ग्रुप एक्टिविटी, ऑफिस वर्क और घर में ट्रेनिंग से लॉकडाउन का समय काट रहे हैं भारतीय स्विमर

साजन प्रकाश जहां फुकेत स्थित ट्रेनिंग कैंप में फंसे हुए हैं तो वीरधवल खड़े संकट के समय में 'तहसीलदार' के रूप में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

भारत के सबसे प्रमुख स्विमर साजन प्रकाश (Sajan Parkash) गर्दन में चोट के बाद पूल में वापसी कर रहे थे लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण उनकी ट्रेनिंग में बाधा आई और उन्हें अपनी रणनीति में भी बदलाव करना पड़ा।

 हालांकि, 2016 रियो ओलंपिक में हिस्सा ले चुके इस तैराक के लिए टोक्यो ओलंपिक टलना अच्छा साबित हो सकता है। इस वजह से साजन प्रकाश को लय में आने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और वह अपनी फिटनेस भी हासिल कर सकेंगे।

ओलंपिक चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि “मैं जब तक पूरी तरह फिट नहीं हो जाता, तब तक किसी इवेंट में हिस्सा नहीं लेता। शुरुआत में हम मलेशिया, सिंगापुर और जहां तक है थाईलैंड में होने वाली ‘ए’ कट (ओलंपिक क्वालिफिकेश मार्क) में हिस्सा लेते लेकिन अब मैं किसी भी इवेंट में हिस्सा लेने की जल्दबाजी नहीं दिखाउंगा।”

पिछले साल साउथ एशियन गेम्स में गर्दन में चोट लगने के बाद यह भारतीय तैराक बेंगलुरु में रिहैब सेंटर में रहे और उसके बाद फरवरी में उन्होंने फुकेत स्थित ट्रेनिंग बेस में जाने का फैसला किया।

 इसके बाद कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता ही गया और ये 26 साल के तैराक वहीं फंस गए। भारतीय तैराक अंतर्राष्ट्रीय तैराकी महासंघ (FINA) से छात्रवृत्ति पर है और विभिन्न राष्ट्रीयताओं के 16 अन्य तैराकों के साथ थान्यपुरा अकादमी में रह रहे हैं।

हालांकि दुनिया भर में अनिश्चितताओं का उनके दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है, थान्यपुरा अकादमी के कोच मिगुएल लोपेज़ (Miguel Lopez) ने कहा कि तैराक इस मुश्किल घड़ी में एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “हमारे लिए सबसे जरूरी ये है कि सभी तैराकों का मनोबल ऊंचा रहे और दूसरों की भी मदद करें।”

मिगुएल ने कहा कि “ग्रुप में सब एक दूसरे की मदद कर रहे हैं, सभी एक दूसरे की चिंता करते हैं और सभी सकारात्मक हैं। वह सामान्य हालातों की तरह ट्रेनिंग कर रहे हैं ताकि फिटनेस पर असर न पड़े।”

साजन प्रकाश ने यह भी आश्वासन दिया कि सामान्य दिनों की तरह ही हो रहा है, भले ही पूल में ज्यादा ट्रेनिंग नहीं कर पा रहे हों लेकिन पूल के बाहर काफी ट्रेनिंग कर रहे हैं।

भारतीय तैराक ने कहा कि “हम उसी शेड्यूल से ट्रेनिंग कर रहे हैं, जैसे सामान्य हालातों में करते थे। हम सुबह जल्दी उठ जाते हैं और उस तरह ही रूटीन को फॉलो करते हैं, जैसा की हम पहले किया करते थे।”

ड्यूटी में व्यस्त वीरधवल 

वहीं भारत ने इस परेशानी से निपटने का एक तरीका निकाल लिया है, खासकर जब वह लंबे समय तक घर के अंदर प्रतिबंधित रहेंगे।

 वीरधवल खड़े (Virdhawal Khade) जो बीजिंग 2008 (वह 15 वर्ष) में ओलंपिक में भाग लेने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय तैराक थे, अब वे एक तहसीलदारक भी हैं। इस महामारी के वक्त सरकारी एजेंसी दिन रात काम कर रही हैं तो भारतीय खिलाड़ी का समय नौकरी में ही निकल जाता है।

