रियो की भव्यता तक का सफर: साक्षी मलिक ने साझा किए अपने रेसलिंग अनुभव

भारतीय रेसलर सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त द्वारा जीते गए ओलंपिक मेडल ने भी साक्षी मलिक को प्रेरित करने का काम किया।

साक्षी मलिक (Sakshi Malik) ने जब 12 साल की उम्र में पहली बार कोच ईश्वर दहिया (Ishwar Dahiya) के सानिध्य में कुश्ती की शुरुआत की थी, तब उनकी एकमात्र प्रेरणा दादा सुबीर मलिक ही थे। वह भी अपने जमाने के मशहूर पहलवान हुआ करते थे।

रियो 2016 की कांस्य पदक विजेता ने स्वीकार किया कि जब तक उन्होंने जूनियर लेवल पर पदक जीतना नहीं शुरू किया तब तक उन्हें ओलंपिक या किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं थी। जब उन्होंने 2009 एशियन जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में रजत, 2010 विश्व जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य और अन्य पदक जीते तो उन्हें धीरे-धीरे इन टूर्नामेंट की भव्यता का एहसास हुआ।

साक्षी मलिक ने रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के सहयोग से स्पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के एथलीटों और कोच एजुकेशन प्रोग्राम के तहत आयोजित किए गए एक ई-पाठशाला के सत्र के दौरान कहा, “मैंने यह खेल बचपन से ही खेलना शुरू कर दिया था, लेकिन ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों के बारे में मुझे बहुत कम जानकारी थी।"

साक्षी ने आगे कहा, "इसके बारे में मुझे कुश्ती में आने के बाद और जूनियर स्तर पर पदक जीतने के बाद सही से पता चला।"

साक्षी ने यह भी कहा कि वह तब प्रेरित हुई जब भारतीय पहलवानों ने बीजिंग में 2008 के खेलों के बाद से लगातार ओलंपिक पदक जीतने शुरू कर दिए।

हरियाणा की इस पहलवान ने कहा, "उस वक्त तक सुशील कुमार (Sushil Kumar) और योगेश्वर दत्त (Yogeshwar Dutt) ने ओलंपिक में पदक जीतना शुरू कर दिया था, यह मेरे लिए बहुत बड़ी प्रेरणा थी।"

ज़िंदगी बदलने वाला पल

2016 में साक्षी मलिक भारत के लिए व्यक्तिगत महिला ओलंपिक पदक जीतने वाली शीर्ष खिलाड़ियों की सूची में शुमार हो गईं। उन्होंने किर्गिस्तान की आइज़ुलु त्स्यबेकोवा (Aisuluu Tynybekova) को हराकर कांस्य पदक जीता और कर्णम मल्लेश्वरी (Karnam Malleswari), मैरी कॉम (Mary Kom), साइना नेहवाल (Saina Nehwal) और पीवी सिंधु (PV Sindhu) के बाद यह कीर्तिमान रचने वाली पांचवीं महिला बन गईं।

साक्षी मलिक (IND) ने एसुलु ताइनीबेकोवा (KGZ) को 8-5 से हराया

साक्षी मलिक (IND) ने एसुलु ताइनीबेकोवा (KGZ) को 8-5 से हराया

हालांकि साक्षी मलिक के कोच कुलदीप मलिक के साथ अपना पदक हासिल करने के लिए जाने की वह तस्वीर आज भी सभी के दिमाग में बसी होगी, रियो में उनके पदक जीतने का सफर उतना भी आसान नहीं था।

साक्षी मलिक बताती हैं कि कैसे उन्होंने कांस्य पदक के शुरुआती चार मिनट में पांच अंक दे दिए और फिर वापसी करते हुए 8-5 से जीत हासिल की।

साक्षी मलिक ने कहा, "जब मैं उस कांस्य पदक मैच में पहुंची, तो मैं इस आखिरी पड़ाव में हारना नहीं चाहती थी। मेरे कोच मुझसे बार-बार कहते रहे कि तुम उससे (प्रतिद्वंद्वी) से बेहतर हैं।"

"यह एक कठिन मैच था और बिल्कुल अंत में मैं यह जीत हासिल कर सकी थी। मैं उस जीत की भावना को शब्दों में नहीं बयां कर पा रही थी, मुझे नहीं पता था कि हंसना है या मुस्कुराना है या रोना है।"

"मेरे कोच ने मुझे समझाया कि इस एक पदक के बाद मेरा जीवन बदल जाएगा, लेकिन जब मैं बूढ़ा हो जाऊंगा, यह एक अद्भुत पल है जो हमेशा मेरे साथ रहेगा।

उन्होंने अपनी बात को ख़त्म करते हुए कहा, “ओलंपिक कांस्य पदक जीतने के बाद देश ने मुझे जो प्यार दिया है, उसके लिए मैं सभी की बहुत आभारी हूं।”

क्या आपको यह आर्टिकल पसंद आया? इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें!