बजरंग पुनिया जापान के ताकूतो ओटोगुरो के ख़िलाफ़ कर रहे अपनी तैयारी

जहां बजरंग पुनिया के शरीर की ऊपरी ताकत उन्हें दूसरे पहलवानों पर जीत हासिल करने में मदद करती है, वहीं जापान के ताकूतो ओटोगुरो उनके लिए एक चुनौती के रूप में सामने आ खड़े होते हैं।

शीर्ष भारतीय पहलवान और मौजूदा वर्ल्ड नंबर-2 पहलवान बजरंग पुनिया (Bajrang Punia) अपने करियर में दो और स्वर्ण पदक जीत सकते थे - एक वर्ल्ड चैंपियनशिप में तो दूसरा एशियन चैंपियनशिप में। लेकिन यह जापान के ताकूतो ओटोगुरो (Takuto Otoguro) ही थे जो दोनों ही बार उनके लिए चुनौती बनकर सामने आए।

जापानी वर्ल्ड चैंपियन ने अब तक दो बार बजरंग पुनिया का सामना किया है और दोनों ही बार वह उनपर भारी पड़े हैं। हरियाणा के इस पहलवान को हर बार डिफेंस के लिए संघर्ष करते हुए देखा गया है। उनका मानना है कि उनका प्रतिद्वंदी हर तरह से बेहतर प्रदर्शन कर जाता था।

बजरंग पुनिया ने यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) के साथ एक इंस्टाग्राम लाइव सत्र के दौरान कहा, "न केवल वह [लेग डिफेंस] मेरी कमजोरी थी, बल्कि यह उनकी ताकत भी थी।"

"मैं यह नहीं कह सकता कि मेरा शरीर उस दिन [2020 एशियन चैंपियनशिप फाइनल] मेरा साथ नहीं दे रहा था, क्योंकि मैंने उससे पहले तीन अच्छे मुकाबले लड़े थे। ओटोगुरो एक बहुत अच्छा पहलवान है। उन्होंने मुझसे बेहतर कुश्ती लड़ी, इसीलिए वह जीते।”

ओटोगुरो के हमलों का कोई जवाब नहीं

दो बार के एशियन चैंपियन और कॉमनवेल्थ गेम्स व एशियन गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता बजरंग पूनिया ने अपने अधिकांश प्रतिद्वंदियों के खिलाफ शरीर की ऊपरी ताकत का इस्तेमाल किया है, लेकिन उनका कमज़ोर डिफेंस हमेशा उनके लिए घातक साबित हुआ है।

यही वजह रही कि उन्होंने ताकूतो ओटोगुरो के खिलाफ खुद को मुश्किल में पाया। 2018 वर्ल्ड गोल्ड-मेडल बाउट में जापान के इस पहलवान पर शुरुआती अंक हासिल करने के बाद इसने बजरंग पूनिया को पदक दिलाने में मदद की। 26 वर्षीय यह पहलवान अगली बार फरवरी में दिल्ली में हुई एशियन चैंपियनशिप में घरेलू भीड़ के सामने पूरी तरह से तैयार था।

लेकिन ओटोगुरो का बेहद प्रभावी और एक सही अटैक भारत के इस ओलंपिक पदक की उम्मीद के लिए घातक साबित हुआ।

बजरंग पूनिया ने याद करते हुए कहा, "पिछली विश्व चैंपियनशिप बाउट [2018] में मैंने शुरुआत में बहुत सारे अंक दे दिए थे। इसलिए इस मुक़ाबले में कोच ने फैसला किया कि मुझे कैसे खेलना है। मेरा मुकाबला पहले तीन मिनटों तक अच्छा रहा और स्कोर 3-2 था।

"उसके बाद मैं लेग-अटैक का बचाव नहीं कर सका। उन्होंने अच्छा अटैक किया और कई अंक हासिल कर लिए।”

टोक्यो ओलंपिक तक नहीं छोड़ना चाहते कोई कमज़ोरी

अखाड़ों से कुश्ती लड़ना शुरू करने के बाद बजरंग पुनिया को अपने मड-रेसलिंग स्टांस को छोड़ने में काफी कड़ी मेहनत करनी पड़ी।

लेकिन जहां उनकी ताकत और बदलाव ने कई बेहतरीन पहलवानों के खिलाफ उन्हें हावी रखा, तो वहीं यह जापानी पहलवान बजरंग पूनिया की पहुंच से दूर नज़र आया।

दिल्ली में रेसलिंग मैट पर इस भारतीय पहलवान के खिलाफ स्वर्ण पदक जीतने वाले ताकूतो ओटोगुरो ने UWW से बात करते हुए कहा था, “जब मैंने लो-सिंगल अटैक किया तो उनका [बजरंग पुनिया का] पैर पसीने से तर था, इसलिए उनके जूते को पकड़ लिया ताकि पकड़ न छूटे।”

जापानी धरती पर महाद्वीपीय खिताब जीतने के बाद अब अगले साल टोक्यो ओलंपिक में उनकी घरेलू सरज़मी पर उससे बेहतर कर पाना इस भारतीय पहलवान के लिए एक मुश्किल काम होगा।

इसीलिए बजरंग पुनिया ने लॉकडाउन के बीच अपने घर पर ही मैट बिछाकर एक साथी के साथ प्रैक्टिस करना तय किया। सही मायने में उन्होंने ओलंपिक खेलों के स्थगित किए जाने के समय का उपयोग खुद को बेहतर करने में किया है।

उन्होंने कहा, “मैं अपने प्रशिक्षण के दौरान लेग डिफेंस में सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं। मैं इतनी ट्रेनिंग करना चाहता हूं कि ओलंपिक के समय तक मुझमें कोई कमजोरी न रहे।”

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