दिविज शरण ने चार महीनों बाद लंदन इवेंट से की टेनिस कोर्ट पर वापसी

कोरोना वायरस महामारी के मद्देनज़र इस इवेंट में सुरक्षा के ख़ास इंतज़ाम किए गए थे, जहां दिविज शरण ने साथी खिलाड़ी विजय सुंदर प्रशांत के साथ कोर्ट पर उतरे।

भारतीय टेनिस स्टार दिविज शरण (Divij Sharan) ने रविवार को लंदन में क़रीब चार महीने बाद टेनिस कोर्ट पर वापसी की, जहां उन्होंने लॉन टेनिस एसोसिएशन ब्रिटिश टूर इवेंट सीरीज़ में शिरकत की।

ये टूर्नामेंट विंबलडन ऑल इंग्लैंड क्लब के क़रीब 6 किलोमीटर दूरी पर स्थित रोहेम्पटन के नेशनल टेनिस सेंटर में आयोजित हुआ था।

शरण के युगल साथी थे विजय सुंदरम प्रशांत (Vijay Sundar Prashanth), ये दोनों ही टेनिस स्टार इन दिनों लंदन में ही थे। इन दोनों ने युगल के तीन मुक़ाबले खेले जो बेहद छोटे अंतराल पर हुए, इनके करियर का ये पहला ‘फ़ास्ट-4’ फ़ॉर्मेट था।

भारतीय जोड़ी ने पहला मुक़ाबला 1-4, 4-1 (7-10) से चार्ल्स ब्रूम (Charles Broom) और डेविड स्टीवेन्सन (David Stevenson) की ब्रिटिश जोड़ी के हाथों गंवा दिया था। लेकिन अगले दो मुक़ाबलों में दिविज-विजय को जीत हासिल हुई थी।

बेन जोन्स (Ben Jones) और जोशुआ पेरिस (Joshua Paris) को पहले भारतीय जोड़ी ने 2-4, 4-1 (10-8) से हराया और फिर जैक गिबेन्स (Jack Gibbens) और इसाक स्टोउट (Isaac Stoute) को सीधे सेटों में 4-1, 4-1 से शिकस्त दी।

भारतीय जोड़ी कुल 8 टीमों में पांचवें स्थान पर रही, लेकिन उनके लिए नतीजों से ज़्यादा ज़रूरी टेनिस कोर्ट पर वापसी करना था।

मैच के बाद फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में दिविज शरण ने कहा, “शुरुआत में हम थोड़ा लड़खड़ाए और फिर तीसरे मैच के ख़त्म होने तक मेरा शरीर थक गया था। क्योंकि हम लोग एक दिन में तीन-तीन मैच बहुत कम ही खेलते हैं, लेकिन इस प्रतिस्पर्धा में शामिल होना और कोर्ट पर खेलना बेहतरीन था।”

महामारी के बाद एक अलग शुरुआत

यूरोप में अब धीरे-धीरे लॉकडाउन ख़त्म हो रहा है, लेकिन नेशनल टेनिस सेंटर में सुरक्षा और सोशल डिस्टेंसिंग के कड़े इंतज़ाम थे।

हर किसी को कोरोना वायरस (COVID-19) के परीक्षण से गुज़रना पड़ा, मैच शुरू होने के दो दिन पहले ही सभी का तापमान मापा गया, और पूरी तरह से कोर्ट परिसर में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया गया।

सभी खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ़ के लिए मास्क पहनना अनिवार्य था, सिर्फ़ कोर्ट पर मास्क हटाने की इजाज़त थी। खिलाड़ियों को जश्न मनाने के लिए और हैंड शेक करने की इजाज़त नहीं थी, बस वे अपने रैकेट को छू सकते थे।

प्रैक्टिस के दौरान भी कोर्ट को हर सत्र के बाद अच्छी तरह से सैनिटाइज़ किया जा रहा था। मैच के दौरान कोई भी बॉल बॉय या लाइन्समैन मौजूद नहीं थे, सिर्फ़ वहां पर चेयर अंपायर को रहने की इजाज़त थी।

दिविज ने कहा, “जैसा कि युगल खिलाड़ी एक दूसरे से आपस में बात करते रहते हैं और इस दौरान आप अपने मुंह पर हाथ रखे हुए होते हैं ताकि विरोधी समझ न पाए कि आप क्या बात कर रहे हैं। लेकिन अंपायर ने हमें ऐसा करने से मना कर दिया था।”

“हालांकि मुझे इससे आपत्ति नहीं थी, क्योंकि मैं क्या बोल रहा हूं इसे छिपाने के लिए अपनी कोहनी का ही इस्तेमाल करता हूं। लेकिन विजय जब बोलता है तो सामने गेंद रख लेता है, लिहाज़ा अंपायर को कई बार उसे याद दिलाना पड़ रहा था। हां ये थोड़ा अलग ज़रूर था, पर मुझे लगता है जैसे जैसे मैच होते जाएंगे, हमें इसकी आदत होती जाएगी।”

महामारी के दौरान कोर्ट पर वापसी करने वाले दिविज और विजय पहले भारतीय टेनिस खिलाड़ी नहीं हैं।

पिछले महीने सुमित नागल (Sumit Nagal) ने कोर्ट पर विजयी वापसी की थी जब उन्होंने जर्मनी में आयोजित PSD बैंक नॉर्ड ओपन जीत लिया था।

द वीक वेबसाइट के साथ बातचीत में दिविज ने कहा, “ये थोड़ा अजीब भी है, साल के इस समय मैं विंबलडन में खेल रहा होता लेकिन अभी घरेलू टूर्नामेंट में प्रतिस्पर्धा कर रहा हूं।”

इस साल विंबलडन 29 जून से 12 जुलाई के बीच प्रस्तावित था लेकिन कोरोना वायरस की वजह से इसे रद्द करना पड़ा, 1945 के बाद पहली बार विंबलडन को रद्द किया गया है।

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