हाल की सफलता ने विदेशों में भारतीय खिलाड़ियों की धारणा बदली: कास्टेंटिनी

कास्टेंटिनी को विश्वास है कि अगर भारतीय कोच अपने अंतरराष्ट्रीय स्तर के लिए सक्षम हैं, तो दुनियाभर में उन्हें मौके मिलने चाहिए।

वे मास्सिमो कास्टेंटिनी (Massimo Costantini ) ही थे, जिनके मार्गदर्शन में भारतीय टेबल टेनिस टीम ने सफलता के झंडे गाड़े थे।

इटली के रहने वाले कोच उस समय सुर्खियों में आए थे, जब भारतीय दल ने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games)  में टेबल टेनिस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, हर वर्ग में पदक जीते, जिसमें तीन स्वर्ण शामिल थे। इसके बाद एशियाई खेलों (Asian Games) में इसी तरह के प्रदर्शन को दोहराया। उस टूर्नामेंट में भारत ने दो कांस्य पदक जीते।

इस अवधि के दौरान ही मनिका बत्रा (Manika Batra), साथियान गणानाशेखरन (Sathiyan Gnanasekaran) और हरमीत देसाई (Harmeet Desai) जैसे नए सितारे प्रमुखता से उभरे।

62 साल के इस कोच को साल 2018 एशियाड गेम से पहले किसी कारणों से भारतीय टीम का साथ छोड़ना पड़ा। किन मास्सिमो कास्टेंटिनी का मानना ​​है कि टीम की हालिया सफलता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच भारतीय टेबल टेनिस की धारणा को बदलने में मदद की है।

स्पोर्ट्सस्टार से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया, “अब दुनिया में भारतीय खिलाड़ियों को काफी सम्मान की नज़र से देखा जाता है। अगर मानव (ठक्कर), जो इतना अच्छा है, वह अपने हमवतन जीत चंद्रा से (2020 ओमान ओपन अंडर -21) में 0-3 से हार सकता है, तो यह दिखाता है कि भारतीय टेबल टेनिस का स्तर कहां पहुंच गया है। मुझे यह देखकर खुशी हुई कि टीम के अच्छे परिणाम जारी हैं।"

मास्सिमो कास्टेंटिनी ने भारत को राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में अभूतपूर्व सफलता हासिल करने में मदद की। फोटो साभार: आईटीटीएफ
मास्सिमो कास्टेंटिनी ने भारत को राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में अभूतपूर्व सफलता हासिल करने में मदद की। फोटो साभार: आईटीटीएफमास्सिमो कास्टेंटिनी ने भारत को राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में अभूतपूर्व सफलता हासिल करने में मदद की। फोटो साभार: आईटीटीएफ

भारत टेबल टेनिस टीम के पूर्व कोच ने कहा, “हमने अच्छे नतीजे हासिल किए हैं और मानना पड़ेगा की हमारे पास वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी हैं। साल 2018 के नतीजों ने इन खिलाड़ियों को काफी मोटिवेट किया। अब युवा खिलाड़ी अपने सीनियर्स से सीख भी रहे हैं।”

अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र के पक्ष में मास्सिमो कास्टेंटिनी

कास्टेंटिनी ने भारतीय टीम के साथ दो फेज़ में काम किया है। पहला 2010 तक, इसलिए कास्टेंटिनी इस बात से अच्छी तरह वाक़िफ़ हैं कि भारत में अच्छे खिलाड़ियों की कोई कमी नहीं है। वहीं भारत के पूर्व कोच काबिलियत को लेकर भी परेशान नहीं है, उन्हें विश्वास है कि भारतीय कोचों को भी इंटरनेशनल लेवल पर मौका मिले तो वह भी अच्छा करने की क्षमता रखते हैं।

इस बारे में उन्होंने कहा, “अगर हम जानकारी के नज़रिए से देखें तो वह भारतीय खिलाड़ियों के पास बहुत है। अब इस समय और मौकों की जरूरत है, जो भारतीय कोचों को चाहिए। क्योंकि उनमें क्षमता है।” कास्टेंटिनी ने आगे कहा, “उन्हें बस इंटरनेशनल लेवर पर मौकों की जरुरत है, उन्हें विदेश भेजकर यह देखना होगा कि वह किस तरह काम करते हैं।”

पिछले कुछ सालों में भारत ने इंटरनेशनल लेवल पर शानदार प्रदर्शन किया है और उसी का नतीजा है कि मेंस टीम अपनी सर्वश्रेष्ठ 8वीं रैंकिंग पर काबिज है, हालांकि वह अब भी चीन, जापान और जर्मनी जैसी दिग्गज टीमों से काफी पीछे हैं।

वहीं मास्सिमो कास्टेंटिनी जिन्हें साल 2018 में आईटीटीएफ ने ‘स्टार कोच ऑफ दी ईयर’ से सम्मानित किया था, उन्होंने भारतीय टीम के इस अंतर को कम किया।

मास्सिमो कास्टेंटिनी ने बताया, “यह बहुत आसान है कि वह क्या कर रहे हैं। दुनियाभर की टॉप टीमें तकनीक से शुरुआत करती हैं और उसके बाद काबिलियत पर जाती हैं, उन्होंने ये बात इसलिए कही ताकि ये बता सके कि दुनिया की टॉप टीमों में क्या अलग है”। इसके अलावा उन्होंने कहा कि “यूरोप के कई देशों और भारत में इसके बिल्कुल विपरीत होता है, वहां पहले काबिलियत देखते हैं और फिर तकनीक पर काम करते हैं और दोनों ही वही नतीजे हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, हालांकि यह इतना आसान नहीं क्योंकि यह एक पूरी प्रक्रिया के माध्यम से आते हैं।”

भारतीय टीटी टीम के पूर्व कोच ने सलाह देते हुए कहा, “होना ऐसा चाहिए कि सभी खिलाड़ी पहले तकनीक पर काम करें और फिर काबिलियत की तरफ देखें।”

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