रोहन बोपन्ना ने कहा कि भारत को अभी ‘नडाल’ या ‘फेडरर’ तैयार करने में लगेगा वक़्त

युगल टेनिस के शीर्ष खिलाड़ी ने उन माता-पिता और कोचों को भी सुझाव दिया जो अपने बच्चों को अगला टेनिस स्टार बनाने का सपना देख रहे हैं।

भारतीय टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) ने देश से अपनी आशाओं और उम्मीदों पर धैर्य रखने की अपील की है। क्योंकि उन्हें लगता है कि राफ़ेल नडाल (Rafael Nadal) और रोजर फ़ेडरर (Roger Federer) जैसे दिग्गज टेनिस चैंपियन को भारत में तैयार करने में अभी थोड़ा वक़्त लगेगा।

भारत में टेनिस का विकास और बुनियादी ढांचा धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है। रोहन बोपन्ना ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस खेल के चैंपियन को तुरंत तैयार करने का लक्ष्य रखना सही नहीं है।

कोच सुरेश सोनचलम (Suresh Sonachalam) के साथ अखिल भारतीय टेनिस संघ (AITA) द्वारा आयोजित की गई एक वेबचैट में उन्होंने कहा, “हमारे एथलीटों की तुलना कभी भी नडाल या फेडरर के साथ न करें। हम अलग हैं, लेकिन हम भारत मैं चैंपियन तैयार कर सकते हैं। हमें कम उम्र में टेनिस खिलाड़ियों को तैयार करने पर ध्यान देने की आवश्यकता है। भारत में हमारे पास बहुत विद्वान लोग हैं। हमारे कोचों पर भरोसा रखें।”

रोहन बोपन्ना ने कहा कि घरेलू टेनिस को बढ़ावा देने का अभी सही समय।
रोहन बोपन्ना ने कहा कि घरेलू टेनिस को बढ़ावा देने का अभी सही समय।रोहन बोपन्ना ने कहा कि घरेलू टेनिस को बढ़ावा देने का अभी सही समय।

उन्होंने आगे कहा, “हम सभी को चैंपियन तैयार करने के लिए एक साथ आगे आना होगा।”

बोपन्ना ने माता-पिता और कोचों को दी सलाह

रोहन बोपन्ना ने 11 साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू कर दिया था। अपने करियर के शुरुआती वर्षों में पर्याप्त मार्गदर्शन न मिल पाने और फिटनेस की कमी की वजह से एक नामी कोचिंग सेंटर उन्हें छात्रवृत्ति देने से मना कर दिया था।

भारतीय टेनिस के इस शीर्ष खिलाड़ी ने अपना नाम बनाने के लिए कड़ी मेहनत की और हमवतन महेश भूपति (Mahesh Bhupathi) के पिता सीजीके भूपति (CGK Bhupathi) ने उनके लिए बहुत कुछ किया। उन्होंने बोपन्ना को एक अच्छी सर्विस करने में मदद की, यह कुछ ऐसा है जो बीते कुछ वर्षों में उनकी एक पहचान बन चुका है।

अपने करियर के शुरुआती वर्षों में तमाम मुश्किलों का सामना करने वाले रोहन बोपन्ना ने उन माता-पिता को भी कुछ जरूरी सलाह दी, जो अपने बच्चों को आने वाले समय में टेनिस स्टार बनाना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “सभी माता-पिता कोचों पर भरोसा करते हैं। आपको जल्दी-जल्दी स्कूल नहीं बदलना चाहिए। एक कोच को कम से कम छह महीने का समय दें।” इसके अलावा उन्होंने कोचों से एक युवा खिलाड़ी के विकास में उनकी भूमिका से पड़ने वाले प्रभाव और बदलाव को समझने की भी अपील की।

रोहन बोपन्ना ने कहा, “बच्चों को किसी दायरे में मत बांधिए। देखिए कि बच्चे के लिए क्या बेहतर है। आप प्रत्येक व्यक्ति से कुछ सीखते हैं। हम सभी को मिलकर काम करना होगा और खिलाड़ी को आगे ले जाना होगा। मैंने स्कूल और कॉलेज में अलग-अलग कक्षाओं में एक ही शिक्षक से शिक्षा नहीं ली है।”

लम्बे करियर का रहस्य क्या है?

टेनिस को एक बहुत ही अधिक शारीरिक क्षमता वाले खेल के रूप में जाना जाता है और कोर्ट पर फिटनेस और संतुलन का जबरदस्त होना बहुत जरूरी है। 40 साल की उम्र में भी रोहन बोपन्ना जैसे खिलाड़ी बेहतर करते जा रहे हैं। इस जज़्बे को बनाए रखने और आगे बढ़ते रहने के लिए किसी खास चीज़ की जरूरत होती है।

भारतीय टेनिस स्टार ने कहा, “एक फिजियो की वजह से मेरा करियर लम्बा हो गया है। मैं पिछले साल स्टटगार्ट (जर्मनी का एक शहर) में था और डेनिस शापोवालोव (Denis Shapovalov) के साथ जोड़ी बनाकर एलेक्स डे मिनाउर (Alex de Minaur) और उसके साथी के खिलाफ अभ्यास कर रहा था। डेनिस शापोवालोव कोर्ट में काफी अच्छी तरह से मूव करते हैं, अगर मैं उनके जैसा करने की कोशिश करता तो शायद अपना टखना तोड़ लेता।”

एक फिज़िकल ट्रेनर के महत्व को रोहन बोपन्ना ने अपने करियर के काफी बाद में समझा, इसलिए वह चाहते हैं कि युवा खिलाड़ी अपने करियर की शुरुआत में ही उनका लाभ उठाएं। यही वजह है कि उन्होंने बैंगलोर में अपनी अकादमी में प्रसिद्ध ट्रेनर चेल्स्टन पिंटो (Chelston Pinto) को फिटनेस कोच के तौर पर नियुक्त किया है।

उनका यह निर्णय वाकई सही साबित हुआ है, क्योंकि पिंटो ने निकी पूनाचा (Niki Poonacha) पर काफी काम किया और उसी का नतीजा है कि 24 वर्षीय ने पिछले साल सीनियर मेंस खिताब अपने नाम करने में सफलता हासिल की।

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