कर्णम मल्लेश्वरी का कर्मफल, युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का प्रतीक

भारतीय वेटलिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक गेम्स में मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनीं थी, उन्होंने सिडनी गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल पर कब्ज़ा जमाया था।

वो कहते हैं कि ओलंपिक गेम्स का ओहदा मेडल जीतने से कहीं बड़ा होता है और इस बात को सिद्ध किया है वेटलिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी (Karnam Malleshwari) ने।

जब भी कोई खिलाड़ी ओलंपिक गेम्स में पदक हासिल करता है तो नाम, शोहरत उसे मिल जाती है लेकिन कर्णम मल्लेश्वरी की इन चीज़ों में कोई दिलचस्पी नहीं है। सिडनी 2000 में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने के बाद ही कर्णम मल्लेश्वरी अपना जीवन बहुत सरल तरीके से जीतीं रहीं।

भारत की कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी गेम्स 2000 में ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया था।
भारत की कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी गेम्स 2000 में ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया था।भारत की कर्णम मल्लेश्वरी ने सिडनी गेम्स 2000 में ब्रॉन्ज़ मेडल हासिल किया था।

बदलती तस्वीर

भारतीय वेटलिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी ने उस समय यह कारनामा किया था जब देश में लड़कियों में खेल कूद इतना महत्व नहीं रखता था लेकिन उसे जीत के बाद मानों देश में एक बदलाव आया और युवा लड़कियाँ स्पोर्ट्स के ज़रिए अपने पैरों पर खड़ी होने की कोशिश करने लगीं।

आंध्रा प्रदेश की एथलीट ने आगे कहा “आज के समय के विपरीत, उस समय मुझे बहुत ज़्यादा पैसे नहीं मिले थे लेकिन मेडल जीतने के बाद फेम और नाम बहुत हो गया था।”

“मुझे अच्छा लगता है जब मेरे मेडल का जश्न बहुत से भारतीय मनाते हैं। मुझे अहसास होता है कि मैंने देश के लिए कुछ अच्छा किया है।”

जहां ओलंपिक गेम्स में मेडल जीतना एक बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जाती है वहीं वर्ल्ड चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन करने के भी अलग मायने हैं।

भारतीय महिला वेटलिफ्टर कर्णम मल्लेश्वरी ने 1994 और 1995 वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। इतना ही नहीं 1993 और 1996 में उनके हाथ ब्रॉन्ज़ मेडल आया था। वहीं दूसरी ओर एशियन गेम्स में भी कर्णम का दबदबा बना रहा और उन्होंने 1994 और 1996 सिल्वर मेडल पर अपने नाम की मुहर लगा दी थी।

इंटरनेशनल स्तर पर अपना लोहा मनवाने के बाद कर्णम मल्लेश्वरी से ओलंपिक गेम्स में भी उम्मीदें बढ़ गईं थीं। हालांकि उन्हें कुछ समय के लिए खेल से दूर रहना पड़ा था लेकिन यह ब्रेकर उनके सपनों को रोक न सका और उन्होंने कभी न मिटने वाला नाम हासिल कर लिया।

कर्णम मल्लेश्वरी ने अलफ़ाज़ साझा करते हुए कहा “मैं उम्मीद करती हूं कि मैं अपनी अकादमी में लिफ्टरों को ट्रेनिंग दूं और वह 2024 और 2028 गेम्स में मेडल जीत सकें।”

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