पेस-भूपति के उस जश्न की कहानी जो टेनिस कोर्ट पर सबसे अलग थी

ये इंडियन एक्सप्रेस के लिए अपने जीतने के बाद जश्न मनाने का एक अनूठा तरीका था, ये जोड़ी दुनिया की नंबर 1 युगल टीम बन गई थी।

ये जश्न मनाने का एक अनूठा तरीका है। ये हर बार सबको आकर्षित करता है। ब्रायन बंधुओं ने भी ऐसा किया और भारत के प्रतिष्ठित लिएंडर पेस (Leander Paes) और महेश भूपति (Mahesh Bhupathi) की युगल जोड़ी भी ऐसा करती थी।

लेकिन भारतीय टेनिस जोड़ी ने इस चेस्ट-बंप जश्न की शुरुआत कैसे की?- एक जश्न जहां दो खिलाड़ी हवा में अपनी छाती को एक-दूसरे से टकराते हैं।

महेश भूपति ने विंबलडन फेसबुक पेज पर हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा, "सच कहूं, तो मुझे ये याद नहीं है कि हमने पहली बार ऐसा कब किया था।"

"मुझे लगता है कि वो 1997 में सिंगापुर में एक चैलेंजर इवेंट में था। लेकिन हो सकता है मैं गलत हूं। ये खुद को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया था, जब एक संघर्षपूर्ण मुक़ाबले में स्कोर तीसरे सेट में 7-6 हो गया था, आपको इसे करने की आवश्यकता थी। चूंकि इससे हमारा मनोबल बढ़ता था, इसलिए हमने इसे अक्सर इस्तेमाल किया।”

इसने काम किया और बहुत अच्छी तरह से काम किया।

द इंडियन एक्सप्रेस के नाम से जाने जाने वाली ये जोड़ी 1990 के दशक के अंत में 2000 के दशक की शुरुआत तक अपने खेल में शीर्ष पर थी, जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सर्किट में एक शानदार जोड़ी बनाई।

1999 का सीजन लिएंडर पेस और महेश भूपति के लिए मुख्य आकर्षण वाला था, जहां उन्होंने फ्रेंच ओपन और विंबलडन जीतकर सभी चार मेजर के फाइनल में पहुंचे।

ये सिर्फ मनोबल बढ़ाने के लिए किया जाता था

लेकिन भारतीय टेनिस जोड़ी को कोर्ट में कुछ नया करने की जरूरत थी, जिसके बाद इस तरह छाती टकराकर जश्न मनाने का सिलसिला शुरू हुआ था।

1999 का सीजन लिएंडर पेस और महेश भूपति के लिए यादगार रहा।
1999 का सीजन लिएंडर पेस और महेश भूपति के लिए यादगार रहा।1999 का सीजन लिएंडर पेस और महेश भूपति के लिए यादगार रहा।

लिएंडर पेस ने समझाया कि, “इससे आपको अपने तनाव को कम करने में मदद मिलती है। आपको पता होगा कि मैं इस चीज को छोड़ देना चाहता था।”

"जब वो (भूपति) अपने गियर में खेल रहे होते थे, तो चौथे गियर या पांचवें गियर में खेलते थे और वो अच्छे नियंत्रण में होते थे, तब हम आम तौर पर मैच जीतते थे। मुझे लगता है कि, मैं किसी भी स्तर पर अपने गेम खेलने के तरीके को बदल सकता हूं।

“किसी भी टूर्नामेंट की शुरुआत में, वो अच्छा खेलते थे, इसलिए मुझे उनके बराबर खेलने की जरूरत पड़ती थी। सेमीफाइनल और फाइनल में जब विरोधी शानदार फॉर्म में थे, तब हमें अपने आप को प्रोत्साहित करने की जरूरत होती थी।”

लेकिन महेश भूपति 6’1 लंबे अपने साथी के 5’10 लंबाई की तुलना में लंबे थे, ये हमेशा ओलंपिक पदक विजेता लिएंडर पेस के लिए एक चुनौती होती थी।

वास्तव में, अटलांटा 1996 के कांस्य पदक विजेता ने अपने कोचों को याद करते हुए उन्हें संभावित चोट के बारे में भी चेतावनी दी।

लिएंडर पेस ने कहा कि, "यदि आप उसे देखते हैं, तो उन्हें देखें तो वो लंबे और बड़े हैं। इसलिए, मुझे लगभग दो फीट हवा में कूदना पड़ता था और उनके सीने से सीना टकराना पड़ता था। और कभी-कभी मेरा सिर उनके जबड़े से टकरा जाता था।”

"लेकिन वो उनका मनोबल बढ़ाता था, इसलिए वो जाने देते थे। आप जानते हैं कि ये उन बेहतरीन पुरानी यादों में से एक है, जिसको याद करने के बाद थोड़ा आनंद उठाना पड़ेगा, और ये पल काफी शानदार होता है।

उन्होंने अंत में कहा कि,"ये वास्तव में प्रतिद्वंद्वी को दिखाता है कि हम एक साथ लय में थे।"

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