ISL से पहले जेजे लालपेखलुआ ने बॉक्सिंग रिंग में की मशक़्क़त

भारतीय फुटबॉल टीम के स्ट्राइकर जेजे लालपेखलुआ ने एक बार फिर अपने करियर में आगे बढ़ने के लिए बॉक्सिंग को उपयोग में लाया। जेजे इंडियन सुपर लीग के सीज़न में खेलते दिखाई देंगे।

लेखक जतिन ऋषि राज ·

चोट से उबरने के बाद भारतीय फुटबॉल टीम स्ट्राइकर जेजे लालपेखलुआ (Jeje Lalpekhlua) मैदान में वापसी करने के लिए तैयार हैं। ऐसे में वह अपने शरीर को मज़बूत बनाने के लिए बॉक्सिंग की ट्रेनिंग कर रहे हैं। चेन्नईयन (Chennaiyin) के साथ जुड़े इस खिलाड़ी को इंडियन सुपर लीग (Indian Super League – ISL) के पिछले संस्करण को छोड़ना पड़ा था। हालांकि जेजे लालपेखलुआ ने इस बार ISL में एससी ईस्ट बंगाल की टीम का हाथ पकड़ा है और हम उम्मीद करते हैं कि वह अपने कौशल का प्रमाण एक बार दोबारा पेश करेंगे। फिलहाल उन्होंने खूबसूरत लाल और गोल्ड जर्सी में ट्रेनिंग करना शुरू कर दिया है।

जेजे ने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (All India Football Federation – AIFF) के साथ इंटरव्यू के दौरान कहा, “बॉक्सिंग एक ऐसा खेल है जो आपको कड़ी ट्रेनिंग करने के लिए मजबूर करता है और आप हमेशा इससे जुड़े फायदे ले सकते हैं, चाहे आप फुटबॉलर ही क्यों न हों।“इस खेल में शरीर के ऊपरी हिस्से ही ताकत की ज़रूरत होती है, तो ऐसे में यह मेरे उस पक्ष को भी मज़बूत करेगा।””

29 वर्षीय स्ट्राइकर का मानना है कि बॉक्सिंग की ट्रेनिंग और तेज़ फुटवर्क उनके फुटबॉल के खेल को निखारने में मदद करेगा।

“बॉक्सिंग के ज़रिए मैंने पैरों की हरकत और स्टेमिना को प्राप्त किया है क्योंकि एक खेल में तीन मिनट के तीन राउंड होते हैं।”

“लेकिन हर राउंड के वह तीन मिनट बहुत तीव्र होते हैं। ऐसी किसी चीज़ की तैयारी करने से आप अपना स्टेमिना बढ़ा लेते हैं।”

जेजे लालपेखलुआ इंडियन सुपर लीग सीज़न 2020-21 में एससी ईस्ट बंगाल की ओर से खेलते दिखाई देंगे।

ग़ौरतलब है ISL में खेलने वाले जेजे लालपेखलुआ सुनील छेत्री (Sunil Chetri) के बाद दूसरे नंबर के गोल स्कोरर हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 23 गोल मारने वाले भारतीय स्ट्राइकर ने आगे कहा “एक दिन मेरे पिता घर में बॉक्सिंग के ग्लव्स ले आए थे और मैंने उनसे अभ्यास करना शुरू कर दिया था। इसके बाद मैंने लोकल कोचिंग लेना शुरू कर दिया और लोकल प्रतियोगिताओं में भी भाग लेने लगा।”

जेजे जब 10 साल के थे तो उन्होंने एक बॉक्सिंग की प्रतियोगिता भी जीती थी। हालांकि इसके बाद भी इस मिज़ो स्नाइपर ने फुटबॉल की ओर रुझान दिखाया इर उसी को चुना।

“मुझे बॉक्सिंग में भी आनंद मिलता है। मैं अभी भी वह करता हूं। मुझे बॉक्सिंग की ट्रेनिंग करने के लिए रूटीन नहीं मिलता क्योंकि वैसे ही मेरा शेड्यूल काफी व्यस्त रहता है। लेकिन जब मैं ऑफ-सीज़न के लिए घर घर आता हूं तो मैं ऐज़ौल में ही बॉक्सिंग अकादमी जा कर ट्रेनिंग करता हूं।”

भारतीय फुटबॉल खिलाड़ियों काफी बॉक्सर दोस्त हैं जिनमें नुतलाई लालबिआकिमा (Nutlai Lalbiakkima) भी शामिल हैं। नुतलाई लालबिआकिमा वह हैं जिन्होंने रियो 2016 ओलंपिक गेम्स के गोल्ड मेडल विजेता हसनबाय दुस्मातोव (Hasanboy Dusmatov) को 2018 प्रेसिडेंट कप में मात दी थी। उस समय हसनबाय दुस्मातोव लाइट फ्लाईवेट में विश्व नंबर 1 के बॉक्सर थे।