लिएंडर पेस ने अटलांटा ओलंपिक को बताया सबसे ख़ास पल

भारतीय टेनिस स्टार ने ओलंपिक चैनल के 'ओलंपिक के ख़ास पल’ सीरीज़ में अपने अटलांटा 1996 के कांस्य पदक के मैच को फिर से याद किया।

लिएंडर पेस (Leander Paes) पिछले तीन दशकों से भारतीय खेल के कुछ ऐतिहासिक ऊंचाइयों तक पहुंचने में कामयाब रहे हैं, लेकिन भारतीय टेनिस खिलाड़ी 1996 ओलंपिक के कांस्य पदक जीत को अपने शानदार करियर का निर्णायक पल मानते हैं।

उस साल 3 अगस्त को लिएंडर पेस ने पुरुषों के सिंगल्स ब्रॉन्ज मेडल मैच में ब्राजील के फ़र्नांडो मेलिगैनी (Fernando Meligeni) को हराकर इतिहास रच दिया। ये भारत का टेनिस में पहला ओलंपिक पदक था और 44 वर्षों के बाद पहला व्यक्तिगत पदक था।

ये जीत इसलिए भी खास थी, क्योंकि लिएंडर पेस कलाई की चोट से जूझते हुए, आंद्रे अगासी (Andre Agassi) के खिलाफ सेमीफाइनल मैच में निरंतर संघर्ष कर रहे थे, जिससे भारतीय खेलों की ‘हॉल ऑफ फेम’ में उनकी जगह बन गई।

भारत के कांस्य पदक विजेता लिएंडर पेस, स्पेन के रजत पदक विजेता सर्गी ब्रुगेरा और 1996 अटलांटा गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता आंद्रे अगासी पोडियम पर एक साथ
भारत के कांस्य पदक विजेता लिएंडर पेस, स्पेन के रजत पदक विजेता सर्गी ब्रुगेरा और 1996 अटलांटा गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता आंद्रे अगासी पोडियम पर एक साथभारत के कांस्य पदक विजेता लिएंडर पेस, स्पेन के रजत पदक विजेता सर्गी ब्रुगेरा और 1996 अटलांटा गेम्स के स्वर्ण पदक विजेता आंद्रे अगासी पोडियम पर एक साथ

लिएंडर पेस ने एपिसोड के दौरान कहा, “उस प्रतियोगिता ने मुझे परिभाषित किया। जब मैं अपनी कलाई की चोट के साथ उस दिन मैच के लिए गया था, तो मुझे पहले से ही पता था कि ये मैच में मेरे करियर को परिभाषित करेगा।”

“ये सब ध्यान केंद्रित करने और कहने की बात थी। वहां अच्छा टेनिस नहीं खेला गया, लेकिन मैं उस मुक़ाबले में अपना पूरा योगदान देना चाहता था।

पेस ने कहा, "मैं शारीरिक और मानसिक रूप से इस मैच को बेहतर ढंग से खेलना चाहता था क्योंकि मैं जानता था कि मेरी कलाई मुझे मुश्किल शॉट नहीं खेलने देगी।” उस मुक़ाबले में वो पहला सेट हारने के बाद 3-6, 6-2, 6-4 से मैच जीतने में कामयाब रहे थे।

लिएंडर पेस ओलंपिक चैनल के ‘ओलंपिक के ख़ास पल** सीरीज पर एक सत्र के दौरान बोल रहे थे, जहां दुनिया भर के चैंपियन एथलीट अपनी ओलंपिक सफर के सर्वश्रेष्ठ पलों को याद कर रहे हैं।

करियर का सबसे ख़ास पल

24 साल बाद भी उनके लिए उस पदक का मतलब बताते हुए लिएंडर पेस ने कहा, "मैंने जो 30 साल टेनिस

खेला, उसमें ओलंपिक पदक जीतना मेरे करियर का सबसे महत्वपूर्ण पल था।"

उन्होंने कहा, 'हर इंसान को ओलंपिक चैंपियन बनने का मौका नहीं मिलता, ना ही अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलता है, ऐसा करने वाले कुछ ही लोग होते हैं। इसलिए ओलंपिक का इतना महत्व होता है।

47 वर्षीय पेस ने कहा, “मेरी जीत सिर्फ मेरी या मेरे परिवार के लिए नहीं थी, ये उस ग्रह के हर बच्चे से संबंधित थी, जिसके पास चैंपियन बनने का सपना है। अगर मैं एक ओलंपिक चैंपियन बन सकता हूं, तो आप भी बन सकते हैं।”

18 बार के ग्रैंड स्लैम विजेता पेस का मानना है कि उन्हें अपने सपने से कहीं ज्यादा उस ऐतिहासिक दिन का एहसास हुआ। देखा जाए तो, ये कुछ अच्छा होने का संकेत था।

"हर इंसान एक उद्देश्य के साथ इस दुनिया में आता है और मेरा मानना है कि मेरा उद्देश्य लोगों, युवाओं को दिखाना था, कि अगर आप बड़े सपने देखते हैं और अपने सपनों के लिए कुछ भी कर सकते हैं, कड़ी मेहनत करते हैं और अपने आप पर विश्वास करते हैं, तो आप एक चैंपियन बन सकते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां से आते हैं।”

कैसे देखें ‘ओलंपिक के ख़ास पल’

दुनिया भर के खेल प्रेमी ओलंपिक चैनल की वेबसाइट, उसके मोबाइल ऐप और अमेज़न फायर टीवी, एंड्रॉइड टीवी, ऐप्पल टीवी और रोकू प्लेटफॉर्म पर ‘ओलंपिक के खास पलों’ के एपिसोड को देख सकते हैं।

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