विष्णु वर्धन और सानिया मिर्ज़ा की वो कहानी, जब उन्होंने सिल्वर मेडल अपने नाम किया।

विष्णु वर्धन ने बताया कि 2010 एशियन गेम्स में सानिया मिर्ज़ा ने मिक्स डबल्स स्पर्धा के लिए उन्हें कैसे चुना और इस जोड़ी ने कैसे रजत पदक अपने नाम किया।

ओलंपियन विष्णु वर्धन (Vishnu Verdhan) ने चीन के ग्वांगझू में 2010 एशियाई खेलों में भारतीय टेनिस टीम के लिए अपने यादगार मैचों में से एक को फिर से याद किया।

पुरुषों की टीम स्पर्धा में तत्कालीन 23 वर्षीय ने कांस्य जीता लेकिन अनुभवी सानिया मिर्जा (Sania Mirza) के साथ मिश्रित युगल में रजत ने उनको ज्यादा खुशी दी।

जब एशियन गेम्स के लिए हैदराबाद में तैयारी चल रही थी, तभी सानिया मिर्ज़ा और विष्णु वर्धन आमने-सामने हुए थे। सानिया और विष्णु ने वहां एक साथ साझेदारी बनाई।

इसके कारण ही सानिया मिर्ज़ा विष्णु के खेल को नज़दीकी से समझ सकीं।

विष्णु वर्धन ने तेलंगाना टुडे अखबार के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि, “मैं भाग्यशाली था कि सानिया ने मिश्रित युगल में मेरे साथ खेलने का फैसला किया। उन्हें विश्वास था कि मैं हैदराबाद में एक साथ अभ्यास करने के साथ बड़े मैचों में भी खेलने की क्षमता रखता हूं।”

विष्णु वर्धन ने 2010 के एशियन गेम्स में सानिया मिर्ज़ा के साथ रजत पदक जीता। फोटो: विष्णु वर्धन / फेसबुक
विष्णु वर्धन ने 2010 के एशियन गेम्स में सानिया मिर्ज़ा के साथ रजत पदक जीता। फोटो: विष्णु वर्धन / फेसबुकविष्णु वर्धन ने 2010 के एशियन गेम्स में सानिया मिर्ज़ा के साथ रजत पदक जीता। फोटो: विष्णु वर्धन / फेसबुक

सानिया मिर्जा ने जो विश्वास जताया था, उसका मतलब था कि भारतीय टेनिस जोड़ी को कड़ी टक्कर देनी थी। भारतीय जोड़ी ने ऐसा ही किया और अपने प्रत्येक मैच को तीन सेटों में जीतकर 2010 एशियाई खेलों में फाइनल का रास्ता तय किया।

फाइनल में जब वो चीनी ताइपे के चैन युंग-जान (Chan Yung-jan) और यांग सुंग-हुआ (Yang Tsung-hua) के साथ खेलनमे उतरे तो सानिया मिर्जा और विष्णु वर्धन पर थकान दिखाई देने लगी थी, क्योंकि वो एक और तीन-सेटर मैच के लिए तैयार नहीं थे। और अंततः उन्हें हार का सामना करना पड़ा।

भारतीय टेनिस खिलाड़ी ने आगे कहा, “उनके पास सोमदेव देववर्मन (Somdev Devvarman)और करण रस्तोगी (Karan Rastogi) के साथ खेलने का विकल्प था, जिन्हें मुझसे बहुत अधिक वरीयता दी गई थी। सानिया मिर्ज़ा ने मेरे ऊपर एक बड़ा जुआ खेला और हम फाइनल में पहुंच गए। मैंने एशियन गेम्स का रजत पदक सानिया की वजह से जीता।”

इससे भी महत्वपूर्ण बात ये है कि, ये विष्णु वर्धन के लिए भाग्य में एक बदलाव लाया, क्योंकि उन्होंने भारतीय टेनिस टीम के लिए डेविस कप की शुरुआत की और अगले दो वर्षों में सोमदेव देववर्मन के बाद भारत के दूसरे सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बन गए।

2012 के लंदन ओलंपिक में उनके प्रयासों के लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया था।

लिएंडर पेस के साथ खेलने का मिला मौका

लंदन 2012 ओलंपिक में लिएंडर पेस (Liander Paes) के साथ खेलने के लिए विष्णु वर्धन को भारतीय टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस के लिए पुरुष युगल साथी चुना गया।

2012 ओलंपिक में विष्णु वर्धन और लिएंडर पेस। फोटो: विष्णु वर्धन / फेसबुक
2012 ओलंपिक में विष्णु वर्धन और लिएंडर पेस। फोटो: विष्णु वर्धन / फेसबुक2012 ओलंपिक में विष्णु वर्धन और लिएंडर पेस। फोटो: विष्णु वर्धन / फेसबुक

हैदराबाद के मूल निवासी ने अटलांटा 1996 के कांस्य पदक विजेता के साथ आगे बढ़ते गए और भारतीय टेनिस में दूसरे नंबर के खिलाड़ी के रूप खुद को स्थापित किया। जिससे उन्हें लिएंडर पेस के साथ जोड़ी बनाने का मौका मिला।

“मुझे लिएंडर के साथ खेलने का मौका इसलिए दिया गया क्योंकि मैं भारत का दूसरे नंबर का खिलाड़ी हूं। विष्णु वर्धन ने कहा कि मेरे लिए उस ओलंपिक में खेलना एक बड़ा बदलाव था।

भारतीय टेनिस जोड़ी रॉबिन हासे (Robin Haase) और जीन-जूलियन रोजर (Jean-Julien Rojer) की डच जोड़ी के खिलाफ जीत के साथ दमदार अंदाज में शुरुआत की, लेकिन फ्रांस के जो-विलफ्रीड सोंगा (Jo-Wilfried Tsonga) और माइकल ललोडरा (Michael Llodra) के हाथों हारने के बाद बाहर हो गई।

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