कृष्ण पाठक: एक ऐसा हॉकी खिलाड़ी जो दीवार की तरह खड़ा रहता है

भारतीय हॉकी टीम में गोलकीपर के दूसरे विकल्प के रूप में खेल रहे कृष्ण पाठक ने इस सीज़न में न केवल शानदार प्रदर्शन किया बल्कि अपने सीनियर और स्टार गोलकीपर पीआर श्रीजेश से लाइमलाइट भी छीन ली। 

लेखक लक्ष्य शर्मा ·

कुछ समय पहले की ही बात है जब हॉकी इंडिया ने पीआर श्रीजेश (PR Sreejesh) की एक बात ट्वीट की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जैसे वाइन पुरानी होने पर बेहतर होती है, उसी तरह गोलकीपर भी अनुभव के साथ बेहतर होता जाता हैं (Goalkeepers, like fine wine, age with time -- PR Sreejesh) और ये बात कृष्ण पाठक (Krishan Pathak) पर पूरी तरह सटीक बैठती है।

वैसे भी श्रीजेश जैसे खिलाड़ी के साथ तुलना और उन्हें पीछे छोड़ना बिल्कुल भी आसान नहीं होता। केरल का यह खिलाड़ी कई मौकों पर अपनी टीम को यादगार जीत दिला चुका है लेकिन एफआइएच प्रो लीग (FIH Pro League) में वर्ल्ड चैंपियन बेल्जियम के खिलाफ श्रीजेश के साथ इस अनजान खिलाड़ी कृष्ण पाठक को भी मौका दिया गया। इस मौके को इस खिलाड़ी ने शानदार प्रदर्शन कर अच्छी तरह से भुनाया।

गोलकीपर कृष्ण पाठक एफ़आईएच प्रो लीग में बेल्जियम के ख़िलाफ़ प्रेरित करने वाले फ़ॉर्म में थे। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया

अपने सीनियर श्रीजेश के साथ इस खिलाड़ी ने अपनी ज़िम्मेदारी को अच्छे से निभाया और बेल्जियम के खिलाड़ियों के कई शॉट रोके। इस दौरान कृष्ण ने अपने तेज़ रिएक्शन और अच्छी पोजिशन से विरोधियों को कोई मौका नहीं दिया।कृष्ण पाठक ने ओलंपिक चैनल से बातचीत के दौरान कहा कि “मुझे नहीं लगता कि हमने बेल्जियम के खिलाफ कुछ अलग किया। हमने सिर्फ अपने बेसिक पर ध्यान दिया और अपने प्लान के मुताबिक खेला। हम सभी ऐसा हमेशा करने की कोशिश करते हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है, उस दिन हमने प्लान बनाया और वह कारगर साबित हुआ।“

कृष्ण ने कहा कि “मैंने नीदरलैंड के खिलाफ भी अच्छा प्रदर्शन किया था। उस मैच के बाद मुझे काफी आत्मविश्वास मिला, जिसका फायदा मैंने बेल्जियम के खिलाफ उठाया। इस खिलाड़ी ने बताया कि शुरुआत काफी अहम थी, मैं सोच रहा था कि अगर शुरुआत अच्छी रही तो हमारा दिन अच्छा होगा। बेल्जियम के खिलाफ मैच में पहला सेव शानदार रहा।“

जब श्रीजेश अपने स्वर्णिम दौर में थे तो कृषण बेंच पर बैठे हुए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे और जब उन्हें मौका मिला तो उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया।

ग्राहम रीड चाहते हैं सभी विकल्पों को आज़माना

टीम मैनेजमेंट अपने सभी विकल्प को मौका देकर उन्हें टेस्ट करना चाहती है। इसी कड़ी में उन्होंने इस रिजर्व गोलकीपर को भी मौका दिया। सुल्तान अज़लान शाह कप हो या ओलंपिक क्वालिफायर, हॉकी इंडिया के मुख्य कोच ग्राहम रीड (Graham Reid) ने दूसरे गोलकीपर विकल्प को आजमाने में कतई संकोच नहीं किया और कृष्ण पाठक इस बात से बिलकुल निराश नहीं होंगे। कृषण पाठक ने कहा कि “किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए ये बहुत अहम बात है।“

