व्यक्तिगत विश्व कप को ओलंपिक की तैयारी के रूप में देख रहें दीपक पुनिया

महामारी के कारण इंटरनेशनल इवेंट की संख्या में कमी होने के साथ, भारतीय पहलवान बेलग्रेड में सबसे अधिक अवसर बनाने के लिए उत्सुक है।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

जब भारतीय पहलवान दीपक पुनिया (Deepak Punia) व्यक्तिगत विश्व कप (Individual World Cup) में 86 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा में मैट पर उतरेंगे, तो उनके पास 10 महीनों की कड़ी मेहनत होगी, जो उन्हें अच्छे करने के लिए प्रेरित करेगा।

कोवि़ड-19 के कारण भले ही कई लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा हो लेकिन दीपक ने दिल्ली हरियाणा बॉर्डर स्थित अपने अखाड़े में अपने निजी कोच के साथ ट्रेनिंग करते हुए लॉकडाउन में समय बिताया। इसी मेहनत का असर है कि ये खिलाड़ी अब बेलग्रेड में खेलता दिखाई देगा।

2019 वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप के सिल्वर मेडलिस्ट दीपक पुनिया ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि “मैंने लॉकडाउन में भी अपनी ट्रेनिंग को मिस नहीं किया और सामान्य समय की तरह मैं ट्रेनिंग करता रहा”।

भारतीय पहलवान ने बताया कि “मैंने कुछ क्षेत्रों में बहुत काम किया है। मैं दोस्तों के साथ बाहर नहीं गया था। मैं अपने प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित कर रहा था। मैं सुशील भाई साहब (Sushil Kumar) (दो बार के ओलंपिक पदक विजेता पहलवान सुशील कुमार) के भी संपर्क में था। उन्होंने मुझे विश्व कप से पहले प्रेरणा और सुझाव दिए हैं।”

 टोक्यो ओलंपिक से पहले व्यक्तिगत ओलंपिक ही एक बड़ा इवेंट है और दीपक को पता है यहां अच्छा प्रदर्श करना उनके लिए कितना फायदेमंद होगा।

दीपक पुनिया ने कहा कि “मैं बड़ी प्रतियोगिता का बेसब्री से इंतजार कर रहा था ताकि हम भाग ले सकें और ओलंपिक के लिए अपनी तैयारी जारी रख सकें। एक पहलवान बिना रेसलिंग मैट के नहीं रह सकता लेकिन अब, समय आ गया है। मैं विश्व कप में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहता हूं। हां, ओलंपिक पर ध्यान केंद्रित है, लेकिन फिलहाल पूरा फोकस इसी पर करना चाहता हूं।”

events

12 - 18 Dec 2020

UWW वर्ल्ड कप - बेलग्रेड

सर्बिया

दीपक पुनिया ने व्यक्तिगत विश्व कप में पदक जीतने पर उनकी निगाहें टिकाई हुई है लेकिन इसके साथ ही वह टूर्नामेंट में अपने खेल का विश्लेषण करना चाहेंगे और अपनी नई चालों को भी मैट पर आजमाना चाहेंगे।

स्टार रेसलर ने बताया कि “मैं कुछ एरिया में सुधार करना चाहता हूं। उसके लिए, मुझे यथासंभव अधिक से अधिक टूर्नामेंटों में भाग लेने की आवश्यकता है। प्रशिक्षण और अभ्यास महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वास्तविक सीखने का अनुभव प्रतियोगिताओं से आता है। विश्वकप बड़ा इवेंट है और इसमें मैं अपना 100 प्रतिशत दूंगा। मैं एक बार में एक बाउट के बारे में सोचूंगा, निश्चित तौर पर मेरे दिमाग में मेडल होगा लेकिन मेरा असली लक्ष्य ओलंपिक ही है।”