East Bengal vs Mohun Bagan: बाला देवी चाहती हैं वुमेंस की कोलकाता ‘डर्बी’ 

बाला देवी 'ओल्ड फ़र्म डर्बी' में खेल चुकी हैं जब रेंजर्स वुमेन एफ़सी और केल्टिक के बीच मुक़ाबला हुआ था, वह मानती हैं कि महिलाओं की कोलकाता डर्बी से भारतीय फ़ुटबॉल को बड़ा फ़ायदा होगा।

लेखक सैयद हुसैन ·

भारतीय महिला फ़ुटबॉल टीम की स्टार स्ट्राइकर बाला देवी (Bala Devi) मानती हैं कि अगर महिलाओं की कोलकाता डर्बी शुरू हुई तो इससे भारतीय फ़ुटबॉल को एक नया मुक़ाम हासिल होगा।

कोलकाता के दो क्लब ईस्ट बंगाल (East Bengal) और एटीके मोहन बागान (ATK Mohun Bagan) अपनी पुरानी प्रतिद्वंदिता अब इंडियन सुपर लीग (ISL) में भी इस शुक्रवार को जारी रखने वाले हैं।

बाला देवी पहली भारतीय महिला फ़ुटबॉलर हैं जिन्होंने यूरोपियन क्लब के साथ क़रार किया है, वह स्कॉटलैंड में रेंजर्स वुमेन एफ़सी का हिस्सा हैं।

30 वर्षीय इस भारतीय महिला फ़ुटबॉलर ने ‘ओल्ड फ़र्म डर्बी’ भी खेला है, जो रेंजर्स वुमेन और केल्टिक वुमेन के बीच मुक़ाबले को कहा जाता है। हालांकि उस मैच में बाला देवी की रेंजर्स वुमेन को 0-1 से हार का सामना करना पड़ा था।

बाला देवी ने इस तरह के रोमांचक और बड़े मुक़ाबले को पहली बार इतने क़रीब से देखा था और अब वह चाहती हैं कि भारत में भी इसकी शुरुआत हो।

“मुझे लगता है जिस तरह रेंजर्स वुमेन और केल्टिक वुमेन की टीमों के बीच होता है, वह हमारे यहां ईस्ट बंगाल और मोहन बागान की महिला टीमों के बीच भी होना चाहिए। इससे सिर्फ़ बंगाल को ही नहीं बल्कि भारतीय फ़ुटबॉल को भी मदद मिलेगी।“

उन्होंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए कहा, “रेंजर्स और केल्टिक ने ये महज़ एक साल के अंदर किया है, मुझे उम्मीद है कि हमारी कोलकाता की टीमें भी इसी समय में तैयार हो सकती हैं।“

मणिपुर से शुरुआत करने वाली और फिर कोलकाता में ट्रेनिंग करने वाली बाला देवी को उनके फ़ुटबॉल जज़्बे के लिए जाना जाता है। बाला देवी को पूरा भरोसा है कि देश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है।

“कोलकाता के ये दोनों बड़े क्लब आसानी के साथ महिला टीम तैयार कर सकते हैं, क्योंकि हमारे पास प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जब मैं जूनियर फ़ुटबॉल खेला करती थी तो हमारा फ़ाइनल मुक़ाबला बंगाल की टीमों के ही ख़िलाफ़ हुआ करता था। बंगाल की लड़कियों में प्रतिभा कूट-कूट कर भरी है, और मेरे समय की तो कई लड़कियों ने राष्ट्रीय टीम में भी जगह बनाई।“

उन्होंने अपनी बात इसके साथ ख़त्म की, “अगर हम कुछ इस तरह का सिस्टम तैयार कर लें कि पूरे साल लड़कियां मैच खेल सकें तो और भी ज़्यादा खिलाड़ी हमें मिलेंगी। इसके लिए सभी क्लब को महिला टीम बनाने की ओर ध्यान देना चाहिए और उन्हें खेल के लिए बुनियादी सुविधाएं मिलनी चाहिए।“