क्या भारत भविष्य के माइकल फेल्प्स को अपने देश में तैयार कर सकता है?

भारतीय खेल मंत्री का मानना है कि अगर भारत को 2028 तक ओलंपिक खेलों में शीर्ष 10 देशों की सूची में प्रवेश करना है तो उसमें तैराकी का खेल एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

ओलंपिक इतिहास के सबसे सफल एथलीट के रूप में माइकल फेल्प्स तैराकी के खेल में एक आदर्श चेहरा बन चुके हैं।

फिलहाल भारत में उनके जैसे किसी खिलाड़ी के होने या उसे तैयार करने के बारे में नहीं सोचा जा सकता है। क्योंकि सिडनी में 2000 ओलंपिक खेलों में यूनिवर्सैलिटी (सार्वभौमिकता) कोटा के तहत ही केवल कुछ एथलीटों ने देश का प्रतिनिधित्व किया था, उसके बाद से कोई भी एथलीट ओलंपिक के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाया है।

हालांकि, भारतीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) इस खेल में लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए काफी उत्सुक हैं।

इसलिए भविष्य में शायद ऐसा हो सकता है कोई भारतीय एथलीट ‘मुंबई मिसाइल’ या ‘दिल्ली डार्ट’ के नाम से जाना जाए, जैसे की आज सभी माइकल फेल्प्स को ‘बाल्टीमोर बुलेट’ के नाम से जानते हैं। आखिरकार यह एक सपने के जैसा है, जो पूरा हो सकता है।

केंद्रीय मंत्री को बदलाव की उम्मीद

एक ऑनलाइन नॉलेज इन्हैंसमेंट वर्कशॉप (ज्ञान वृद्धि कार्यशाला) में पूरे भारत के तैराकी कोचों को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विश्व स्तरीय तैराक भारत को ओलंपिक खेलों में अगले स्तर तक ले जा सकते हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इस खेल में पदकों की संख्या काफी अधिक है।

उन्होंने कहा, “इतिहास गवाह है कि ओलंपिक में शीर्ष देशों ने तैराकी के खेल में बड़ी संख्या में पदक हासिल किए हैं। पिछले पांच ओलंपिक खेलों में यूएसए ने तैराकी में अपने कुल पदकों का लगभग 31 प्रतिशत हिस्सा इसी खेल में जीता है। किसी भी देश के लिए इस खेल में बहुत से अवसर होते हैं क्योंकि एक्वेटिक्स (जलीय खेल) में होने वाले इवेंट्स की संख्या बहुत अधिक होती है।”

साजन प्रकाश (Sajan Prakash), विर्धवाल खाडे (Virdhawal Khade), श्रीहरि नटराज (Srihari Nataraj) और कुशाग्र रावत (Kushagra Rawat) जैसे भारतीय तैराक अभी भी ओलंपिक के लिए ‘ए’ कट (क्वालिफाइंग समय) पर अपनी नज़रें बनाए हुए हैं। लेकिन कट-ऑफ समय को पार कर पाने की संभावनाओं को कम देखते हुए केंद्रीय मंत्री ने अनुरोध किया है कि भारतीय तैराक लॉस एंजेलिस 2028 को अपने एक संभावित लक्ष्य के रूप में देखें।

केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा, “मुझे भारत के पीछे रह जाने का कोई भी कारण नज़र नहीं आता है। 2021 के ओलंपिक में हमारे पास तैराकी में पदक जीतने की क्षमता नहीं है, लेकिन हम 2028 के ओलंपिक खेलों की तैयारी शुरू कर सकते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “मैं स्वीमिंग फेडरेशन से आग्रह करता हूं कि वह जरूरी कोचों की संख्या, बुनियादी ढांचे और प्रशिक्षण सुविधाओं के लिए एक सही योजना का रोडमैप तैयार करें। जब लॉकडाउन हटेगा और हम COVID-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई जीतने में सफल होंगे तो मैं देश के प्रमुख कोचों और तैराकों से मिलना चाहूंगा। मैं उनसे पूछना चाहुंगा कि हमें तैराकी में अपनी पहचान बनाने के लिए किन चीज़ों की जरूरत है।"

कॉर्पोरेट फंडिंग की कितनी उम्मीद

भारत में तैराकी के इस खेल में निवेश एक बहुत बड़ी चुनौती रही है। बीते कुछ वर्षों में ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड, जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स जैसे कॉरपोरेट्स और अन्य लोगों ने देश में शीर्ष तैराकों की मदद करने की दिशा में थोड़ा काम जरूर किया है।

हालांकि, द्रोणाचार्य अवार्ड विजेता निहार अमीन (Nihar Ameen) का मानना है कि अभी तैराकी को और अधिक सहारे की जरूरत है।

उन्होंने डेक्कन हेराल्ड से बात करते हुए कहा, “फंडिंग एक और बड़ा मुद्दा है। जो बच्चे हमारे पास आते हैं, (कोचिंग के लिए) उन्हें हर एक चीज़ के लिए भुगतान करना पड़ता है। यह धनराशि काफी बड़ी होती है।”

आपको बता दें, निहार अमीन उन बेहतरीन कोचों में से एक हैं जिन्होंने भारतीय तैराकी के लिए बीते कुछ दशकों में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बेंगलुरु के इस कोच ने विर्धवल खाडे और संदीप सेजवाल जैसे तैराक तैयार किए हैं, जिन्होंने एशियाई खेलों के पदक जीतने में सफलता हासिल की है।

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