ओलंपिक पदक जीतने में मेरी मां ने निभाया अहम किरदार: कर्णम मल्लेश्वरी

समाजिक बुराइयों से लड़ने वाली कर्णम मल्लेश्वरी की माँ उनके लिए एक चट्टान की तरह थीं, जिनकी वजह से उन्हें अपने लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिली।

कर्णम मल्लेश्वरी (Karnam Malleswari) ने सिडनी 2000 ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था जो कि किसी भी भारतीय महिला द्वारा जीता गया ओलंपिक का पहला पदक था। इस पदक के आने के बाद देश की महिलाओं ने भी इस खेल में अपना करियर बनाना शुरू किया। 

उनकी इस उपलब्धि के पीछे एक दूसरी महिला का भी योगदान था, जो उनकी मां थीं। मां श्यामला के समर्थन के बिना ये संभव नहीं था।

80 और 90 के दशक में आंध्र प्रदेश के एक छोटे से शहर में एक लड़की भारोत्तोलन के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाह रही थी, लेकिन कर्णम मल्लेश्वरी को काफी विरोध का सामना करना पड़ा था।

“ये उस वक्त की बात है जब लड़कियों पर बहुत सारे प्रतिबंध होते थे। भारोत्तोलन जैसे खेल में एक महिला का आगे आना समाज को गंवारा नहीं था, मेरे रिश्तेदारों ने भी पीछे हटने के लिए कहा। उन्होंने सोनी स्पोर्ट्स के फेसबुक पेज पर द मेडल ऑफ ग्लोरी शो के दौरान ये सब बातें  फिर से याद करते हुए कहा कि, “लोग कहते थे कि मुझे स्वास्थ्य समस्याएं होंगी और मैं मां नहीं बन पाऊंगी।

आंध्र प्रदेश की इस 'आयरन गर्ल' ने कहा कि, “लेकिन मेरी माँ ने मुझे उस नकारात्मकता से बचा लिया। वो चाहती थीं कि उनकी बेटी वही करे जो वो चाहती है।”

कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक में पदक जीतने वाली खिलाड़ी बनीं और उन पांच महिलाओं की सूची में पहले स्थान पर रहीं, जिन्होंने देश के लिए मेडल जीता है। इस सूची में मैरी कॉम (Mary Kom), साइना नेहवाल (Saina Nehwal), साक्षी मलिक (Sakshi Malik) और पीवी सिंधु (PV Sindhu) भी शामिल हैं, जिन्होंने ओलंपिक मंच पर भारत के लिए पदक जीता है।

कर्णम की कहानी में मां का किरदार

अपनी बड़ी बहन को एक जिम में अभ्यास करते देखने के बाद वेटलिफ्टिंग में उन्होंने दिलचस्पी लेना शुरू किया। लेकिन जब उन्होंने स्थानीय कोच को अपने खेल को आगे बढ़ाने के लिए अपनी दिलचस्पी के बारे में बताया तो उन्होंने साथ देने से मना कर दिया।

कर्णम मल्लेश्वरी ने कहा कि, "उन्होंने मुझे बताया कि मैं भारोत्तोलन के लिए नहीं बनी हूं। उन्होंने कहा कि मैं वजन उठाने के लिए बहुत कमजोर और पतली हूं और मुझे अपने घर के कामों में अपनी माँ की मदद करने के लिए घर पर रहना चाहिए।”

उन्होंने कहा, "मुझे ये जानकर बहुत बुरा लगा कि बिना मुझे जाने कैसे किसी ने निर्णय ले लिया कि मैं क्या करने में सक्षम हूं और क्या नहीं।"

हताश, नाराज़ और निराश होकर वो वापस घर चली गईं। लेकिन उनकी माँ ने हार नहीं मानी, उन्होंने कर्णम को खेल में आगे बढ़ने और खुद को साबित करने के लिए उत्साहित किया।

“मेरी माँ ने मुझसे पूछा कि मामला किया है। मैंने उन्हें बताया कि क्या हुआ और उन्होंने मुझसे पूछा कि मैं इस मामले में क्या करना चाहती हूं। तब उन्होंने मुझसे कहा कि अगर तुम्हें तुम्हारी क्षमता पर संदेह करने वाले लोगों के बारे में जानकर तुम्हें बुरा लगा, तो तुम्हें वहाँ जाकर और भारोत्तोलन करके उन्हें गलत साबित करना चाहिए।’’

कर्णम मल्लेश्वरी ने कहा, “उन्होंने कहा कि अगर मैं कड़ी मेहनत करना चाहती हूं और अपने जीवन में कुछ बनना चाहती हूं तो वो हमेशा मेरा समर्थन करेंगी। मुझे उनसे बहुत समर्थन मिला।”

नई पीढ़ी भी देश को गौरवान्वित करने के लिए हो रही है तैयार

कर्णम मल्लेश्वरी अब मां के रूप में खुद एक खिलाड़ी के सपने को पूरा करने के लिए कोशिश कर रही हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान खुलासा किया कि, “मेरे बड़े बेटे (शरद चंदर त्यागी) ने शूटिंग शुरू कर दी है। उन्हें अभिनव बिंद्रा (Abhinav Bindra) के स्वर्ण पदक (2008 बीजिंग ओलंपिक में) से प्रेरणा मिली।“

शूटिंग में अपने बेटे की दिलचस्पी के बारे में पता चलने के बाद कर्णम मल्लेश्वरी ने उन्हें पुणे में गगन नारंग (Gagan Narang) की गन फॉर ग्लोरी अकादमी में दाख़िला दिलाया और उनके ट्रेनिंग में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा, ''जब भी वो घर पर होता है मैं उसे गाइड करती हूं, मैंने भी समाचार पत्रों और इंटरनेट पर इसके बारे में पढ़कर शूटिंग शुरू कर दी है।’’

उन्होंने टाइम्स ऑफ इंडिया के साथ एक इंटरव्यू में कहा था कि,"अगर उसे (शरद चंदर त्यागी) कोई भी संदेह हो, तो कम से कम मैं उस स्थिति में रहूं कि उसके संदेह को दूर कर सकूं।"

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