भावुक लिएंडर पेस ने अपनी ज़िंदगी की उपलब्धियों को किया बयान

भारतीय टेनिस स्टार लिएंडर पेस अपने धुआंधार करियर का श्रेय अपने पिता वीस पेस को दते हैं जो ख़ुद एक ओलंपिक ब्रॉन्ज़ मेडल विजेता हैं।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

लिएंडर पेस (Leander Paes) का नाम भारतीय खेल जगत में इज़्ज़त के साथ लिया जाता है। कई रिकॉर्ड और खिताब को अपने नाम कर चुके भारतीय टेनिस स्टार लिएंडर पेस के लिए सबसे अज़ीज़ उनका ओलंपिक गेम्स (Olympic Games) में जीता हुआ ब्रॉन्ज़ मेडल है। अपनी रफ़्तार के लिए माने जाने वाले पेस ने अटलांटा ओलंपिक 1996 में इस मेडल को अपने नाम किया था।

उन्होंने माना कि जब उन्हें इस मेडल को घर में अलग से रखने के लिए कहा गया तो वह उस मेडल के साथ पूरा एक साल सोए थे। वह उसे अपने करीब रखते थे, इसी सिलसिले में उन्होंने अपने पिता वीस पेस (Vece Paes) से भी बातचीत की थी जो कि खुद ओलंपिक ब्रॉन्ज़ मेडल विजेता हैं।

इन्स्टाग्राम लाइव सेशन द्वारा ओलंपिक चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा “मेरा मेडल मेरे पिता के 1972 के मेडल के साथ ही रखा होता है। मेरे ख्याल में यह सही है। यह पूरी ज़िंदगी का हार्डवर्क है। यह मेरे लिए ख़ास है कि मैंने तीस साल ओलंपिक में शिरकत की है और अपने पिता के साथ बराबरी भी। यह बहुत अच्छा रहा है।”

इस दिग्गज ने आगे अपना भाव प्रकट किया “मेरे दोस्त मेरे सामने ही जीत रहे थे। मेरे लंबे करियर के पीछे यह एक बड़ा कारण भी है। भारत के लिए खेलना और उपलब्धियां हासिल करना बहुत अच्छा है।”

संकल्प से बड़ा कुछ नहीं

खेल परिवार से जुड़े पेस ने शुरू से ही खेल की अहमियत को समझा है। माँ जेनिफर (Jennifer) जो कि भारतीय बास्केटबॉल का हिस्सा रही हैं। पेस ने ज़ाहिर किया कि ऐसे में उनकी बराबरी करना मुश्किल था और खासतौर से तब जब आप अपने स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हों।

पेस ने आगे कहा “बचपन में मेरे दिल में माइक्रो वॉल्व था और बहुत से डॉक्टरों ने मुझे कहा था कि मैं कभी खेल नहीं खेल पाऊंगा लेकिन मैं हमेशा से ही ओलंपिक में भाग लेना चाहता था। सही मायनों में यह दिमाग़ का खेल है। अगर आप किसी चीज़ में ग्रेट बनना चाहते हैं तो आप बन सकते हैं। अगर आपको चैंपियन बनना है तो आप में बहुत हार्ड वर्क, पैशन और अनुशासन होना चाहिए।”

ग़ौरतलब है कि लिएंडर पेस अगले महीने अपना 47वां जन्मदिन मनाएंगे। पेस हमेशा अपने जीवन की सफलताओं का श्रेय अपने परिवार को देते आए हैं। वे मानते हैं कि खेल से जुड़े परिवार में पैदा होने से उनके लिए खेल शुरुआत से ही एक आकर्षण था। उन्होंने अपने पिता की भूमिका के बारे में आगे कहा “वह मेरे लिए ज़िंदगी में एक उदाहरण हैं। वह मेरे उदाहरण हैं कि अगर मुझे बेस्ट बनना है तो मैं बन सकता हूं। अगर वेॉह नहीं होते तो मैं जो आज जो हूं उसका 1 प्रतिशत भी नहीं होता।”