इस तैराक ने कहा कि कलेक्टर ऑफिस में बहुत ज्यादा काम है इसलिए मुझे रोजाना अपने काम की रिपोर्ट देनी होती है। वीरधवल ने कहा कि “हालांकि मैं कोविड-19 से संबंधित काम से सीधा नहीं जुड़ा हुआ हूं लेकिन इसके अलावा भी काफी चीजें हैं, जिन्हें मैं मैनेज करता हूं। मेरे लिए, यह घर से बाहर निकलने का अवसर है। लंबे समय तक घर के अंदर रहना मुझे पागल कर देता।”

28 वर्षीय को सर्जियो लोपेज की कोचिंग लेने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए उड़ान भरनी थी। सर्जियो वही कोच हैं जिन्होंने यूएसए के रेयान मर्फी (Ryan Murphy) और सिंगापुर के जोसेफ स्कूलिंग (Joseph Schooling) को स्टार बनाने में अहम योदगान दिया। लेकिन उनके जाने से एक दिन पहले ही सारी यात्रा रद्द हो गई। इस खिलाड़ी ने कहा “अब अगर मैं पीछे देखता हूं तो मुझे खुशी है कि मैं नहीं जा पाया क्योंकि अगर मैं चला जाता तो अमेरिका में फंस जाता।”

वीरधवल ने कहा “हमारा प्लान था कि वहां ट्रेनिंग करूं और यूरोप में जून जुलाई में होने वाले ‘ए’ कट में हिस्सा लूं। खैर अब हमे अगले सीजन के बार में सोचना होगा।”

हालांकि, फ्रीस्टाइल स्पेशलिस्ट लॉकडाउन में भी फिट रहने के लिए ट्रेनिंग कर रहा है। भारतीय तैराक ने कहा कि “मैं अपनी पत्नी के साथ रहता हूं और वह भी नेशनल लेवल की स्विमर है, इसलिए हम दोनों साथ में प्रैक्टिस करते हैं। इस दौरान हम मौज मस्ती भी करते हैं। मैं यही चाहता हूं कि तब पूल खुले तब मैं अपनी पूरी शेप में रहूं।”

एक तरफ जहां वीरधवल ने सूएस में जाकर ट्रेनिंग करने की योजना बनाई थी तो दूसरी तरफ एक और युवा भारतीय तैराक श्रीहरि नटराज (Srihari Natraj) ट्रेनिंगके लिए ऑस्ट्रेलिया जाने वाले थे लेकिन महामारी के कारण उन्हें अपनी प्लानिंग बदलनी पड़ी।

बेंगलुरु के रहने वाले ये तैराक अब घर पर ही ट्रेनिंग कर रहे हैं और ड्राईलैंड ट्रेनिंग पर पूरा ध्यान दे रहे हैं। युवा तैराक ने कहा कि “मेरे पास कुछ वज़न (वेट्स) और एक क्रॉस-ट्रेनर है। मुझे लगता है कि मेरा ड्राईलैंड प्रशिक्षण सही दिशा में जा रहा है।”

श्रीहरि ने बताया कि “ ट्रेनर उन्हें खुद का रूटीन बनाने की छूट देते हैं, 19 साल के इस खिलाड़ी को लगता है कि इस समय में वह अपनी क्षमता बढ़ा सकते है। उन्होंने बताया कि मैं काफी कड़े सेशन से लौटा हूं। मैं चाहता था कि मुझे इससे मदद मिले इसलिए मेरे ट्रेनर ने रूटीन मुझे ही बनाने को कहा लेकिन मैं कुछ भी करने से पहले उनकी मदद लेता हूं।” 

भारतीय तैराक इस महामारी के कठिन वक्त में भी फिट रहने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, अब ये देखना भी दिलचस्प होगा कि जब ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए पूल में उतरेंगे तो कैसा प्रदर्शन करेंगे।”