पढ़ाई पर फोकस करना चाहती हैं पिता को साइकिल पर बैठाकर बिहार लाने वाली ज्योति

15 साल की ये लड़की कुछ भी करने से पहले अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहती है।

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

अपने प्रवासी पिता को  गुरुग्राम से  बिहार अपने गांव तक पहुँचाने के लिए 1,200 किलोमीटर की एक लंबी यात्रा करने वाली ज्योति कुमारी कई लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन गई हैं।

15 साल की ज्योति पहले अपनी पढ़ाई पर फोकस कर आगे अच्छी यूनिवर्सिटी में दाख़िला लेना चाहती हैं।

ज्योति कुमारी ने द हिंदू से बातचीत में कहा कि "इससे पहले, मैं अपनी स्कूली शिक्षा जारी नहीं रख सकी और घरेलू कामों में व्यस्त रही लेकिन अब मैं अपना मैट्रिक पूरा करना चाहती हूं।”

ज्योति अपने पिता मोहन पासवान के पास रहने के लिए अपनी मां और बहनोई के साथ कुछ महीने पहले गुरुग्राम आई थीं क्योंकि उनके पिता एक दुर्घटना में घायल हो गए थे।

इसके बाद वह दोनों वापिस गांव लौट आए लेकिन ज्योति अपने पिता के साथ ही रही। जब देश में लॉडाउन हुआ तो उन्हें अपने पिता के साथ वापस गांव लौटना पड़ा।

ज्योति के पिता मोहन पासवान ने बताया कि “उसने पड़ोसी से सेकेंड हैंड साइकिल खरीदी और मुझ साइकिल पर बैठने को कहा, हम दोनों ने 10 मई को यात्रा शुरू की थी।”

ज्योति की प्रेरणादायक कहानी

1,200 किमी की साइकिल यात्रा ने दुनिया भर में सुर्खियाँ हासिल की। वहीं साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (सीएफआई) का ध्यान भी आकर्षित किया, जिसके बाद उन्हें नई दिल्ली में एक ट्रायल की पेशकश की गई।

15 वर्षीय ने उत्तर प्रदेश राज्य में आठ दिनों तक साइकिल चलाई थी, यहां तक कि ट्रकों और ट्रैक्टरों की सवारी को भी छोड़ दिया। इस बीच उन्हें  कई भरोसेमंद लोग मिले, जिन्होंने उन्हें भोजन दिया

सीएफआई चेयरमैन ओमकार सिंह ने कहा कि “हम ज्योति की पैडलिंग क्षमता से बहुत प्रभावित हुए और उसने पिता के साथ साइकिल पर एक हफ्ते के भीतर 1,200 किमी की दूरी तय की यह बड़ी बात है। सीएफआई ने अब उसे मौका देने का फैसला किया है।”

हालाँकि, इस यात्रा से ज्योति में एनर्जी नहीं बची है, उन्होंने बताया कि "मैं इतनी लंबी यात्रा के बाद शारीरिक रूप से कमजोर महसूस कर रही हूं”

ज्योति कुमारी के इस काम से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी और सलाहकार इवांका ट्रंप भी प्रभावित हुई, उन्होंने ट्वीटर पर लिखा  कि 15 साल की ज्योति कुमारी ने अपने जख्मी पिता को साइकिल से सात दिनों में 1,200 किमी दूरी तय करके अपने गांव ले गई। इवांका ने आगे लिखा कि सहनशक्ति और प्यार की इस वीरगाथा ने भारतीय लोगों और साइकलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।