चेक ओपन डबल्स फाइनल के सुपर-टाईब्रेकर में हारकर ख़िताबी जीत से चूके शरण और बालाजी

क्वार्टर-फाइनल और सेमीफाइनल में सीधे सेटों की जीत के साथ आगे बढ़ने के बाद दिविज शरण और श्रीराम बालाजी अपनी शानदार फॉर्म में नज़र आए, लेकिन मामूली सी कमी से फाइनल जीतने से वंचित रह गए।

लेखक रितेश जायसवाल ·

दिविज शरण (Divij Sharan) और एन श्रीराम बालाजी (N Sriram Balaji) की भारत की पुरुष युगल जोड़ी शुक्रवार को प्रोस्तेजोव में स्थानीय पसंदीदा डेनेक कोलार (Zdeněk Kolář) और लूकास रोसोल (Lukáš Rosol) की जोड़ी से चेक ओपन टेनिस के फाइनल में 2-6, 6-2, 6-10 से हार गई।

भारतीय जोड़ी ने क्वार्टर-फाइनल में आंद्रे गोरानसन (Andre Goransson) और गोंकालो ओलिवेरा (Goncalo Oliveira) की स्वीडिश-पुर्तगाली जोड़ी और सेमीफाइनल में डेविड पोल्जाक (David Poljak) और डालिबोर स्वेवसीना (Dalibor Svrcina) की चेक जोड़ी के खिलाफ सीधे सेटों में जीत हासिल करने के साथ ही फाइनल में जगह बनाई थी।

दोनों टीमों ने ओपनिंग सेट के पांचवें गेम तक अपनी सर्विस जारी रखी, इसके बाद चेक जोड़ी ने छठे गेम में शरण-बालाजी पर 4-2 की शुरुआती बढ़त हासिल की।

हालांकि, भारतीय जोड़ी ने सातवें गेम में दो ब्रेक प्वाइंट हासिल करते हुए वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन कोलार-रोसोल ने आठवें गेम में शरण-बालाजी की सर्विस को ब्रेक करते हुए पहला सेट 6-2 से जीत लिया।

दिविज शरण और एन श्रीराम बालाजी की भारतीय टेनिस जोड़ी चेक ओपन युगल फाइनल में हार गई।

इसके बाद दूसरे सेट में दिविज शरण और श्रीराम बालाजी ने पहले और तीसरे गेम में कोलार और लूकास की जोड़ी की सर्विस को ब्रेक करते हुए 3-0 की बढ़त हासिल कर ली।

भारतीय जोड़ी ने शुरुआती बढ़त को पूरी तरह भुनाते हुए इस सेट को 6-2 से जीत लिया, जिसके चलते यह मुक़ाबला सुपर-टाईब्रेकर में पहुंच गया, जहां सबसे पहले 10 अंक जीतने वाली टीम ही विजेता घोषित की जाती है।

हालांकि, भारतीय जोड़ी इस अंतिम पड़ाव में उतनी प्रभावी नहीं नज़र आई और कोलार और रोसोल ने 5-2 की बढ़त बनाने के लिए शरण और बालाजी की सर्विस को दो बार ब्रेक किया।

शरण और बालाजी की जोड़ी ने आठवीं सर्विस ब्रेक करते हुए वापसी की कोशिश जरूर कि लेकिन चेक जोड़ी का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी रहा और उसने 10-6 से इस सुपर-टाईब्रेकर को जीत लिया।