पेस आगे बताते हैं “भारत के ऐसे परिवार से ताल्लुक रखने का मतलब है कि आपके उपर ओलंपिक खेलने का दबाव होगा। 1.3 बिलियन लोगो के सामने खेलना और उन्हें प्रेरित करना एक ज़िम्मेदारी का काम है।”

युवा पेस के लिए अपने पिता का ओलंपिक मेडल एक प्रेरणा का प्रतीक था और वे भी इसी तरह मेहनत कर खेल जगत में अपना नाम बनाना चाहते थे। पेस ने बताया कि जब मैं छोटा था तो हर रविवार को चर्च से आने बाद मैं अपने पिता का मेडल साफ़ किया करता था और हमेशा सोचता था कि वह मेडल दरअसल क्या अहमियत रखता है। मैंने उस पर एक ओलंपिक एंजल देखी, एक पिन देखी, मैंने उस पर पुष्पांजलि देखी और अलग अलग रिबन भी देखे।”

भारतीय टेनिस स्टार ने आगे कहा “किसी करणवश मुझे वह मेडल मेरे पिता द्वारा जीती किसी भी ट्रॉफी से ज़्यादा आकर्षित करता था। जब मैं थोडा बड़ा हुआ तो मुझे भारत जैसे देश में 1.3 बिलियन लोगो के सामने खेलने की अहमियत का अंदाजा हुआ।

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एक आँसू बहाना अच्छा है

पेस परिवार का मानना है कि शारीरिक और मानसिक तंदरुस्ती एक बहुत महत्वपूर्ण किरदार अदा करती है। ऐसे में कोरोना वायरस (COVID-19) के चलते पेस ने भी मानसिक ताकत की अहमियत को दर्शाया।

“अगर आप भावुक हैं और आपके अंदर चीज़ें पनप रही हैं तो एक आँसू बहाने में कोई हर्ज नहीं है। अपने दोस्तों को बुलाना और खुद के भाव को ज़ाहिर करने में कोई गलत बात नहीं है। बल्कि इससे आप और मज़बूत बन जाते हैं, यह आपको एक चैंपियन बनाता है जो कि अपना इमोशन भी ज़ाहिर करता है।"

टोक्यो 2020 के बाद ही पेस अपनी रफ़्तार को थामेंगे

लिएंडर पेस ने पहले ही कह दिया था कि टोक्यो 2020 (Tokyo 2020) यानी ओलंपिक गेम्स का सीज़न उनके करियर का आखिरी सीज़न होगा। हालांकि अब जब टोक्यो गेम्स को पोस्टपोन कर दिया गया है तो ऐसे में पेस की स्थिति अब पहले जैसी नहीं रही है।

इस हीरो ने आगे कहा “टोक्यो 2020 में खेलना एक मर्म जैसा है और अगर मैं आगे खेलता हूं तो ओलंपिक का रिकॉर्ड भी बढ़ जाएगा। मेरी परवरिश ही इतिहास के पन्ने दोबारा लिखने के लिए की गई है। ऐसे में टोक्यो 2020 में खेलना बहुत अहम है।"

भारतीय चैंपियन ने बताया “ओलंपिक गेम्स को 2021 के लिए स्थगित कर दिया गया है। यह मेरी ज़िंदगी में उन चीज़ों की तरह है जो मैंने बहुत मुश्किलों से हासिल की है। अब जब मैं 46 का हूं और अगले महीने 47 का हो जाऊँगा तो ऐसे में मुझे खुद को शारीरिक तौर से फिट तो रखना ही है और वह आसान भी है लेकिन मानसिक तौर पर फिट होना भी बहुत ज़रूरी है।”

इसी चैट के दौरान लिएंडर पेस ने आगे कहा “मुझे अपनी सोच को बदलना होगा। मुझे अपनी टीम के साथ दोबारा बैठना होगा और टेनिस शुरू होने बाद एक बार फिर निर्णय लेना होगा।”