भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ज्वाला गुट्टा ने हार और जीत को हैंडल करने के लिए दिए टिप्स

दो बार की ओलंपियन ज्वाला गुट्टा सलाह देते हुए कहा कि हार से परेशान होना कोई विकल्प नहीं है और न ही सफलता से दूर रहना।

पूर्व राष्ट्रमंडल खेलों की चैंपियन ज्वाला गुट्टा (Jwala Gutta) का मानना है कि ग़लतियाँ करने से सफलता के दरवाज़े खुल सकते हैं दो बार की ओलंपियन और डबल्स बैडमिंटन खिलाड़ी अपनी पीढ़ी की सबसे बेहतरीन भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों में से एक हैं।

2010 राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के अलावा, ज्वाला गुट्टा ने एक विश्व चैंपियनशिप डबल्स का कांस्य, एक एशियाई चैंपियनशिप कांस्य और कई बैडमिंटन विश्व फेडरेशन पदक जीते हैं हालाँकि, ये सफलताएँ उनकी ग़लतियों के बाद खुद को हौसला देने की वजह से संभव हो पाया।

ज्वाला गुट्टा ने एक साक्षात्कार में फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि, “यदि आप हार जाते हैं, यदि आप अपनी ग़लतियों को पहचान लेते हैं, तो आप वापसी कर सकते हैं। आपकी गलती से सब कुछ खत्म नहीं होता। उन्होंने कहा कि, “भले ही आप हार गए हों, आपको अपने आप से नहीं हारना चाहिए क्योंकि आपको पता होना चाहिए कि आपको और मौके मिलेंगे। मानसिक जागरूकता, मानसिक दृढ़ता बहुत महत्वपूर्ण है।”

हमेशा आगे की सोचिए

भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने 2017 के बाद से विश्राम लिया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सफलता हासिल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है

“आपको पता होना चाहिए कि अपने हार और अपनी जीत को कैसे संभालना है क्योंकि एक जीत के बाद अगले हफ्ते एक और टूर्नामेंट होती है।

“अगर आप संतुष्ट और तनाव मुक्त हैं, तो आप अगले टूर्नामेंट की तैयारी नहीं कर पाएंगे। और एक खिलाड़ी होने के नाते आपको हर सप्ताह एक नया टूर्नामेंट देखने को मिलेगा।”

जैसा खेल स्तर, वैसी उम्मीदें

लगभग दो दशकों तक अपने खेल में सर्वोच्च स्तर पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करने के बाद, ज्वाला गुट्टा अपने कंधे पर अरबों की आशाओं और आकांक्षाओं को ले जाने के बारे में एक या दो चीजें ही जान सकी हैं।

“आपसे उम्मीदें हमेशा बनी रहेंगी, यहां तक कि जब आप नेशनल जीतते हैं, तो दर्शक कम हो सकते हैं। उम्मीद और दबाव का मतलब है कि आप किस स्तर पर खेल रहे हैं- मतलब बड़े स्तर पर बड़ी उम्मीदें ज्यादा दबाव।”

ज्वाला ने कहा कि, “जब आप राज्य स्तर पर खेलते हैं, राज्य एसोसिएशन, आपके आसपास के खिलाड़ी, आपका परिवार आपसे उम्मीद करता है कि आप जीतेंगे।” 36 वर्षीय ज्वाला गुट्टा ने कहा कि उम्मीदों का दबाव किसी भी खिलाड़ी के करियर का हिस्सा रहा है, लेकिन उन्हें पूरा करने में विफलता का मतलब ये नहीं कि आप मायूस हों।

इसके बजाय ये अगली चुनौती के लिए मानसिक रूप से तैयार करने में मदद करने के लिए एक उपकरण के रूप में काम करना चाहिए।

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