भारत में ट्रैक बनाने में मदद करेगा अंतर्राष्ट्रीय ल्यूज फेडरेशन- शिवा केशवन

शीतकालीन ओलंपियन केशवन को देश में सुविधाओं के लिए बुनियादी ढांचे के बेहतर बनने की उम्मीद

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

भारत के सबसे महान शीतकालीन ओलंपियन शिवा केशवन, उन्हें जो मिला वो ल्यूज खेल को वापस देने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।

केशवन ने लगातार छह शीतकालीन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1998 और 2002 गेम्स के दौरान भारत प्रतिनिधित्व करने वाले अकेले थे। 16 साल की उम्र में 1998 के ल्यूज के शोपीस इवेंट, नागानो गेम्स के लिए क्वालीफाई करने वाले केशवन सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे।

बर्फ के ट्रैक पर दौड़ते हुए जीवन बिताने के बाद केशवन ने प्योंगचांग में आयोजित 2018 शीतकालीन ओलंपिक के बाद संन्यास ले लिया। अगस्त, 2020 में ल्यूज फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उन्हें मुख्य कोच और उच्च प्रदर्शन निदेशक नियुक्त किया।

नई जिम्मेदारी के मिलने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता देश में शीतकालीन खेल सुविधाओं का विकास करना है।

केशवन ने ओलंपिक चैनल को बताया, "हमने इस विचार के बारे में विभिन्न स्तर के खेल संगठनों से बात की है भारतीय खेल प्राधिकरण की देशभर में विभिन्न खेलों के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने की योजना है और शीतकालीन खेल भी इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं। इसलिए ज्यादा से ज्यादा ध्यान शीतकालीन खेलों के लिए एक केंद्र के विकास की ओर जा रहा है।"

केशवन भारत में एक ट्रैक बनाने के लिए डिजाइन और तकनीकी सहायता के लिए अंतरराष्ट्रीय ल्यूज फेडरेशन के साथ भी बातचीत कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "मैं खेल स्थल के विकास को लेकर चर्चा कर रहा हूं। इसको लेकर अंतरराष्ट्रीय ल्यूज फेडरेशन से वार्ता चल रही है, जो भारत में ट्रैक बनाने के लिए इसके डिजाइन और तकनीकी जानकारी के साथ बनाने के तरीके के बारे में सहयोग करेगा।"।

प्योंगचांग 2018 में शिवा केशवन

"हमारे पास खेल स्थान पर सभी प्राकृतिक स्थितियां हैं। हमें बस ट्रैक पर बर्फ व हिमपात को व्यवस्थित करना और बनाए रखना है। यह केवल शुरूआत के लिए जरूरी है। अभी सब कुछ वैचारिक है। इसे मंजूरी दी जा रही है। एक बार जब यह सब हो जाएगा तो बुनियादी ढांचे को स्थापित करने में कम समय लगेगा।"

केशवन का गृहनगर मनाली देश में शीतकालीन खेलों के लिए आधार बन सकता है। क्योंकि शहर में उपलब्ध प्राकृतिक सुविधाओं का उपयोग करते हुए इसे एक बहु-खेल सुविधा के रूप में विकसित करना उनका बहुत पहले देखा गया सपना है। 

चार बार के एशियाई चैंपियन ने कहा, "मेरा जन्म भारत में विंटर स्पोर्ट्स हब माने जाने वाले मनाली में हुआ था, लेकिन 25 साल से यहां इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है। जिन्हें विकसित करने का सपना बचपन में मैंने और विंटर स्पोर्ट्स एथलीट ने देखा था। क्योंकि हमारे पास अच्छी बर्फ की सुविधाएं मौजूद हैं।” 

केशवन ने कहा कि इस क्षेत्र में शीतकालीन खेलों में रुचि रखने वाले लोगों की बड़ी संख्या है, लेकिन सांस्कृतिक पिछड़ेपन और समझ की कमी के कारण पिछले 25 वर्षों से खेल के बुनियादी ढांचे का विकास नहीं हुआ है। 

उन्होंने बताया, "हमारे पास शीतकालीन खेलों में रुचि रखने वाले लोग हैं, लेकिन शीतकालीन खेलों के लिए सुविधाओं को विकसित करने वाला कोई भी नहीं था। क्योंकि ना तो कोई संस्कृति थी न ही समझ, जो इसके लिए जरूरी है। तो अब बहुत पहले देखे गये सपने को पूरा करने के लिए इस जगह को एक शीतकालीन स्पोर्ट्स हब में बदलने का वक्त आ गया है। अब मेरे पास इस हिस्से को आगे बढ़ाने का मौका है।”