साक्षी मलिक लॉकडाउन में भी अखाड़े में ट्रेनिंग के ज़रिए ख़ुद को रख रहीं हैं फ़िट

ओलंपिक कांस्य पदक विजेता के घर के पीछे ही स्थित है अखाड़ा।

2016 रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक (Sakshi Malik) अगले साल होने वाले टोक्यो ओलंपिक के लिए पुराने तरीकों से ट्रेनिंग कर रही हैं कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन है और इसके कारण ये भारतीय रेसलर घर पर रहने को मजबूर है। इसी वजह से साक्षी ने अपने घर के पीछे बने अखाड़े का रुख किया ताकि वह बिना परेशानी के ट्रेनिंग कर सकें।

27 साल की इस पहलवान ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत के दौरान बताया कि, ‘’अभी मैं बिल्कुल देसी पहलवानी कर रही हूं। मेरे घर के पीछे ही अखाड़ा है। मैंने कभी इसका इस्तेमाल नहीं किया और न ही इसे खोला। इन दिनों मैं इसे खोलती हूं और वहीं अभ्यास करती हूं।  इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है और इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन मैं वास्तव में इसका आनंद ले रही हूं।

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Traditional workout 💪🏻🤼‍♀️

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थकान वाला लेकिन मज़ेदार तरीक़ा

चूंकि लंबे समय से अखाड़े का उपयोग नहीं किया गया था, इसलिए साक्षी मलिक को यह सुनिश्चित करना था कि प्रशिक्षण के लिए जाने से पहले उन्हें अपने हाथ गंदे करने पड़ेंगे।

साक्षी ने बताया कि, “आपने ग्रामीण क्षेत्रों के पहलवानों को देखा होगा, वे इस तरह के मैदान में कदम रखने से पहले जगह को तैयार करते हैं। मैं भी इन दिनों वही करती हूं।”

खेत की जुताई करने के बाद उनकी दिनचर्या एक लंबी रस्सी से बंधी लकड़ी के लॉग को खींचकर शुरू होती है। इसके बाद कुछ बॉडीवेट अभ्यास के लिए जाने से पहले वह अखाड़े के चारों ओर दौड़ लगाती हैं। इसके बाद वह योग का सहारा लेती हैं।

अपनी शारीरिक फिटनेस को बनाए रखने के अलावा भारतीय पहलवान इस तरह के अनिश्चित समय में अपने मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं।

इस भारतीय पहलवान का इस सीजन का प्रदर्शन इतना खास नहीं रहा है। इस वजह से वह अब तक ओलंपिक के लिए क्वालिफाई भी नहीं कर पाई हैं।

रोहतक की रहने वाली ये पहलवान सोनम मलिक (Sonam Malik) से पीछे रही हैं, जिन्होंने अपनी सीनियर को हरा कर अपनी काबिलियत का परचम लहराया है। इसके बावजूद भारत ने अब तक 62 किलोग्राम वर्ग में अपना कोटा हासिल नहीं किया है इसलिए साक्षी मलिक के पास उम्मीद की किरण बाक़ी है, लेकिन इसके लिए उन्हें मिले मौक़ों को भुनाना होगा।

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