मानिसक तौर पर मज़बूती ने मुझे अपने भार वर्ग को बदलने में की मदद: विनेश फोगाट

ओलंपियन ने पिछले साल अपने भार वर्ग को बढ़ाने के बावजूद अपने शानदार प्रदर्शन को बरकरार रखा। उन्होंने महसूस किया कि वह इसके लिए मानसिक तौर पर तैयार थीं।

भारतीय रेसलर विनेश फोगाट (Vinesh Phogat) के लिए साल 2019 बेहद शानदार रहा। उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता और साथ ही इसी के ज़रिए टोक्यो ओलंपिक के लिए कोटा भी हासिल किया। इससे भी बड़ी बात यह है कि 25-वर्षीय रेसलर ने 2019 की शुरुआत 53 किग्रा भारवर्ग में खेलना शुरू किया और अन्य एथलीटों के जैसे उन्होंने इस बदलाव में खुद की फॉर्म को आसानी से बरकरार रखा।

भारतीय पहलवान ने स्वीकार किया कि उन्हें पहले तो खुद पर पूरा आत्मविश्वास नहीं था, लेकिन आत्म-संदेह ने जल्दी ही घर कर लिया। ओलंपिक चैनल से बात करते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि 53 किग्रा में हर प्रतियोगी कड़ी टक्कर देता है। मैंनें लंबे समय तक 50 किग्रा भार वर्ग में कुश्ती की थी।”

उन्होंने आगे कहा, "मुझे 53 किग्रा वर्ग में लड़ने का अनुभव कभी नहीं था और इसलिए शुरू में थोड़ा हिचकिचाहट हुई। लेकिन एक बार जब आप मैट पर होते हैं तो सबकुछ भूल जाते हैं और फिर महज़ यह मायने रखता है कि उन छह मिनटों में आप क्या करते हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि ऐसी परिस्थितियों में आपकी मानसिक तैयारी ही काम आती है। पहलवान जितनी कम गलतियां करता है, उसके जीतने की संभावना उतनी अधिक बढ़ जाती है।

विश्व स्तर तक पहुंचने का सफर

महिलाओं की कुश्ती में जापानी रेसलरों का वर्चस्व है, जिसमें मायू मुकाइदा (Mayu Mukaida) और रिसाको कवाई (Risako Kawai) की मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने की संभावना बहुत कठिन है।

विनेश फोगाट ने उन्हें चुनौती दी और उन्होंने फाइनल में युकी इरी को हराकर 2018 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। इस उपलब्धि को हासिल करने वाली वह पहली महिला भारतीय पहलवान बनीं।

इस जीत ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि वह जापानी पहलवानों को टक्कर दे सकती हैं। उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि खाड़ी देशों के पहलवानों में पहले से कुछ खासियत मौजूद थी, यह सिर्फ भारतीय पहलवानों के बारे में बात नहीं है, दुनिया में कोई भी उन्हें हरा नहीं सकता था।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर आप हालिया रिकॉर्ड देखें तो अन्य देशों के पहलवानों ने भी पदक जीतना शुरू कर दिया है। अब जापान के पहलवान हर बार पदक जीतेंगे, इस बात का आश्वासन नहीं दिया जा सकता है।”

यह भारतीय पहलवान टोक्यो ओलंपिक में पहली बार पदक जीतने के लिए पूरी तरह से तैयार नज़र आ रही है, क्योंकि उन्होंने मैट्टो पेलिकॉन मेमोरियल में स्वर्ण और फिर एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।

गौरतलब है कि एक चोट ने रियो 2016 में विनेश फोगाट को रेसलिंग मैट को बीच में ही छोड़ने पर मजबूर कर दिया था। अब वह अगले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक में उतरने के लिए तैयार हैं और चाहेंगी कि अपने मेडल कैबिनेट में सबसे महत्वपूर्ण पदक को जोड़ सकें।

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