि हिमा बड़े होने के दौरान ऐसा कहती थी लेकिन मैं इसे गंभीरता से नहीं लेती। वह कहते हैं कि वह खुद भी उड़ रही है और मुझे भी उड़ा रही है।”

साल 2018 वर्ल्ड अंडर-20 चैंपियनशिप की 400 मीटर की गोल्ड मेडलिस्ट का अब पूरा ध्यान अगले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक पर है। हिमा दास ने कहा, "मैं एथलेटिक फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) के निर्देशों का पालन करूंगी और मेरे टोक्यो ओलंपिक की तैयारियों के लिए मेरे कोच द्वारा लिए गए निर्णयों का पालन करूंगी।"

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