कोच सतपाल सिंह ने टोक्यो ओलंपिक टीम में सुशील कुमार की वापसी का दिया आश्वासन

भारतीय पहलवान सुशील कुमार अपनी ताकत और धीरज को बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं, उनके कोच ने किया खुलासा

इसमें कोई दो राय नहीं है कि भारतीय कुश्ती इतिहास में अब तक के सबसे सफल पहलवान सुशील कुमार हैं। लेकिन दिग्गज सुशील कुमार (Sushil Kumar) के लिए पिछले कुछ साल मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं।

शुरुआत में चोट के कारण भारत के दो बार ओलंपिक पदक विजेता को व्यक्तिगत स्पर्धा से दरकिनार कर दिया गया। साल 2020 के सीज़न की शुरुआत के बाद से 74 किग्रा फ्रीस्टाइल श्रेणी में कुछ शानदार प्रतिभाओं के उभरने से सुशील कुमार की भारतीय सेटअप में जगह बनाने की राह को और मुश्किल बना दिया है।

हाथ में चोट के कारण सीजन-ओपनिंग नेशनल ट्रायल को छोड़ने के बाद, 36 वर्षीय सुशील कुमार के साथ भारत की प्रतिभाओं में से एक जितेंद्र कुमार (Jitender Kumar) ने 74 किग्रा वर्ग में भारतीय टीम के लिए अपने दावे को दांव पर लगाने का सबसे अधिक प्रयास किया।

2020 के एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में रजत पदक जीता, फिर कुश्ती महासंघ (WFI) ने एशियाई ओलंपिक क्वालिफायर के लिए जितेंद्र कुमार को पहले वरीयता दी।

इसका मतलब ये था कि सुशील कुमार को ये उम्मीद करनी होगी कि जितेंद्र कुमार महाद्वीपीय कॉन्टिनेंटल क्वालिफायर इवेंट में टोक्यो ओलंपिक के लिए कोटा स्थान हासिल करने में असमर्थ रहें, जिससे उन्हें विश्व ओलंपिक क्वालिफायर से पहले भारतीय टीम में जगह बनाने का मौका मिल सके। 

लेकिन ओलंपिक कोरोना वायरस (COVID-19) के मद्देनजर ओलंपिक और क्वालिफिकेशन के इवेंट्स को 2021 तक बढ़ा दिया गया है, और WFI ने अगले साल क्वालिफिकेशन स्पर्धाओं के लिए टीम का चयन करने के लिए फ्रेस ट्रायल्स की घोषणा की है, जिसके बाद सुशील कुमार राहत की सांस ले सकते हैं।

टोक्यो ओलंपिक, सुशील कुमार के लिए आखिरी मौका

हालाँकि दिग्गज पहलवान सुशील कुमार जानते हैं कि वो अभी आराम नहीं कर सकते हैं। और उनके कोच सतपाल सिंह को भरोसा है कि सीजन वापस पटरी पर आने के बाद उनकी वापसी हो जाएगी।

सतपाल सिंह (Satpal Singh) ने न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, "एथलीटों के जीवन में एक साल बहुत लंबा होता है, इसलिए टोक्यो खेलों पर एक साल की देरी से थोड़ा बहुत फर्क पड़ेगा।"

“लेकिन सुशील बहुत अनुशासित है। अब भी वो अपनी ताकत और धीरज बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और जल्द से जल्द ट्रेनिंग फिर से शुरू करेंगे।

"वो जानते हैं कि टोक्यो उनका आखिरी मौका है, और भारत के लिए स्वर्ण जीतने की उसकी दिली इच्छा है। हमें ये देखना है कि क्वालिफिकेशन कैसे होता है।”

हालांकि COVID-19 महामारी के प्रकोप और अंतरराष्ट्रीय खेल कैलेंडर पर इसके असर ने एथलीटों के को सालभर के लिए की बनने वाली योजनाओं को मुश्किल बना दिया है, सतपाल सिंह ने खुलासा किया कि सुशील कुमार सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद ट्रेनिंग के लिए बेकरार हैं।

"दुनिया भर में लॉकडाउन के कारण, अभी कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है। जैसे ही चीजें खुलने लगेंगी, वो ट्रेनिंग के लिए रूस चले जाएंगे।

कोच सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त दोनों को ओलंपिक के लिए ट्रेनिंग देने वाले कोच ने कहा कि उन्हें लगता है कि वो अब भी उसी शक्ति के साथ लड़ सकते हैं और भारत के लिए पदक जीत सकते हैं।

लॉकडाउन के खत्म होने के बाद शूरू होगा नेशनल कैंप

इस बीच, डब्ल्यूएफआई भी भारत में लॉकडाउन के खत्म होते ही एक्शन में वापस आने के लिए उत्सुक है।

कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए पूरा देश 25 मार्च से लॉकडाउन है। जिसके कारण ज्यादातर एथलीट ट्रेनिंग कैंप छोड़कर घर पर रहने के लिए मजबूर हैं।

राष्ट्रीय कोचों के साथ बैठक के बाद डब्ल्यूएफआई ने फैसला किया है कि भार वर्ग में पहलवानों के लिए राष्ट्रीय शिविर लॉकडाउन के बाद जल्द से जल्द शरु होगा, जिसमें भारत के लिए ओलंपिक कोटा हासिल करना है,

हालांकि, महासंघ किसी तारीख की घोषणा करने के लिए असमंजस में था, क्योंकि देश में कोरोना की स्थिति को देखते हुए लॉकडाउन को बढ़ाया भी जा सकता है, यदि कोरोना वायरस को रोकने में जो कदम उठाए जा रहे हैं वो कारगर साबित नहीं हुए तो ये फैसला लिया जा सकता है।

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