सोमदेव देववर्मन ने फ्रेंच ओपन में रोजर फेडरर के ख़िलाफ़ मिली शर्मनाक हार को भी प्रेरणा बताया

सोमदेव ने सोचा था कि वह अपने करियर की सबसे बेहतरीन फ़ॉर्म में चल रहे थे लेकिन स्विस दिग्गज ने रोलांड गैरोस में यह साबित कर दिया था कि क्यों वह टेनिस के किंग हैं।

दुनिया के कई खिलाड़ियों को अपनी सबसे बेहतरीन फॉर्म में रहते हुए रोजर फेडरर का सामना करने का मौका नहीं मिला है। हालांकि, 2012 के ओलंपियन सोमदेव देववर्मन (Somdev Devvarman) को 2013 फ्रेंच ओपन में बड़ी मुश्किल से यह मौका हाथ लग गया था।

कंधे की सर्जरी के बाद एटीपी टूर में वापसी करते हुए सोमदेव देववर्मन फ्रेंच ओपन के मुख्य ड्रा से ही शानदार प्रदर्शन करते हुए आगे बढ़े।

उन्होंने अपने तीन में से दो क्वालिफाइंग मैच सीधे सेटों में जीते थे और उसके बाद रोलैंड गैरोस में पहले राउंड में भी स्पैनियार्ड डैनियल मुनोज़-डी ला नावा (Daniel Munoz-De La Nava) पर सीधे सेटों में जीत दर्ज की थी।

दूसरे राउंड में सोमदेव देववर्मन का सामना रोजर फेडरर से क्ले कोर्ट में होना था। मिट्टी के कोर्ट में फेडरर के बहुत अच्छे न होने की वजह से लोगों को लगा कि भारतीय टेनिस शीर्ष के लिए उन्हें हराने का यह एक शानदार मौका साबित हो सकता है। 

सोमदेव देववर्मन ने भारतीय कॉमेडियन सौरभ पंत (Sorabh Pant) द्वारा होस्ट किए जा रहे 'वेक अप' पॉडकास्ट पर हंसते हुए कहा, “मुझे रोजर के खिलाफ एक बड़े कोर्ट में खेलने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। यह वह समय था जब सभी को लग रहा था कि रोजर फेडरर बूढ़े हो रहे हैं।”

हालांकि, जल्द ही भारतीय टेनिस खिलाड़ी का यह उत्साह चकनाचूर हो गया।

2013 फ्रेंच ओपन में सोमदेव देववर्मन को रोजर फेडरर से मिली हार
2013 फ्रेंच ओपन में सोमदेव देववर्मन को रोजर फेडरर से मिली हार2013 फ्रेंच ओपन में सोमदेव देववर्मन को रोजर फेडरर से मिली हार

सोमदेव देववर्मन बनाम रोजर फ़ेडरर

कोर्ट पर रोजर फेडरर ने सोमदेव पर 6-2, 6-1, 6-1 से जीत दर्ज की। सोमदेव देववर्मन ने स्वीकार किया कि फेडरर जब भी जीतने वाला शॉट हिट करते थे तो वह सिर्फ देखते रह जाते थे।

35 वर्षीय देववर्मन ने याद करते हुए कहा, "उनके बजाए जब भी कोई खिलाड़ी रिटर्न मारता था तो मैं बहुत जल्दी गेंद तक पहुंच जाता था। मैं आमतौर पर रिटर्न के करीब ही होता हूं। लेकिन जब यह इंसान एक जीत वाला शॉट मारता था, तो यह मुझसे काफी दूर होता था। मैं सिर्फ गेंद को देखता रह जाता था।”

कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स गोल्ड मेडल विजेता ने कहा, “सबसे बुरी बात यह है कि यह क्ले-कोर्ट पर था। इसलिए आप और भी अधिक शर्मिंदा हो जाते हैं, क्योंकि आप हर समय और हर बार फिसल रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि मैंने कभी इतना अच्छा खेला और इतनी बुरी तरह से हार गया।"

भले ही वह उस दिन हार गए, लेकिन सोमदेव देववर्मन के लिए एक आंखों को खोल देने वाला अनुभव था, जिसने उन्हें फेडरर, राफेल नडाल (Rafael Nadal), नोवाक जोकोविच (Novak Djokovic) और एंडी मरे (Andy Murray) जैसे महान खिलाड़ियों के खेल को सही से समझने के लिए प्रेरित किया।

उस वक़्त 188वें स्थान पर काबिज़ देववर्मन ने कहा, “यह मेरे लिए एक अच्छा अनुभव था। मैं वास्तव में उसे बुरे अनुभव की तरह नहीं महसूस करता हूं, क्योंकि वे दुनिया के शीर्ष-20 खिलाड़ियों में से एक हैं। मैं उनके आस-पास भी नहीं था।”

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