इसके अलावा कृष्ण ने कहा कि “जो मुझे मौके मिले उससे मैं बहुत खुश हूं। जब भी मुझे मौका मिलेगा, मैं हमेशा तैयार रहूंगा। मुझे पता है कि मुझे अभी हर मौके पर खुद को साबित करना है। जब भी आप बेंच पर होते हैं तो आपके अंदर हमेशा खुद को साबित करने की भूख होती है और मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने ज्यादा इंतजार नहीं किया।

पिछले साल सुल्तान अज़लान शाह कप के फाइनल में कृष्ण पाठक ने शूट-आउट के दौरान अपने मूव से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा।

वहीं साउथ कोरिया के खिलाफ उन्होंने विरोधियों के हमलों का बचाव करते हुए भारत की उम्मीदों को कायम रखा। उस मैच के अंतिम पलों में ली नाम-योंग (Lee Nam-Yong) ने जो गोल किया था, जिसे कृष्ण बचाने में असफल रहे थे, वह उन्हें आज भी याद है।

उस मैच को याद करते हुए कृष्ण पाठक ने बताया कि साउथ कोरिया के कप्तान ने गेंद अपने काबू में की और मेरे ऊपर से निकाल दी, वह मेरे लिए कुछ असाधारण था। ये बात बताते हुए कृष्ण अपनी हंसी नहीं रोक पाए।

इस खिलाड़ी ने कहा कि “मैं बस ये सोच रहा था कि वह क्या करने की कोशिश कर रहें हैं लेकिन जो उन्होंने किया उसकी तारीफ करनी पड़ेगी। यह सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुआ था। जब भी मैं वो बात सोचता हूं तो अपनी हंसी नहीं रोक पाता लेकिन ये खेल का हिस्सा है।“

कृष्ण पाठक के अनुसार खेल के दौरान ऐसे पलों से काफी कुछ सीखने को मिला। साल 2016 एफआइएच जूनियर वर्ल्डकप से सीनियर टीम में आने के बाद पंजाब के कपूरथला से आने वाले 22 साल के इस खिलाड़ी श्रीजेश की जगह भरने की पूरी काबिलियत दिखाई है।

कृष्ण पाठक पर पीआर श्रीजेश का प्रभाव

कृष्ण पाठक ने बताया कि “श्रीजेश ने ट्रेनिंग के दौरान उनकी कमियों के बारे में बताया और खेल में सुधार के लिए अहम टिप्स दिए। ऐसी कई बातें हैं जो मैं श्रीजेश भाई से सीख सकता हूं। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ लेवल पर कई सालों तक शानदार प्रदर्शन किया है और यह उनकी प्रैक्टिस के दौरान दिखता है।“

शिक्षक दिवस के अवसर पर भारतीय हॉकी गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने उन सभी को धन्यवाद दिया जिन्होंने उनके करियर के शुरुआती दिनों में उनकी मदद की।

इस युवा खिलाड़ी ने कहा कि “पिछले 4 सालों में एक गोलकीपर के रूप में मैंने काफी सुधार किया है। प्रैक्टिस सेशन के दौरान श्रीजेश जैसे बड़े खिलाड़ियों के साथ काफी कुछ सीखने को मिलता है।“

साल 2020 ओलंपिक में अब ज्यादा समय नहीं बचा है इसलिए खुद को साबित करने के मौके खिलाड़ियों के लिए कम हो रहे हैं लेकिन कृषण पाठक ने पहले ही चयनकर्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। वहीं इस खिलाड़ी को खुद पर विश्वास है और वह इसके लिए ज्यादा परेशान नहीं है। ये खिलाड़ी जो कर सकता था, वह उन्होंने अच्छे से किया अब फैसला चयनकर्ताओं को करना है कि वह श्रीजेश की तरह इस खिलाड़ी को मौका देते हैं या नहीं।