ऑस्ट्रेलियन ओपन में खेलने के लिए सुमित नागल और अंकिता रैना की  लिएंडर पेस ने की जमकर तारीफ

ओलंपिक पदक विजेता ने सभी से आग्रह किया कि वो परिणाम को छोड़कर भारतीय टेनिस खिलाड़ियों की ऑस्ट्रेलियन ओपन तक पहुंचने का संघर्ष देखें, जिससे पता चलेगा कि उन्होंने क्या हासिल किया है।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

भले ही ऑस्ट्रेलियन ओपन (Australian Open) में भारतीय टेनिस खिलाड़ी (Indian Tennis Players) प्रभावित करने में असफल रहे हों, लेकिन लिएंडर पेस (Leander Paes) का मानना ​​है कि जिस तरह से उन्होंने COVID​​-19 की चुनौतियों से पार पाते हुए इस इवेंट में भाग लिया है, इसके लिए वो सम्मान के हक़दार हैं।

इस साल के ऑस्ट्रेलियन ओपन में भारतीय दल में सुमित नागल (Sumit Nagal) (मेंस सिंगल्स), अंकिता रैना (Ankita Raina) (वुमेंस डबल्स), दिविज शरण (Divij Sharan) (मेंस डबल्स) और रोहन बोपन्ना (Rohan Bopanna) (मेंस और मिक्स्ड डबल्स) शामिल थे, जो मेलबर्न में पहले दौर से आगे बढ़ने में असफल रहे

हालांकि लिएंडर पेस ने इस नतीजे को नज़रअंदाज़ करते हुए ये देखने की कोशिश की है कि भारतीय टेनिस खिलाड़ियों ने इस साल क्या हासिल किया।

लिएंडर पेस ने ओलंपिक चैनल बात करते हुए कहा, “बायो-बबल्स में खेलना थोड़ा मुश्किल होता है। यहां तक ​​कि अगर आप सभी सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि सभी खिलाड़ियों के परिणामों को देखते हैं, तो उतना अच्छा नहीं रहा है, जैसे COVID के पहले होता था। हम सभी को खुद को फिर से मजबूत करने के लिए एक रास्ता खोजना होगा।”

"हालांकि बबल्स में खेलना आवश्यक है लेकिन शीर्ष स्तर का प्रदर्शन करने में ये एक बाधा है। मेरा मानना ​​है कि ऑस्ट्रेलिया के अधिकांश खिलाड़ी क्वारनटाइन प्रोटोकॉल के कारण 14 दिनों तक अपने कमरे से भी बाहर नहीं निकल सकते हैं।

लिएंडर पेस ने युवा सुमित नागल और अंकिता रैना की जमकर तारीफ की, दोनों ने इस संस्करण में ऑस्ट्रेलियन ओपन डेब्यू किया था।

लिएंडर ने कहा, "अंकिता रैना और सुमित नागल ने ऑस्ट्रेलियन ओपन के मुख्य ड्रॉ में खेलकर सालों की लगन और प्रतिबद्धता को दर्शाया है।"

ये अंकिता रैना की पहली ग्रैंड स्लैम भी थी।

अंकिता का अनुभव कैसा रहा होगा, ये बताने की कोशिश करते हुए लिएंडर पेस ने एक जूनियर खिलाड़ी के रूप में 1989 के ऑस्ट्रेलियन ओपन के अपने पहले अनुभव को साझा किया।

उन्होंने कहा “एक 15 साल के किशोर के रूप में ऑस्ट्रेलियाई ओपन में जाना और खेलना बेहद कठिन था। वेस्टर्न टेनिस एथलीट काफी बड़े और लंबी कद-काठी के होते हैं।”

“अंकिता रैना भारत के लिहाज से एक शानदार और कड़ी मेहनत करने वाली एथलीट हैं, वहाँ जाकर वो नेट पर सेरेना विलियम्स (Serena Williams) या गार्बिन मुगुरुज़ा (Garbiñe Muguruza) जैसी किसी दिग्गज को देखती हैं, जिनके पास एक जबरदस्त सपोर्ट प्रणाली है। ये चीजें उन्हें आने वाले समय में मदद कर सकती हैं।

उन्होंने ये भी बताया कि खुद को ऑस्ट्रेलियन ओपन से बाहर रखने का विकल्प क्यों चुना, लिएंडर पेस ने खुलासा किया, “मैंने COVID-19 की वजह से कई करीबी पारिवारिक मित्रों को खो दिया। ये हम में से कई के लिए अपने घर जैसा है। इसी वजह से मैंने ऑस्ट्रेलिया नहीं जाने का फैसला किया। ये एक बहुत ही कठिन फैसला था।”

1996 के अटलांटा ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता ने हर भारतीय टेनिस खिलाड़ी को सुझाव दिए, जो इन परीक्षण समय में अपने करियर को आगे बढ़ाने के लिए चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

उन्होंने आखिर मे कहा, “दुनिया घूमने और टेनिस खेलने में जो लागत लगती है, वो बहुत अधिक है। इसलिए, मैं इन सभी खिलाड़ियों का बहुत सम्मान करता हूं। वो बाहर जा रहे हैं और चुनौतियों से लड़ रहे हैं।”