लालरेमसियामी को एफ़आईएच राइज़िंग स्टार ऑफ़ द ईयर से नवाज़ा गया

भारतीय महिला हॉकी टीम की स्ट्राइकर लालरेमसियामी ने अर्जेंटीना की जुलिएटा जानकुनस और नवीदरलैंड की फ़्रेडरीक मातला को पीछे छोड़ते हुए जीता ख़िताब

एक भारतीय हॉकी प्रशसंक के लिए हफ़्ते की शायद इससे अच्छी शुरुआत नहीं हो सकती थी, पहले भारतीय पुरुष हॉकी टीम के ऊभरते हुए स्टार विवेक सागर प्रसाद को एफ़आईएच राइज़िंग स्टार ऑफ़ द ईयर (पुरुष) से नवाज़ा गया। और फिर लालरेमसियामी के भी नाम रहा महिला वर्ग का यही ख़िताब।

भारतीय महिला स्ट्राइकर को विश्व की ऊभरती हुई स्टार के तौर पर सबसे ज़्यादा वोट हासिल हुए, इसका फ़ैसला ऑनलाइन पोल के ज़रिए हुआ। जहां नेशनल फ़ेडरेशन्स (50%), द प्रेस (25%) और प्रशंसकों (25%) ने लालरेमसियामी को वोट देते हुए विजयी बना। 19 वर्षीय भारतीय स्ट्राइकर ने इस मामले में अर्जेंटीना की जुलिएटा जानकुनस और नीदरलैंड की फ़्रेडरीक मातला को पीछे छोड़ा।

लालरेमसियामी के जज़्बे को सलाम

लालरेमसियामी ने भारत के लिए डेब्यू तो 2017 में ही किया था, लेकिन उन्होंने पहली बार सुर्ख़ियां लंदन में हुए 2018 एफ़आईएच वर्ल्ड कप में बटोरी थीं। उनकी ताक़त है कि स्ट्राइकिंग सर्कल को भेदते हुए टीम के लिए गोल करने का अवसर बनाना। उन्होंने अपनी इसी ताक़त के साथ भारतीय महिला टीम को क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुंचा दिया था।

भारतीय स्ट्राइकर लालरेमसियामी ने 2017 में भारत के लिए डेब्यू किया था, लेकिन उन्होंने सुर्खियां बटोरीं 2018 एफ़आईएच वर्ल्ड के दौरान। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया
भारतीय स्ट्राइकर लालरेमसियामी ने 2017 में भारत के लिए डेब्यू किया था, लेकिन उन्होंने सुर्खियां बटोरीं 2018 एफ़आईएच वर्ल्ड के दौरान। तस्वीर साभार: हॉकी इंडियाभारतीय स्ट्राइकर लालरेमसियामी ने 2017 में भारत के लिए डेब्यू किया था, लेकिन उन्होंने सुर्खियां बटोरीं 2018 एफ़आईएच वर्ल्ड के दौरान। तस्वीर साभार: हॉकी इंडिया

इन सबके बीट पिछले साल भारतीय महिला टीम की स्ट्राइकर ने नीजि ज़िंदगी में एक बड़ी लड़ाई लड़ी और वहां से निकलकर आईं।

जापान के हिरोशिमा में एफ़आईएच वर्ल्ड़ सीरीज़ फ़ाइनल्स के दौरान इस युवा खिलाड़ी ने अपने पिता को खो दिया था, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने प्रतियोगिता में टीम के साथ खेलते रहने का फ़ैसला किया। जिसके बाद उन्होंने कहा था, ‘’मैं चाहती थी कि मैं अपने पिता को गौरान्वित करूं, मैं खेलना चाहती थी और देश को क्वालिफ़ाई कराना चाहती थी।‘’

हालांकि एफ़आईएच वर्ल्ड सीरीज़ फ़ाइनल्स में लालरेमसियामी के खाते में कोई गोल नहीं गया था, लेकिन उन्होंने अमेरिका की रक्षापंक्ति को बहुत परेशान किया था जिसके बाद दूसरे खिलाड़ियों को गोल करने के मौक़े मिल गए थे।

नॉर्थ ईस्ट की स्टार हैं लालरेमसियामी

मिज़ोरम के कोलासिब के एक छोटे से गांव से आने वाली लालरेमसियामी ने पहली बार 10 साल की उम्र में हॉकी के साथ जुड़ीं थीं। लेकिन वहां पर हॉकी में ज़्यादा सहूलियत न मिल पाने की वजह से उन्होंने कोलासिब से 150 किलो मीटर दूर थेनज़ावी में जा बसीं थीं। क्योंकि मिज़ोरम में सिर्फ़ थेनवाज़ी में ही एकमात्र हॉकी इंस्टिट्यूट मौजूद था।

ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत करते हुए लालरेमसियामी ने पिछले साल कहा था, ‘’मेरे गांव में हॉकी बहुत ज़्यादा मशहूर नहीं थी, बहुत ही कम लोग इस खेल को जानते थे। लेकिन मुझे हमेशा से इस खेल के प्रति लगाव था, लिहाज़ा मैं थेनवाज़ी पहुंच गई थी।“

‘’थेनवाज़ी मेरे गांव से काफ़ी दूर था, तो मैं होस्टेल में रहा करती थी, शुरुआत में वहां बहुत अच्छी सुविधाएं नहीं थीं। वहां एस्ट्रो टर्फ़ भी नहीं था तो हम घास पर खेला करते थे।‘’

बहुत ही कम उम्र में इस खिलाड़ी ने मिज़ोरम के एक छोटे से गांव से भारतीय हॉकी टीम तक की यात्रा तय की थी। और अब लालरेमसियामी भारतीय टीम के साथ लंबी दूरी तय करना चाहती हैं, फ़िलहाल उनकी मंज़िल इसी साल होने वाले टोक्यो 2020 पर है।

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