किरेन रिजिजू भविष्य में ओलंपिक पदकों की संख्या में व्यापक बढ़ोतरी की कर रहे उम्मीद

टोक्यो 2020 में अधिक से अधिक पदकों की उम्मीद करते हुए किरेन रिजिजू पेरिस 2024 और लॉस एंजिल्स 2028 पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन पिछले दो दशकों से लगातार बढ़ रहा है, देश ने 2012 लंदन ओलंपिक (2012 London Olympics) में अब तक सबसे अधिक मेडल हासिल किए हैं। जिसमें, हॉकी, निशानेबाज़ी, बैडमिंटन, कुश्ती और मुक्केबाज़ी जैसे ओलंपिक खेल हैं, जहां भारत ने शानदार प्रदर्शन किया है।

वहीं, अगर अन्य खेलों की बात करें तो भारत को भविष्य में और व्यापक प्रदर्शन करने की जरूरत है। भारतीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने इकोनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए कहा कि टोक्यो 2020 (Tokyo 2020) में भारत की पदक की उम्मीदों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही साथ 2024 और 2028 के ओलंपिक खेलों की उम्मीदों के दायरे को भी बढ़ाया गया है।

टोक्यो 2020 के लिए सबसे अच्छी तैयारी सुनिश्चित करना हमारा लक्ष्य

ओलंपिक के सबसे हालिया संस्करण रियो 2016 में भारत केवल दो मेडल हासिल करने में सफल रहा। वहीं, 2020 के ओलंपिक खेलों में पदकों की संख्या में स्पष्ट सुधार की आवश्यकता के बारे में बोलते हुए किरेन रिजिजू ने कहा, “हम केवल एक या दो पदक जीतने की उम्मीद के साथ ओलंपिक में नहीं जा सकते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए टोक्यो 2020 के लिए हमारी तैयारी जोरों पर है।”

ओलंपिक तैयारियों के बारे में विस्तार से बात करते हुए रिजिजू ने कहा, “प्रशिक्षण सुविधाओं और कोचों की कमी हमारी सबसे बड़ी विफलता रही है। अब हम इन दोनों मुद्दों पर सुधार कर रहे हैं। हमने वैज्ञानिक प्रशिक्षण माध्यमों और सहायक प्रणाली को भी जोड़ने का काम किया है। हम अपने खिलाड़ियों के लिए सबसे बेहतर माहौल प्रदान करने की दिशा में काम कर रहे हैं।”

अपर्याप्त प्रशिक्षण और कम सुविधाओं के साथ लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों का प्रतिस्पर्धा करना एक बड़ा मुद्दा रहा है। ऐसे में किरेन रिजिजू उन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उठाए गए कदम से संतुष्ट हैं। आगे उन्होंने कहा, “हम खेल विज्ञान, पोषक आहार, विश्व स्तरीय कोचों, प्रशिक्षकों, चिकित्सकों और एथलीटों को आंतरिक शक्ति में सुधार लाने वाले विशेषज्ञों को लाकर सभी कमज़ोरियों को दूर कर रहे हैं। इन सभी बदलावों ने जबरदस्त प्रभाव डाला है। वहीं, अगर हॉकी टीम की बात करें तो पुरुष और महिला दोनों टीमें दुनिया की नंबर एक टीम को हराने में सफल रहीं हैं।”

ओलंपिक प्रतीक और आतिशबाजी टोक्यो खेलों से छह महीने पहले एक शुरुआत है

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धैर्य की भूमिका महत्वपूर्ण

खेल मंत्रालय के द्वारा किए गए सराहनीय प्रयासों के बावजूद, किरेन रिजिजू ने कहा कि आप इतने कम समय में खिलाड़ियों से बहुत अधिक उम्मीद नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा, "आप एक या दो साल में चैंपियन खिलाड़ियों को तैयार नहीं कर सकते हैं। इसमें आठ से 10 साल का लम्बा समय लगता है। मेरे कार्यभार संभालने के बाद, टोक्यो 2020 के लिए मेरे पास बहुत सीमित समय (एक साल का) था। मैंने उस समय पर्याप्त संसाधन का सर्वोत्तम उपयोग करने की कोशिश की है।”

ऐसे में जब 2020 ओलंपिक का अभियान शुरू होने में बेहद कम समय बचा है तो किरेन रिजिजू के मंत्रालय की नज़र अब भविष्य पर है। आगे उन्होंने कहा, “हमारे पास असली काम टोक्यो 2020 के बाद होगा - पेरिस 2024 और लॉस एंजिल्स 2028 में अपने सभी उद्देश्यों को पूरा कर सकते हैं। यह वह सही समय होगा जब हम सही प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाओं के साथ अच्छे परिणाम हासिल कर पाएंगे।"

"50,000 से अधिक युवा खिलाड़ी राष्ट्रीय शिविरों में प्रशिक्षण ले रहे हैं। पीएम ने 2017 में एक ओलंपिक टास्क फोर्स का गठन किया था और हम इनकी सिफारिशों को लागू कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि ये सभी प्रयास हमें भविष्य में उचित लाभ देंगे।"

किन खेलों से ओलंपिक में पदक की उम्मीद?

जब उनसे पूछा गया कि भारत को ओलंपिक में उन्हें किन खेलों से उम्मीद है तो रिजिजू ने कहा, "हमें कुश्ती, मुक्केबाज़ी, वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, तीरंदाज़ी, निशानेबाज़ी, तलवारबाज़ी और हॉकी सहित 14 खेलों में उम्मीद है।" इन खेलों में से भारतीय एथलीटों ने अब तक केवल तीरंदाज़ी, एथलेटिक्स, हॉकी, शूटिंग, कुश्ती के लिए ही कोटा स्थान सुनिश्चित किया है और फवाद मिर्ज़ा के प्रयासों ने भी भारत के लिए घुड़सवारी में एक जगह पक्की करने में सफलता हासिल की है।

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