सेरेना विलियम्स के ख़िलाफ़ खेलने से सानिया मिर्ज़ा का बढ़ता है आत्मविश्वास

भारतीय टेनिस दिग्गज ने खुलासा किया कि अमेरिकी लिजेंड के खिलाफ खेलने से उन्हें लगता है कि वो शीर्ष खिलाड़ी हैं।

2003 में जूनियर विंबलडन डबल्स का खिताब जीतने के बाद से सानिया मिर्ज़ा दुनिया के सबसे बड़े टूर्नामेंटों में भारतीय टेनिस की ध्वजवाहक रही हैं, जिन्होंने छह युगल ग्रैंड स्लैम जीते हैं।

वो हमेशा कोर्ट पर एक आक्रामक प्रतियोगी रही हैं। 33 वर्षीय सानिया मिर्ज़ा ने हाल ही में बताया कि कैसे 2005 के ऑस्ट्रेलियन ओपन में सेरेना विलियम्स (Serena Williams) के खिलाफ उनकी संघर्ष ने उन्हें आत्मविश्वास दिलाने में मदद की थी।

भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने AITA द्वारा आयोजित एक वेबिनार में कहा कि, “मैं पहली बार सेरेना विलियम्स को देख रही थी और मुझे उनका मुकाबला करना था। सबसे बेहतरीन खिलाड़ी के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करने और सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक बनने के पर मुझे एक अलग लेवल का आत्मविश्वास मिला।”

सानिया मिर्ज़ा को तब अपने करियर में केवल दो साल ही हुए थे जब उन्होंने वाइल्ड कार्ड के रूप में ऑस्ट्रेलियन ओपन में प्रवेश किया था, जहां एक प्रभावशाली अभियान रहा था।

उन्होंने पहले दौर में स्थानीय खिलाड़ी सिंडी वॉटसन (Cindy Watson) को तीन सेटों तक चले मुक़ाबले में हराने से पहले पूर्व विश्व नंबर 30 खिलाड़ी हंगरियन पेट्रा मंडुला (Petra Mandula) को हराकर बड़ा उलटफेर किया ग्रैंड स्लैम के तीसरे दौर में जगह बनाने वाली पहली भारतीय महिला टेनिस खिलाड़ी बन गईं।

इसके बाद सानिया मिर्ज़ा तीसरे दौर में सेरेना विलियम्स के खिलाफ उतरीं और हार गई। उस समय सेरेना विलियम्स पहले से ही एक महान खिलाड़ी बनने की राह पर थीं, तब उन्होंने छह ग्रैंड स्लैम जीते थे और फिर ये टूर्नामेंट भी जीतकर अपना सातवाँ ख़िताब हासिल किया।

इसके एक साल बाद भारतीय टेनिस खिलाड़ी हैदराबाद ओपन में WTA का ख़िताब जीतने वाली पहली महिला बन गई थीं। इस प्रदर्शन के बाद वो बड़ी खिलाड़ियों में शुमार होने लगीं।

उन्होंने कहा कि, “अगर मैं सेरेना के ख़िलाफ़ प्रतिस्पर्धा कर सकती हूं, तो मैं किसी के भी ख़िलाफ़ प्रतिस्पर्धा कर सकती हूं।”

हैदराबाद की मूल निवासी सानिया मिर्ज़ा ने हाल ही में अपने पहले फेड कप प्ले ऑफ में देश का नेतृत्व किया और फेड कप हार्ट अवार्ड जीतने वाले वाली पहली भारतीय टेनिस खिलाड़ी बनीं। इस साल की शुरुआत में ही वो एक बेटे को जन्म देने के बाद लंबी समय के बाद टेनिस कोर्ट पर लौटी थीं।

संयोग से वो सेरेना विलियम्स ही थीं, जिन्होंने सानिया मिर्ज़ा की फिर से वापसी में अपनी छोटी सी भूमिका निभाई थी। सेरेना ने भी अपने बच्चे एलेक्सिस ओलंपिया ओहानियन जूनियर के जन्म के कुछ महीने बाद ही टेनिस कोर्ट पर वापसी की थी।

भारतीय टेनिस दिग्गज ने पिछले साल प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) को बताया था कि, "वापसी के लिए खुद का उत्सावर्धन पर्याप्त है, लेकिन सेरेना जैसी एथलीट को जन्म देने के बाद ग्रैंड स्लैम में भाग लेते हुए देखना अच्छा लगता है। ये बहुत प्रेरणादायक है।"

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