लिएंडर पेस बढ़ चुके हैं अगले मिशन की ओर जो है ‘ग्रैंड स्लैम’ का शतक लगाना

18 बार ग्रैंड स्लैम का हिस्सा रह चुके भारतीय टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस की नज़र ओलंपिक गेम्स में रिकॉर्ड बनाने पर भी है।

अपने चमचमाते करियर में भारतीय टेनिस स्टार लिएंडर पेस (Leander Paes) आखिरी बार ओलंपिक गेम्स का हिस्सा होने वाले हैं लेकिन वह रैकेट छोड़ने से पहले कुछ और भी हासिल करना चाहते हैं। 90 की शुरुआत में इस भारतीय सितारे ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट पर कदम रखे थे और तब से लेकर अब तक पेस 1 ओलंपिक मेडल और 18 ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम कर चुके हैं।

 टेनिस खिलाड़ी मुदित दानी (Mudit Dani) द्वारा होस्ट किए गए शो ‘इन द सपोर्टलाइट’ में पेस ने बताया कि “आगे खेलने का निर्णय इस पर भी निर्भर करता था कि मुझे अभी और भी मैजिकल गोल हासिल करने हैं। मैंने अभी तक 97 ग्रैंड स्लैम खेले हैं और अगर मैं और 3 में भाग लेता हूं तो आंकड़ा बढ़कर 100 हो जाएगा, और यह मुझे प्रेरणा देता है।”

साथ ही उन्होंने ये भी कहा “8वें ओलंपिक गेम्स में खेलने का मतलब है कि भारत हमेशा किसी भी टेनिस खिलाड़ी द्वारा खेले गए ओलंपिक के आंकड़ों में सबसे ऊपर रहेगा। यह एक बेंचमार्क है और मैं इसे और ऊंचा ले जाना चाहता हूं।’’

पिछले साल इस खिलाड़ी ने ज़ाहिर कर दिया था कि 2020 सीज़न उनका आखिरी सीज़न होगा लेकिन अब कोरोना वायरस (COVID-19) की वजह से खेल जगत में अड़चनें आ चुकी हैं तो ऐसे में पेस अभी अपनी पेस को दोबारा तेज़ कर सकते हैं और आगे तक खेल सकते हैं। 

लिएंडर पेस ने ऑस्ट्रेलियन ओपन के ज़रिए अपने 97वें ग्रैंड स्लैम में हिस्सा लिया था और साल के अंत तक वह इस आंकड़े को बढ़ाकर 100 कर सकते थे।

फिलहाल फ्रेंच ओपन को टाल दिया गया है और साथ ही विंबलडन रद्द हो चुका है तो इस भारतीय टेनिस दिग्गज को साल 2021 तक अपने करियर को ले जाना होगा और बचे हुए कीर्तिमान हासिल करने होंगे।

ओलंपिक की यादें सबसे ख़ास

लिएंडर पेस ने ओलंपिक गेम्स में डेब्यू सन 1992 में किया था। बार्सिलोना के उस संस्करण में पेस ने रमेश कृष्णन (Ramesh Krishnan) के साथ क्वार्टर फाइनल तक का सफ़र तय किया था। ग्रैंड स्लैम की बात की जाए तो उन्होंने डबल्स डेब्यू लॉरेंस टिलिमैन (Laurence teiliman) के साथ 1993 विंबलडन में किया था।

अपने दूसरे ओलंपिक यानी अटलांटा 1996 में इस खिलाड़ी ने अपने नाम के आगे दिग्गज लगा लिया था और बन गए थे लाखों भारतीयों के दिल की धड़कन। इस संस्करण में पेस ने सेमीफाइनल तक का सफ़र तय किया और वह उस समय के विश्व नंबर 1 आंद्रे अगासी (Andre Agassi) से हारे थे। उस मुकाबले और उस ओलंपिक सफ़र के बाद टेनिस की दुनिया में पेस का नाम और भी ज़्यादा अदब से लिया जाने लगा। 

ब्रॉन्ज़ मेडल मैच में इस युवा का मुकाबला फर्नांडो मेलिगेनी (Fernando Meligeni) से हुआ। एक सेट पीछे चल रहे पेस ने हार न मानने की कसम खा रखी थी और मुकाबले को जीत कर भारत की झोली में 44 साल बाद एक ओलंपिक मेडल डाल दिया।
इसके बाद उनका कारवां तेज़ी से बढ़ने लगा और साल 1998 में महेश भूपति (Mahesh Bhupathi) के साथ जोड़ी बनाकर पेस ने बड़े से बड़ा कीर्तिमान हासिल किया। उस दौरान पेस/भूपति की जोड़ी ने चारों ग्रैंड स्लैम के फाइनल में प्रवेश किया था और फ्रेंच ओपन में खिताबी जीत हासिल की थी। इतना ही नही इस जोड़ी ने विंबलडन में खुद को अव्वल नंबर पर रख खिताब अपने नाम किया। SW19 में इस भारतीय सेंसेशन ने लिसा रेमंड (Lisa Raymond) के साथ जोड़ी बनाकर अपना पहला मिक्स्ड डबल्स टाइटल जीता और एक बार फिर ख़ुद को साबित किया।

तब से लेकर अब तक पेस ने और 15 ग्रैंड स्लैम खिताबों पर अपने नाम की मुहर लगाई है, जिसमें 6 मेंस डबल्स हैं और 9 मिक्स्ड डबल्स के ख़िताब हैं। इन सब उपलब्धियों के बाद भी पेस ने हमेशा ख़ास रहने वाले उस पल के बारे में बताया “मैं ओलंपिक चैनल के लिए एक वेबिनार कर रहा था (जहां वह ओलंपिक टॉर्च दिखाकर भावुक हो गए थे)। चाहे मेरे पास 800-900 ट्रॉफी हैं, चाहे मैं उन्हें कितनी बार भी चमकाता रहूं, लेकिन उन सभी की यादें बहुत खूबसूरत हैं।”
उन्होंने आगे कहा “लेकिन जब भी मैं ओलंपिक टॉर्च या ओलंपिक मेडल को पकड़ता हूं तो मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ऐसे में भारत में एक बड़े संगठन के लिए खेलना सौभाग्य की बात है।”

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