ओलंपिक पदक विजेता बनना है सानिया मिर्ज़ा का सबसे बड़ा लक्ष्य

भारतीय टेनिस सुपरस्टार ने ये भी माना कि महिला युगल में विश्व नंबर एक बनना उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक थी।

रियो 2016 ओलंपिक के सेमीफाइनल से बाहर होना सानिया मिर्जा (Sania Mirza) के करियर की सबसे बड़ी निराशा है।

उस समय रियो डी जनेरियो में अपने तीसरे ओलंपिक में खेलते हुए, सानिया मिर्ज़ा मिश्रित युगल में रोहन बोपन्ना के साथ पदक जीतने के करीब आ गई थीं।

हालांकि, सेमीफाइनल और फिर कांस्य पदक मैच में लगातार हार का मतलब था कि सानिया मिर्जा और साथी रोहन बोपन्ना ओलंपिक से खाली हाथ लौटेंगे।

"लगातार दो दिन - ओलंपिक के सेमीफाइनल मैच में हारना और फिर कांस्य पदक के मुकाबले में हराना मेरी सबसे बड़ी निराशा है।” सानिया मिर्ज़ा ने रविवार को एक इंस्टाग्राम शो ‘चैट विद राजा’ में भारतीय टेनिस खिलाड़ी पूरव राजा  (Purav Raja) के साथ एक लाईव चैट में ये बात कही।

भारतीय जोड़ी कांस्य पदक के लिए चेक गणराज्य के राडेक स्टेपानेक (Radek Stepnek) और लूसी ह्राडसेका (Lucie Hradecka) के खिलाफ आमने सामने थी, जिसने क्वार्टर फाइनल में एंडी मरे (Andy Murray) और हीथर वाटसन (Heather Watson) की ब्रिटिश जोड़ी को हराया था। कांस्य पदक के प्लेऑफ़ में भारतीय जोड़ी को 1-6, 6-7 से हार का सामना करना पड़ा।

सानिया मिर्जा ने इस साल होबार्ट इंटरनेशनल में टेनिस में जीत के साथ की वापसी  
सानिया मिर्जा ने इस साल होबार्ट इंटरनेशनल में टेनिस में जीत के साथ की वापसी  सानिया मिर्जा ने इस साल होबार्ट इंटरनेशनल में टेनिस में जीत के साथ की वापसी  

सानिया मिर्ज़ा ने अपने पदार्पण के बाद से अब तक WTA सर्किट में सर्वश्रेष्ठ डबल्स खिलाड़ियों में से एक के रूप में खुद को स्थापित किया है और वर्तमान में उनके नाम छह ग्रैंड स्लैम खिताब हैं। हालांकि ओलंपिक पदक अभी भी जीतना बाकी है।

उन्होंने अपने लक्ष्य के बारे में बात करते हुए कहा, "केवल एक चीज जो मुझे लगता है कि मैं अभी तक हासिल कर चुकी होती या कर सकती हूं वो है ओलंपिक में पदक जीतना।"

ये हैदराबादी टेनिस स्टार सिंगल्स में शीर्ष 30 में पहुंचने की तुलना में डबल्स रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंचने को एक बड़ी उपलब्धि मानती हैं।

उन्होंने कहा कि "सिंगल्स में नंबर 27 रैंक हासिल करने की तुलना में डबल्स में नंबर एक बनना मेरे लिए ज्यादा बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि दुनिया में नंबर एक खिलाड़ी बनना बड़ी उपलब्धि है।”

महिलाओं के लिए टेनिस में भविष्य है

जहां सानिया मिर्जा ने बहुत कुछ हासिल किया है, तो दूसरी ओर भारत की कोई भी महिला टेनिस खिलाड़ी उनके करीब भी नहीं पहुंच सकी हैं।

और उन्हें लगता है कि ऐसा इसलिए हो सका क्योंकि देश में बहुत से लोगों को सही मार्गदर्शन जल्दी नहीं मिलता है।

अपने बेटे के जन्म के कारण दो साल के अंतराल के बाद होबार्ट इंटरनेशनल में टेनिस में जीत के साथ वापसी करते हुए सानिया मिर्जा से कहा, "मैं इसे एकमात्र कारण नहीं कह सकती, लेकिन मुझे लगता है कि महिलाओं के लिए मार्गदर्शन और कोचिंग बहुत देर से शुरू होती है।"

उन्होंने कहा, '' सुमित नागल (Sumit Nagal) जैसा खिलाड़ी तब से खेल रहा है जब वो 13-14 साल का था और मैंने ऐसा करने वाली किसी लड़की को नहीं देखा।’’ सानिया ने कहा कि, ‘’इस तरह की कोचिंग और एक्सपोजर की कमी है और जब ऐसा होता है तो मुझे लगता है कि ये देरी ही है।’’

क़रीब क़रीब पूरी दुनिया में इस समय कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण लॉकडाउन लागू है, लेकिन टेनिस कोर्ट से दूर रहने के बावजूद, सानिया मिर्ज़ा लोगों की मदद करने के लिए थोड़ा-बहुत काम करके व्यस्त रहती हैं।

फेड कप हार्ट अवार्ड के लिए नामांकित होने वाली सानिया ने सभी से दैनिक श्रमिकों के लिए धन जुटाने के अलावा ज़रूरतमंदों की मदद करने का आग्रह किया है।

उन्होंने रविवार को फेसबुक के जरिए शुरू किए गए आई फॉर इंडिया (I For India) के फंडामाइज़र कॉन्सर्ट में थोड़ी देर के लिए मौजूदगी दर्ज की, जिसने कोरोना वायरस राहत प्रयासों के लिए अपनी आय का 100 प्रतिशत देने का वादा किया है।

सानिया मिर्ज़ा के अलावा, इसमें अन्य अभिनेताओं, संगीतकारों, गायकों, और व्यापार जगत की बड़ी हस्तियां और प्रमुख खिलाड़ी शामिल थे।

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