2020 ओलंपिक गेम्स से पहले और मज़बूत होना चाहते हैं पहलवान बजरंग पूनिया

नई दिल्ली में हुई एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में बजरंग पूनिया को जापान के ताकोतो ओटोगुरो के सामने शिकस्त का सामना करना पड़ा था।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

भारत की मिट्टी ने बहुत से वीर जन्में हैं और उनमें एक नाम बजरंग पूनिया (Bajrang Punia) का भी है। बजरंग पूनिया ने अपनी कुश्ती का कौशल दिखाते हुए पिछले साल 2020 ओलंपिक गेम्स (2020 Olympic Games) में अपनी जगह पक्की की थी। गौरतलब है कि नूर सुल्तान में हुई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में नार्थ कोरिया के जोंग सन (Jong Son) को हराकर सेमीफाइनल में इस पहलवान ने जगह बनाई थी, जिसके बाद उन्हें टोक्यो 2020 का टिकट भी मिला।

यूडब्लूडब्लू रैंकिंग (UWW Ranking) की बात करें तो पूनिया 65 किग्रा भारवर्ग में इस समय दूसरे नंबर पर काबिज़ हैं। ख़बर यह आ रही है कि टोक्यो 2020 में उम्दा प्रदर्शन करने की उम्मीद को आगे बढ़ाते हुए यह देसी पहलवान अपने कौशल को और ज़्यादा मज़बूत और खरा बनाने की फ़िराक में लग चुका है। साथ ही कोच शेको बेनतिनिडिस (Shako Bentinidis) ने ऐसी तीन प्रतियोगितायों के बारे में बताया जिनमें भारत अच्छा स्थान हासिल कर सकता है।

रेसलिंग टीवी को दिए इंटरव्यू में बेनतिनिडिस ने कहा कि “हम बस टोक्यो 2020 से पहले रैंकिंग को बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं। हमारे पास डैन कोलोव - निकोला पेट्रोव (Dan Kolov – Nikola Petrov (Bulgaria)), कनाडा कप (Canada Cup) और पोलैंड रैंकिंग सीरीज़ (Poland Ranking Series) जैसी प्रतियोगिताएं हैं, जिनमें हम अपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। हालांकि हम अपनी भागीदारी स्थिति की मांग के हिसाब से तय करेंगे।”

बजरंग पूनिया को अक्सर एक असामान्य स्थिति में पाया गया जबकि ताकूतो ओटोगुरो ने अपने प्रतिद्वंदी की हर चाल का जवाब दिया। फोटो: UWW

बजरंग पूनिया से काफी उम्मीदें

हरियाणा का यह पहलवान बहुत ही जल्द दर्शकों को भाने लगा और जल्दी ही सबका चहेता बन गया। साल 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स (2018 Commonwealth Games), 2018 एशियन गेम्स (2018 Asian Games) और 2019 एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप (2019 Asian Wrestling Championships) में गोल्ड मेडल हासिल करने के बाद एशियन चैंपियन 2020 में यह खिलाड़ी एक बड़ी उम्मीद के साथ उतरा था।

इस 26 वर्षीय पहलवान ने अपने अंदाज़ और हुनर के साथ ठीक वैसा ही खेल दिखाया जिसकी उम्मीद हर कोई कर रहा था, लेकिन फाइनल में उन्हें जापान के ताकोतो ओटोगुरो (Takuto Otoguro) के हाथों मिली मार ने सबको अचंभित कर दिया।

लेकिन कहते हैं न कि एक खिलाड़ी की पहचान तब होती है जब वे गिर कर खड़ा हो और कोच और उनके शिष्य पूनिया हर वह कोशिश कर रहे हैं जो कि ओलंपिक गेम्स में भारत को विजयी करने में मददगार साबित हो सके।

बेनतिनिडिस ने आगे कहा “मैं उनके प्रदर्शन से संतुष्ट हूं, वे मुझे पहले से बेहतर लग रहे हैं। वे उन तकनीकों को मुकाबले के दौरान प्रयोग में लाए जिन्हें वे ट्रेनिंग के दौरान प्रयास करते थे। बजरंग बहुत ही मज़बूत और काबिल हैं, उनके आलोचकों को यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि कोई भी पहलवान हर समय टॉप पर नहीं हो सकता।''

65 किग्रा सबसे कठिन कैटेगरी

टोक्यो 2020 की बात करें तो कुश्ती के खेल में 65 किग्रा भारवर्ग को सबसे मुश्किल भारवर्गों में से एक माना जा रहा है। इस कैटेगरी में रूस के गाडज़िमुराद रशीदोव (Rashidov Gadzhimurad) को एक मज़बूत दावेदार कहा जा रहा है। आपको बता दें कि रशीदोव ने अपने कौशल का प्रमाण देते हुए वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप और रेसलिंग वर्ल्ड कप को अपने नाम किया था। वहीं कज़ाख़िस्तान के डौलेट नियाज़बकोव (Daulet Niyazbekov) से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।

ज़ाहिर सी बात है कोच और उनके शिष्य बजरंग पूनिया अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर जापान की ज़मीन पर भारतीय तिरंगा खूब शान से लहराना चाहेंगे। कोच ने आगे बताया “65 किग्रा इस समय की सबसे कठिन कैटेगरी है। इस वर्ग में रशीदोव, डौलेट नियाज़बकोव, ताकोतो ओटोगुरो, अल हाजी मोहम्मद (Al Haji Mohamad) जैसे उत्तम खेल दिखाने वाले पहलवान मौजूद हैं। अब इलियास बेकुलबातोव (Ilias Bekbulatov) भी 65 किग्रा से जुड़ गए हैं। फिलहाल किसी को भी मुख्य नहीं बताया जा सकता, कोई भी इस वर्ग में बाज़ी मार सकता है।