मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बेंगलुरु एफसी ने उठाए कुछ अहम कदम

इंडियन सुपर लीग की टीम बेंगलुरु एफसी ने खिलाड़ियों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हुए प्रोग्राम का आयोजन किया है।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

इंडियन सुपर लीग (Indian Super League – ISL) की टीम बेंगलुरु एफसी (Bengaluru FC) के इतिहास की बात की जाए तो कोई भी आसानी से कह सकता है कि इस टीम और जीत के बीच का फ़ासला ज़्यादा नहीं है लें सीज़न 2020-21 में यह कहानी थोड़ी अलग रही है।

14 मुकाबलों के बाद गार्डन सिटी टीम अंक तालिका में 8वें स्थान पर बैठी है। ऐसे में इस टीम ने अपने हेड कोच से भी किनारा कर लिया था और पिछले 8 मुकाबलों में यह टीम 3 अंक हासिल करने में भी असफल रही है।

5 महीने बायो बबल में रहने से खिलाड़ियों की फॉर्म पर तो सवाल आ खड़ा हुआ था और साथ ही गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू (Gurpreet Singh Sandhu) का भी यह मानना है कि खिलाड़ियों के लिए तनाव और मानसिक थकावट भी काफी मुश्किलें पैदा कर रहा है।

बेंगलुरु एफसी को ऐसा क्लब माना जाता है जो समय से आगे सोचने की क्षमता रखता है और इस बार भी उन्होंने कुछ ऐसा किया है। बेंगलुरु एफसी ने अपने खिलाड़ियों के लिए एक प्रोग्राम का आयोजन किया है जिसकी मदद से वे इस समस्या का समाधान ढूंढ सकते हैं।

इस प्रोग्राम का नाम है ‘केयर अबाउट द कॉर्नर’ और इसके तहत टीम की मानसिक सेहत को महत्व दिया जाएगा और भारतीय फुटबॉल में इस तरीके का प्रोग्राम पहली बार होस्ट किया जा रहा है।

टीम के मीडिया मैनेजर कुनाल मजगांवकर (Kunaal Majgaonkar) ने ओलंपिक चैनल से बात करते हुए कहा “मैं पूर्व जर्मन गोलकीपर रॉबर्ट एनके (Robert Enke) की बायोग्राफी ‘अ लाइफ टू शोर्ट’ पढ़ रहा था। वह अपने पिता के के गुज़रने के बाद वह डिप्रेशन में चले गए थे और वह इसलिए मदद भी ले रहे थे। लेकिन 2009 में वह एक ट्रेन के आगे कूद गए थे।”

“एक समय पर वह जर्मनी के सर्वश्रेष्ठ थे। वह बार्सिलोना और बेनफिका जैसी टीमों के लिए भी खेले थे। उन्होंने अपना ज़्यादा समय हॉफ़्फ़ेनहाइम में बिताया था। मैंने शुरू से यही कहानियां सुनी हैं। लेकिन जब मैं किताब पढ़ रहा था तब मुझे नहीं लग रहा था कि यह शख़्स अपनी जान ले सकता है। मुझे था कि यह इंसान कैसे? यह मर नहीं सकता? क्योंकि उनके पास पूरा सपोर्ट सिस्टम था।”

बेंगलुरु एफसी इंडियन सुपर लीग में लगातार खराब प्रदर्शन करते हुए। तस्वीर साभार: ISL मीडिया 

आगे बातचीत करते हुए उन्होंने कहा “इसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। अगर किसी के पास बहुत पैसा है नाम है यह किसी के साथ भी हो सकता है। मैंने अपनी किताब रख दी और मंदार को बुला लिया (तम्हाने, क्लब के सीईओ) और बात की कि क्या हम लड़कों के लिए एक प्रोग्राम कर सकते हैं। और मंदार ने हाँ बोलने के लिए एक सेकंड भी नहीं लिया।”

रेंजर्स एफसी का सपोर्ट

पिछले साल अक्टूबर के महीने में इस प्रोग्राम की स्थापना की गई थी ताकि खिलाड़ियों और स्टाफ की मदद की जा सके। साथ ही स्कॉटलैंड के रेंजर्स एफसी (Rangers FC) की मदद के साथ भारतीय फुटबॉल क्लब ने खेल मनोविज्ञान की मदद से मानसिक स्वास्थ्य को सुधारने का फ़ैसला किया।

सीईओ मंदार तम्हाने (Mandar Tamhane) ने इस विषय पर टिप्पणी देते हुए कहा “मानसिक स्वास्थ्य खेल मनोविज्ञान नहीं है। यह मानसिक स्वास्थ्य का ही एक छोटा सा हिस्सा है। मुझे लगा कि एक क्लब होने के नाते हमे इस पर काम करना चाहिए।

“हमने बहुत से लोगों से बात की। हमने रेंजर्स एफसी से भी बात की जिनके पास जिनके पास खिलाड़ियों के लिए एक मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी डिपार्टमेंट है। हमने उनके पेशेवरों से भी बात की कि वह कैसे इसे काम में लाते हैं। हमे इस पर काफी सूचनाएं मिलीं। हमे यह समझ आने लगा और हम भारतीय परिस्थितियों में इसे ढ़ालने की कोशिश कर रहे हैं।

बातचीत को आगे बढ़ाते हुए मंदार तम्हाने ने कहा “हमारे पास एक पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ हैं। अलग से उनके द्वारा सेशन भी लिए जाते हैं ताकि ज़रूरी जानकारी मिलती रहे। उसके तहत करने और न करने की सलाह दी जाती है। हमने रेंजर्स टीम के साथ भी कुछ सेशन लिए। इसके बाद हम ज़रूरत के अनुसार वन-ऑन-वन सेशन भी करवाते हैं चाहे वह ऑनलाइन है या ऑफलाइन।”

“यह जानकारी पेशेवर और खिलाड़ी के बीच की होती है और क्लब का कोई भी इंसान इससे परिचित नहीं होता। हमारे लिए अभी यह सुविधा लेने का समय है।”