कड़ी मेहनत की बदौलत भारतीय स्टार पैडलर मनिका बत्रा ने हासिल किया ये मुक़ाम

भारतीय पैडलर प्रतियोगिताओं में जाने से पहले विज़ुअलाइजेशन तकनीक का सहारा लेती हैं।

कहते हैं कि इंसान की जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, कभी वह अपने कामों में सफल होता है तो कभी उसके हाथ असफलता लगती है और जो इंसान ये बात समझ लेता है, उसके लिए अपने लक्ष्य को हासिल करना थोड़ा आसान हो जाता है। कुछ ऐसी ही कहानी भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा (Manika Batra) की भी है।

मनिका को करियर में कई बार असफलता का सामना करना पड़ा है लेकिन उन्होंने कभी भी इसके अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। 22 साल की ये खिलाड़ी साल 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर रातों रात स्टार बन गई थी।

इसके बाद इस खिलाड़ी ने 2018 एशियन गेम्स की मिक्स्ड डबल्स कैटेगिरी में सिल्वर मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया। जिसके बाद अंतर्राष्ट्रीय टेबल टेनिस महासंघ (ITTF) ने उन्हें  'दी ब्रेकथ्रू स्टार अवार्ड ’से सम्मानित किया था।

हंगेरियन ओपन के बाद जनवरी 2019 में उन्होंने अपनी सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग हासिल की थी लेकिन इसके बाद खराब प्रदर्शन के कारण अगस्त तक वह 76वें स्थान पर खिसक गई थी।

संग्राम सिंह (Sangram Singh) के साथ इंस्टाग्राम लाइव के दौरान मनिका बत्रा ने कहा कि “वह एक कठिन दौर था। जब मैं अभ्यास करती था, तब भी मेरा मनोबल गिरा हुआ रहता था, उस वक्त मैं बहुत दबाव महसूस करती थी।

हालांकि जल्दी ही उन्होंने इससे बाहर निकलने का तरीका निकाल लिया। भारतीय स्टार ने बताया “इससे निपटने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप टेबल की तरफ़ रुख़ कर लें। मैं इसे रणनीति नहीं कहूंगी लेकिन मैं अपने खराब प्रदर्शन के बारे में लंबे समय तक नहीं सोच सकती। मैं बस अपने प्रदर्शन में सुधार की कोशिश करती हूं”

भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी ने साफ कहा कि सफलता हासिल करने का कोई आसान तरीका नहीं है, आपको कड़ी मेहनत करनी ही होगी।”

सफलता की कल्पना करना

जहां एक तरफ सभी एथलीट प्रैक्टिस कर खुद को मजबूत और फिट रखते हैं तो वहीं दूसरी तरफ मनिका बत्रा का मानना ​​है कि मानसिक रूप से मजबूत रहना और मन से किसी भी प्रकार के संदेह को दूर करना भी महत्वपूर्ण है।

मनिका नियमित रूप से ध्यान और विभिन्न सांस अभ्यासों की मदद से खुद को मोटिवेट रखती है। इसके लिए वह विज़ुअलाइज़ेशन तकनीक का सहारा लेती हैं।

भारतीय स्टार ने बताया कि “आप प्रतिस्पर्धा की स्थिति की कल्पना करते हैं और पहले ही इसकी तैयारी कर लेते हैं। आप सोचते हैं कि अगर कल हम इस स्थिति में होंगे तो क्या करेंगे। अगर एक प्रतियोगिता है तो अपने आप को मैच जीतने के बाद की स्थिति में सोचे, आप पोडियम पर खड़े हैं, राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहा है, ये बातें आपके आत्मविश्वास को बढ़ाती है।”

भारतीय खिलाड़ी इस तकनीक का इस्तेमाल केवल बड़ी प्रतियोगिता में ही नहीं करतीं बल्कि हर ट्रेनिंग सेशन में भी वह ऐसा ही करती हैं।

इस साल अप्रैल तक मनिका बत्रा ने रैंकिंग में 16 स्थान की छलांग लगाकर 63वें स्थान हासिल कर लिया है।

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