जानिए साक्षी मलिक ने हार के मुंह से कैसे छीना था ओलंपिक कांस्य पदक ख़ुद उन्हीं की ज़ुबानी

भारतीय पहलवान साक्षी मलिक ने रियो गेम्स में कई बार महत्वपूर्ण मौको पर वापसी करते हुए ब्रॉन्ज़ मेडल अपने नाम किया।

रियो ओलंपिक का मंच सज चुका था। भारतीय महिला पहलवान साक्षी मलिक ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने से 5 अंक पीछे चल रही थी। दर्शक जोश में तो थे लेकिन उम्मीदें ढ़लती जा रही थी लेकिन इस भारतीय रेसलर ने हार नहीं मानी।

साक्षी मलिक ने समय का सही सदुपयोग किया और मुकाबले के अंत में 8-5 से विजयी हो गई। यह मुकाबला उन्होंने इज़ुल दायनीव्यकवा (Aisuluu Tynybekova) को हराकर अपने नाम किया।

सोनी स्पोर्ट्स के फेसबुक पेज के ‘द मेडल ऑफ़ ग्लोरी’ में साक्षी ने कहा “हां, मैं 0-5 से पीछे थी लेकिन मुझे आभास था कि अभी मेरे पास काफी समय है और मैं वापसी कर सकती हूं। अगर मैं उस मौके को जाने देती तो मुझे 4 साल का इंतज़ार करना पड़ता।”

उन्होंने आगे कहा “मैं बस खुद को यही कह रही थी कि मुझे अपना 100 प्रतिशत देना है और इसे करने के लिए मेरे पास काफी समय है। मुकाबला आगे बढता रहा और मैं अंक बटोरती गई। जैसे ही मैंने दो अंक प्राप्त किए तब मेरा आत्मविश्वास बढ गया। मुझे लगा कि मैं यह कर सकती हूं।”

वूमेंस 58 किग्रा फ्रीस्टाइल भारवर्ग में खेलते हुए साक्षी ने भारत को ओलंपिक में पहला महिला पहलवानी में मेडल जितवाया और वे लाखों युवाओं की प्रेरणा बन गईं।

इस कारनामे से उन्होंने उन भारतीय महिलाओं की लिस्ट में अपना नाम शुमार कर लिया है जिन्होंने ओलंपिक गेम्स में भारत के लिए मेडल जीता है। इस लिस्ट में कर्णम मल्लेश्वरी (Karnam Malleswari), मैरी कॉम (Mary Kom), साइना नेहवाल (Saina Nehwa)l और पीवी सिंधु और (PV Sindhu) का नाम शामिल है।

मुकाबलों में वापसी करना कोई इनसे सीखे

रियो ओलंपिक में साक्षी मलिक की कहानी देखें तो इसमें उनकी जीत कई बार वापसी करने के बाद हुई। क्वालिफिकेशन राउंड में स्वीडिश पहलवान योहाना मैटसन (Johanna Mattsson) के खिलाफ साक्षी मलिक 0-4 से पीछे चल रही थी। इसके बाद भारतीय पहलवान ने अपना माद्दा दिखाया और मुकाबले को 5-4 से अपने नाम किया।

इसके बाद राउंड ऑफ़ 16 में मारियाना चेरदिवारा (Mariana Cherdivara) के खिलाफ भी कुछ ऐसा ही देखा गया। मुकाबले की शुरुआत में 0-3 से पीछे चलने के बाद साक्षी ने वापसी की और अपने दांव से जीत हासिल कर क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया।

कारवां आगे बढ़ता गया लेकिन इस बार साक्षी को रूस की वालेरिया कोब्लोवा (Valeria Koblova) के सामने हार का सामना करना पड़ा। हालांकि इसके बाद भी इस भारतीय महिला पहलवान ने हार नहीं मानी और पुअर्वदोरजीन ऑर्खोन (Pürevdorjiin Orkhon) के खिलाफ ब्रॉन्ज़ मेडल मैच में अपना 100 प्रतिशत दिया।

साक्षी मलिक के लिए सीज़न 2020 की शुरुआत रही हलकी 
साक्षी मलिक के लिए सीज़न 2020 की शुरुआत रही हलकी साक्षी मलिक के लिए सीज़न 2020 की शुरुआत रही हलकी 

प्रेरणा बनने के पथ पर

दर्शकों के सामने जीतने के बाद अपने देश के झंडे के साथ खड़े होने में किसी भी खिलाड़ी को गर्व होता है। ऐसे में वह खिलाड़ी लाखों लोगो की प्रेरणा बन जाता ह।

साक्षी मलिक ने आगे कहा “यह सिर्फ युवा पीढ़ी को प्रोत्साहन देना नहीं है बल्कि जो रेसलर मेरे साथ ट्रेनिंग करते हैं उन्हें भी प्रेरणा मिलती है कि अगर साक्षी दीदी जीत सकती हैं तो हम भी मेडल जीत सकते हैं। बल्कि आज मैं जहां हूं, वहां पहुंच पाऊंगी इसके बारे में कभी सोचा भी नहीं था।''

2018 कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतने के बाद भी साक्षी ने सीज़न 2020 की शुरुआत उम्मीद से परे थोड़ी कमज़ोर की है। वहीं दूसरी तरफ युवा सोनम मलिक ने 62 किग्रा भारवर्ग में अच्छा नाम बना लिया है। ऐसे में साक्षी की दावेदारी और भी कठिन हो गई है।

कोरोना वायरस (COVID-19) की वजह से टोक्यो 2020 एक साल के लिए स्थगित हो जाने के कारण साक्षी को एक नया मौका मिला है और वह इसका पूरा फायदा भी उठाना चाहेंगी।

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