चोट के बाद वापसी के लिए तैयार हैं जिनसन जॉनसन

चोट से उभर रहे भारतीय स्प्रिंटर जिनसन जॉनसन फील्ड पर वापसी को लेकर है बेक़रार ताकि टोक्यो 2020 के लिए वह अपनी दावेदारी पेश कर सकें।

लेखक अरसलान अहमर ·

नवंबर में स्कॉट सिमंस की निगरानी में यूएसए में प्रशिक्षण के दौरान, भारतीय 1500 मीटर विशेषज्ञ स्प्रिंटर जिनसन जॉनसन को एक गंभीर चोट लग गई थी, जिसने टोक्यो 2020 में उनके क्वालिफाई करने की उम्मीदों को गहरा झटका दिया।

एएफआई के एक अधिकारी ने अपना नाम न छापने की शर्त पर हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, "जॉनसन ने चोट के दौरान अपने बाएं पैर में एच्लीस हील टेंडन को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर लिया, जिसके कारण वह पूरे नवंबर और दिसंबर के साथ जनवरी 2020 तक ट्रेनिंग नहीं कर सकेंगे।"

इस चोट ने जिनसन को भारत लौटने के लिए मजबूर कर दिया और इसने टोक्यो 2020 के लिए क्वालिफाई की उनकी उम्मीदों को भी गहरा झटका दिया, क्योंकि टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने का आख़िरी समय जून 2020 है।

आशा की किरण

हालांकि, अब चीजें पहले से थोड़ी ठीक होती दिख रही हैं। 28 वर्षीय यह स्प्रिंटर मुंबई में पुनर्वास के दौर से गुज़र रहा है, जिसमें एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल में पानी के भीतर और एंटी-ग्रेविटी प्रशिक्षण शामिल है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जिनसन ने कहा "मुझे लगता है कि कुछ सुधार हुआ है। लेकिन वास्तव में साधारण तौर पर और स्पाइक्स पहन कर फील्ड पर दौड़ने में काफी अंतर है। मेरा लक्ष्य है कि मैं जनवरी में ट्रैक पर वापसी करूं। मुझे यह करना होगा क्योंकि समय बीत रहा है।"सावधानी से बढ़ा रहे हैं कदम

जिनसन मार्च तक प्रतिस्पर्धा में लौटने की उम्मीद कर रहे हैं, जिसका मतलब यह है कि हमें वह फेडरेशन कप या ग्रैंड प्रिक्स में भाग लेते हुए दिख सकते हैं। टोक्यो 2020 क्वालिफिकेशन में कम समय रहने के बावजूद वह कोई जल्दबाज़ी नहीं करना चाहते। इस बाबत जिनसन ने कहा, "पूरी फिटनेस हासिल करके ट्रैक में वापसी करने के लिए मुझे अभी कम से कम तीन महीने का समय लगेगा। सिर्फ नाम भर के लिए प्रतियोगिता में हिस्सा लेना बेकार है। मैं अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं। इसलिए, मैं थोड़ा समय लेने वाला हूं।" गौरतलब है कि 2015 एशियन एथलेटिक चैंपियनशिप के रजत पदक विजेता को स्कॉट सिमंस की निगरानी में यूएसए में कोलोराडो स्प्रिंग में ट्रेनिंग करते हुए चोट लगी थी। इस बारे में 1500 मी विशेषज्ञ स्प्रिंटर ने कहा "यह मेरे लिए एक प्रयोग की तरह था। मौसम काफी कठिन था। मैं वहां गया था क्योंकि मैं जानना चाहता था कि सबसे अच्छी सुविधाओं और कोचों के साथ प्रशिक्षण लेना कैसा होता है।"

जॉनसन ने आगे कहा "चोट के बाद, गर्म परिस्थितियों में रहना बेहतर है क्योंकि उस समय हमारा रक्त परिसंचरण तेज़ हो जाता है। ठंडे तापमान में, यह धीमा होगा, और इस वजह से चोट से उबरने से समय लगता है।"उन्होंने आगे कहा "मैं अमेरिका जाने से पहले लंबे समय से दर्द से परेशान था। यदि आपने ध्यान दिया हो, तो यूरोप और अन्य स्थानों में मेरी प्रतियोगिताओं के दौरान, मैंने हमेशा अपने पैर पर टेप लगाया हुआ था क्योंकि मैं कमजोर महसूस कर रहा था।"

चूंकि, अब टोक्यो 2020 में क्वालिफाई करने की समयसीमा के लिए ज़्यादा वक़्त नहीं रह गया है। ऐसे में भारतीय स्प्रिंटर जिनसन जॉनसन की कोशिश यही होगी कि जल्द से जल्द वह अपनी चोट से उबरते हुए अपनी ओलंपिक उम्मीदों को जीवित रखें। देखना अब यह होगा, कि कब यह भारतीय स्प्रिंटर हमें ट्रैक पर दोबारा अपने लक्ष्य की ओर भागते हुए दिखाई देगा।