बजरंग पूनिया के पास टोक्यो 2020 के लिए है एक अलग रणनीति 

भारतीय कुश्ती के दिग्गज पहलवान अपने प्रतिद्वंदियों से निपटने के तरीकों का पता लगाने के लिए अपने पिछले मुक़ाबलों के वीडियो क्लिप की समीक्षा की है।

बजरंग पूनिया (Bajrang Punia) के ओलंपिक के रास्ते में मुश्किल से ही कोई रोड़ा आने वाला है, इसमें कोई संदेह नहीं है कि वो भारत को पदक दिलाने वाले खिलाड़ियों की संभावित सूची में से एक हैं।

26-वर्षीय पहलवान पिछले कुछ वर्षों से अच्छी फॉर्म में हैं और उनपर थकान का कोई संकेत नहीं दिखा रहा है।

इस दौरान बजरंग पूनिया दूसरे पहलवानों के खिलाफ अपनी शुरूआती लड़ाई में हावी होने की कला में सबसे आगे हैं।

अपनी बेबाक सहनशक्ति के लिए कुश्ती की दुनिया में 'टैंक' के नाम से विख्यात हो चुके बजरंग पूनिया को अक्सर बड़े दर्जे के पहलवानों के खिलाफ जीत हासिल करने के लिए अपनी सबसे बड़ी ताक़त पर भरोसा करते हुए देखा जाता है।

ये भारतीय पहलवान किसी भी दंगल को जीतने से पहले अपने प्रतिद्वंदी के शरीर से पूरी शक्ति को खत्म करने की कोशिश करता है (अपने विरोधी को थका देता है) और फिर हाई स्कोरिंग मैच बनाते हुए अपनी जीत सुनिश्चित करता है।

लेकिन ये रणनीति सबसे बड़े चरणों में कुछ हद तक नुकसानदायक भी रही है।

जहां इस युग में तकनीक में शायद ही कोई कमी हो, वहीं विरोधियों को लगता है कि बजरंग पूनिया की तकनीक का तोड़ निकाला जा सकता है और ये विश्व चैंपियनशिप और हाल ही में संपन्न एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में भी देखने को मिला।

विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में पूनिया का प्रदर्शन

2018 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में जापान के ताकोतो ओटोगुरो (Takuto Otoguro) के खिलाफ 65 किग्रा फ्रीस्टाइल फाइनल में बजरंग पूनिया ने फाइनल में आधे समय तक अच्छा प्रदर्शन किया। लेकिन जापानी पहलवान ने अपना गियर बदला और दूसरे हाफ के शुरुआती समय में कुछ महत्वपूर्ण अंक हासिल किए और बाउट को भारतीय पहलवान की पहुंच से दूर कर दिया।

2019 के वर्ल्ड में भी ये ही चीज देखने को मिली। इस बार कज़ाख़्तान के दौलेत नियाज़बेकोव (Daulet Niyazbekov) के खिलाफ सेमीफाइनल में चार अंकों वाली एक ही दाव ने बजरंग पूनिया से जीत छीन लिया।

ओटोगुरो ने हाल ही में संपन्न एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में भारतीय पहलवान के खिलाफ एक बार फिर से अपना दम दिखाया और बजरंग पूनिया को काफी बड़े अंतर से हराकर स्वर्ण जीत लिया।  

ये सभी हार बजरंग पूनिया और उनकी टीम की थी। कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के साथ विदेशों में प्रशिक्षण की अपनी योजनाओं में बदलाव के साथ भारतीय ’टैंक’ आजकल विश्लेषण करने में काफी समय बिताते हुए नज़र आ रहे हैं और समय आने पर अपने प्रतिद्वंदियों से निपटने की तैयारी कर रहे हैं।

“मैं अपने प्रतिद्वंदियों के वीडियो देखकर अपने इस समय का सदउपयोग कर रहा हूं। मैं हर एक के लिए अलग रणनीति बना रहा हूं। "मुझे पता है कि ओलंपिक पर एक बादल मंडरा रहा है ... लेकिन एक एथलीट को सबसे पहले अपने इवेंट के लिए मानसिक रूप से तैयार होना होगा है।"

सोनीपत में अपने प्रशिक्षण केंद्र पर बजरंग पूनिया के पास अपने साथी और ओलंपिक पदक की उम्मीद दीपक पूनिया (Deepak Punia) और रवि दहिया (Ravi Dahiya) के साथ समय बिताने का भी समय है। एशियन और राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन का मानना ​​है कि भारत टोक्यो 2020 में कुछ पदक जीत सकता है

“मेरी राय में हमारे पहलवान बहुत अच्छे हैं, पुरुष और महिला दोनों। वो पिछले 3-4 वर्षों में विश्व स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

“हम इस बार ओलंपिक से 2-3 पदक लाएंगे। विनेश (फोगाट) (Vinesh Phogat), रवि (दहिया) और दीपक (पूनिया) शीर्ष दावेदार हैं।

भारतीय कुश्ती 2008 से ओलंपिक में पदक का एक प्राथमिक स्रोत रहा है। पिछले कुछ वर्षों से कोटा विजेताओं के प्रदर्शन ने बजरंग पूनिया के दावों को और हवा दे दी है।

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