खेल मंत्रालय ने वित्तीय संकट से जूझ रही नेशनल वुशु चैंपियन शिक्षा की मदद को आगे बढ़ाए हाथ

कोरोना वायरस महामारी की वजह से वित्तीय संकट से जूझ रही शिक्षा को अपने परिवार का पेट भरने के लिए खेतों में मज़दूरी करनी पड़ रही थी।

भारतीय खेल मंत्री किरेन रिजिजू (Kiren Rijiju) ने कोरोना वायरस (COVID-19) महामारी के बीच वित्तीय संकट से जूझ रही हरियाणा की नेशनल वुशु चैंपियन शिक्षा की वित्तीय सहायता को मंजूरी दे दी है।

कई बार स्टेट वुशु चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीत चुकी शिक्षा (Shiksha) चल रही महामारी की वजह से गंभीर वित्तीय संकट में पड़ गईं, जिससे उन्हें खेतों में मजदूर के तौर पर काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

आपको बता दें, 22 वर्षीय यह खिलाड़ी रोहतक में खेल विज्ञान में स्नातक की डिग्री भी ले रही हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति उनकी शिक्षा के लिए एक बाधा बन रही है।

शिक्षा ने कहा, “मेरे पास खेल मंत्री का आभार जताने और ऐसे समय में पांच लाख रुपए की मदद भेजने के लिए उनका धन्यवाद करने के लिए शब्द नहीं हैं।"

मुश्किल दौर ने किया मजबूर

शिक्षा के माता-पिता सरकार की ग्रामीण रोज़गार योजना (NREGA) के तहत मजदूरी का काम करते हैं। ऐसे में शिक्षा ने इस मुश्किल समय में आस-पास के धान के खेतों में काम करके अपने परिवार की मदद की। वह हर रोज़ 200 से 300 रुपए ही कमा पाती हैं।

उन्होंने खुलासा करते हुए कहा...

मेरे माता-पिता ने मुझे इस मुक़ाम तक पहुंचाने के लिए अपना सबकुछ कुर्बान कर दिया है। दुर्भाग्य से, महामारी की वजह से जिंदगी में एक ठहराव सा आ गया। मेरा प्रशिक्षण बंद हो गया और मुझे मजदूरी करके अपने माता-पिता की मदद करनी पड़ी।

देश को गौरवांवित करने के लिए उत्सुक

खिलाड़ियों की मदद के लिए बनाए गए सरकार के पंडित दीन दयाल उपाध्याय राष्ट्रीय कल्याण कोष के माध्यम से वित्तीय सहायता मिलने के बाद, शिक्षा अब एक बार फिर अपना प्रशिक्षण शुरू करने के लिए उत्सुक हैं।

मैं जल्द से जल्द अपने प्रशिक्षण पर वापस लौटने के लिए पूरी तरह से तैयार हूं। मैं सभी से वादा करती हूं कि एक साल के अंदर मैं देश के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लाऊंगी।

वुशु के अलावा, शिक्षा एक कुशल किकबॉक्सर भी हैं और उन्होंने अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय किकबॉक्सिंग चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक और एक कांस्य पदक जीता है।

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