सानिया मिर्ज़ा ने बताया क्यों करती हैं वह एकल खिलाड़ियों की तरह ट्रेनिंग 

इस अनुभवी खिलाड़ी ने यह भी बताया कि एक अपरम्परागत तकनीक द्वारा कैसे उन्होंने ट्रेडमार्क फ़ोरहैंड को मुमकिन बनाया।

सानिया मिर्ज़ा (Sania Mirza ) अपने करियर में अधिकांश समय एक सक्रिय एकल और युगल खिलाड़ी रही हैं। एक बार वह महिला टेनिस संघ (WTA) द्वारा जारी रैंकिंग में 27वें स्थान तक पहुंच गईं थीं।

हालांकि, साल 2013 के बीच से उन्होंने केवल डबल्स पर ही फोकस किया, क्योंकि इस भारतीय खिलाड़ी को लगता था कि उनके शरीर पर ज्यादा दबाव पड़ रहा है। इसके साथ ही वह अनुशासन के साथ मेहनत करते हुए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनने का सपना पूरा करना चाहती थी।

सानिया मिर्ज़ा ने अपना ये सपना पूरा भी किया और वह साल 2015 में वह दुनिया की नंबर वन डबल्स खिलाड़ी थी। भारत के पहले फेड कप हार्ट अवार्ड विजेता ने खुलासा किया कि वह अभी भी एकल खिलाड़ी के जैसे ही पूरी मेहनत से ट्रेनिंग करती हैं।

भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान सुनील क्षेत्री (Sunil Chhetri) के साथ इंस्टाग्राम लाइव के दौरान सानिया ने बताया, "मैंने दोनों ( एकल और डबल्स) को खेलते हुए 10 साल बिताए और जब मैंने केवल डबल्स पर स्विच करने का फैसला लिया तो मैं अचानक अपने प्रशिक्षण में कटौती नहीं कर सकी।"

इसके अलावा उन्होंने कहा, “जाहिर है कि डबल्स में शारीरिक थकान कम होती है क्योंकि आपको आधे कोर्ट को कवर करना होता है। इसके बावजूद मैं अपनी ट्रेनिंग में बदलाव नहीं कर पाई। मैं चाहती थी कि मुझे ट्रेनिंग के बाद लगे कि मैंने अपना बेस्ट दिया है और पूरी थकान के साथ बिस्तर पर जाना चाहती थी।”

सानिया ने ये भी कहा, “अगर मैं ऐसा करने में नाकाम होती तो वह ऐसा करना छोड़ देती।”

फोरहैंड शॉट सानिया मिर्ज़ा का ट्रेडमार्क शॉट है
फोरहैंड शॉट सानिया मिर्ज़ा का ट्रेडमार्क शॉट हैफोरहैंड शॉट सानिया मिर्ज़ा का ट्रेडमार्क शॉट है

सानिया मिर्ज़ा के फ़ोरहैंड के पीछे का राज़

फोरहैंड निश्चित रूप से सानिया मिर्ज़ा का सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसकी गति और शक्ति के आधार पर ये भारतीय टेनिस खिलाड़ी बेसलाइन से विरोधी पर हावी होती हैं।

मां बनने के कारण दो साल से भी अधिक समय पर कोर्ट पर न उतरने वाली 33 साल की ये खिलाड़ी अभी भी पूरी फॉर्म में है और अपने प्रसिद्ध शॉट पर लगातार काम भी कर रही हैं।

भारतीय स्टार ने बताया, “मेरे शुरुआती दिनों में मैंने वेस्टर्न ग्रिप (जहां कलाई अधिकतर रैकेट के नियंत्रण में थी) का इस्तेमाल किया था, लेकिन मैंने इसे थोड़ा पीछे की ओर खींचा, ताकि मैं अपनी कलाई को तोड़ने का जोखिम न उठाऊं। मेरा फोरहैंड अभी भी 60-70 प्रतिशत स्वाभाविक है।"

सानिया मिर्ज़ा ये परिवर्तन इसलिए कर पाई क्योंकि उनके पास हाइपरमोबाइल जोड़ें है, जिससे उन्हें फोरहैंड पर और अधिक लचीलापन मिलता है। हालांकि कोच ने उसे 'अपरम्परागत' तकनीक के उपयोग के लिए मना किया लेकिन उन्होंने उनकी बात नहीं मानी।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान सानिया ने बताया, “इसकी वजह से मैं अंतिम समय में फोरहैंड की दिशा बदल सकती हूं, जिसका मतलब है कि मेरे विरोधी इसे नहीं पढ़ सकते हैं ।” इसके अलावा इस भारतीय खिलाड़ी ने कहा “आमतौर पर, आपका बायां कंधा फोरहैंड की दिशा को इंगित कर सकता है, लेकिन मैं किसी भी स्थिति में कर सकती हूं और फिर इससे बदल भी सकती हूं।"

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