25 सालों में भारतीय महिला एथलीटों ने देश का नाम गौरवान्वित किया है: सानिया मिर्ज़ा

टेनिस स्टार ने हाल ही में भारत की महिला एथलीटों द्वारा किए गए शानदार प्रदर्शन की तारीफ़ की, वहीं उन्होंने ये भी माना की उन्हें अभी एक लंबा सफ़र तय करना है।

भारतीय टेनिस सुपरस्टार सानिया मिर्ज़ा (Sania Mirza) को लगता है कि भारत में महिलाओं का खेल सही दिशा में आगे बढ़ रहा है और वो कम उम्र से ही खेलों को गंभीरता से ले रही हैं।

स्मृति और जेमी के साथ डबल ट्रबल नामक यूट्यूब पर एक चैट शो में छह बार की युगल ग्रैंडस्लैम चैंपियन ने पीवी सिंधु (PV Sindhu), साइना नेहवाल (Saina Nehwal), साक्षी मलिक (Sakshi Malik) और दीपा कर्माकर (Deepa Karmakar) जैसे सितारों को उदहारण बताया और इन्हें बदलाव का संकेत भी बताया।

“जब मैंने शुरुआत की तो मैं गोबर से बने टेनिस कोर्ट पर खेला करती थी।” उन्होंने भारतीय महिला क्रिकेटर्स जिमी रोड्रिगेज (Jemimah Rodrigues) और स्मृति मंधाना (Smriti Mandhana) को बताया कि जब हम गिरते थे तो हमें टेटनस इंजेक्शन लेना पड़ता था, ताकि हमें कोई संक्रमण न हो।

“हमें जिस तरह की सुविधाएं शुरू में मिली हैं, उसे देखते हुए जब हम ये देखते हैं कि हम आज कहाँ हैं, तब पता चलता है कि हम लंबा सफर तय कर चुके हैं। जब मैंने टेनिस खेलना शुरू किया, तो भारत की एकमात्र महिला एथलीट पीटी उषा थीं। कोई दूसरी एथलीट नहीं थी जिसके बारे में आपने सुना हो।''

“पिछले 25 सालों में हम अब कम से कम 10-15 स्टार महिला एथलीटों जानते हैं। यह खुद दिखाता है कि हमने कितनी तरक्की की हैं ... लड़कियों के लिए खेल एक करियर विकल्प के रूप में विकसित हो रहा है।''

पूर्व विश्व नंबर एक खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा 2003 से एक पेशेवर टेनिस खिलाड़ी रही हैं और भारत में युवा खिलाड़ियों के लिए एक प्रेरणा की श्रोत रही हैं।

उन्होंने इस साल की शुरुआत में एक मैटरनिटी ब्रेक के बाद टेनिस में वापसी की और होबार्ट इंटरनेशनल डबल्स का खिताब जीतकर और फिर पहली बार फेड कप प्लेऑफ में भारत की अगुवाई के साथ मैदान में उतरीं।

एथलीट के लिए मां की जिम्मेदारी निभाना भी चुनौती है

जैसा कि उन्होंने अपने समय के हिसाब से खुद को मां बनने के लिए तैयार किया था, वहीं वजह है कि आज भी उनमें एक टेनिस खिलाड़ी है। सानिया मिर्जा ने कहा कि “मानो या न मानो, जन्म देने से दो रात पहले, मैं 2 बजे उठी। मैं सो नहीं सकी और बहुत असहज महसूस कर रही थी।”

उन्होंने कहा कि, "मेरे घर पर टेनिस कोर्ट है ... मैं अपनी बहन और पिताजी को टेनिस कोर्ट ले गई और 39 सप्ताह और पांच दिनों के बाद गेंद को हिट किया।" उन्होंने आगे कहा, “मैंने करीब 25 मिनट तक गेंदें खेलीं और मुझे बहुत अच्छा लगा।''

उन्होंने कहा कि "मुझे लगता है कि हमारे शरीर (एथलीटों के) भी उन लोगों की तुलना में गर्भावस्था को अलग तरह से लेते हैं जो एथलीट नहीं होते हैं, क्योंकि उनके शरीर मजबूत नहीं होते हैं। मुझे इसकी वजह से किसी प्रकार का प्रतिबंध महसूस नहीं हुआ, लेकिन आपका शरीर पूरी तरह से बदल जाता है। ऐसा लगता है जैसे कुछ ऐसा कर रहे हैं जिसमें बहुत बड़ी मानसिक शक्ति की ज़रूरत हो।”

लेकिन खेल में उनकी वापसी आसान नहीं थी। सानिया मिर्ज़ा ने काफी वजन बढ़ा लिया था, एक समय वो 89 किलोग्राम की हो गई थीं।

उन्होंने हसते हुए कहा कि "जब मैंने पहली बार एक ट्रेडमिल पर कदम रखा तो मुझे इतना भारी लगा कि मुझे लगा कि मैं फिर कभी वज़न कम करने वाली नहीं हूँ," “चार महीने बाद मैंने 26 किलोग्राम वजन कम किया। ये बहुत मुश्किल काम था। इसके लिए आपको जिद और दृढ़ संकल्प की ज़रूरत होत है।”

“मेरे एक डाइट विशेषज्ञ और एक निर्धारित डाइट होती थी। मैं भी हर दिन लगभग ढाई घंटे कार्डियो करती थी।''

“मेरे ट्रेनर 20 किलोग्राम वजन कम करने के बाद आए और फिर छह सप्ताह तक मैंने टेनिस-आधारित ट्रेनिंग शुरू कर दी, जिसमें हर दिन लगभग तीन घंटे तक सब कुछ शामिल था। पांच महीने बाद ही मैंने टेनिस खेलना शुरू कर दिया था।''

सानिया मिर्ज़ा वर्तमान में हैदराबाद में घर पर हैं और ओलंपिक पदक जीतने का सपना संजोई हुई हैं। जो उनकी ज़िंदगी से अभी तक दूर ही रहा है।

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