लिएंडर पेस को उम्मीद है कि उनकी बेटी ओलंपिक पदक जीतकर परिवार में हैट्रिक लगाएगी

जिस तरह लिएंडर पेस के पिता ने उन्हें ओलंपिक में पदक जीतने के लिए प्रेरित किया, अब वो भी अपनी बेटी अयाना के लिए भी कुछ ऐसा ही करने की उम्मीद कर रहे हैं।

कोलकाता में पेस के घर पर दो ओलंपिक पदक एक साथ रखे हुए हैं। लिएंडर पेस (Leander Paes) को उम्मीद है कि बेटी अयाना ओलंपिक में 'पारिवारिक परंपरा' को इसी तरह जारी रखने में कामयाब होंगी और एक और लगाएंगी परिवार में ओलंपिक मेडल की हैट्रिक।

1972 के म्यूनिख ओलंपिक में लिएंडर पेस के पिता वीस पेस (Vece Paes) को भारतीय हॉकी टीम के साथ कांस्य पदक जीतने का मौका मिला था, तो वहीं लिएंडर पेस अटलांटा 1996 में स्वतंत्र भारत के पहले व्यक्तिगत ओलंपिक पदक विजेता बने थे।

अगली पीढ़ी से भी उम्मीद

लिएंडर पेस मानते हैं कि पदक जीतने के बाद उनके पिता ने अपने साथ डाइनिंग टेबल पर उन्हें स्थान दिया था। ओलंपिक चैनल के साथ इंस्टाग्राम लाइव के दौरान भारतीय टेनिस दिग्गज ने चुटकी लेते हुए कहा, "पदक से पहले उन्होंने मुझे वो जगह नहीं दी थी।"

वर्तमान में कोरोना वायरस ( COVID-19) लॉकडाउन के कारण मुंबई के अपने अपार्टमेंट में फंसे होने की वजह से लिएंडर पेस अपने पिता की देखभाल कर रहे हैं, जो पार्किंसन्स से जूझ रहे हैं, और अपनी बेटी अयाना के साथ समय बिता रहे हैं।

लॉकडाउन ने सात बार के ओलंपियन को बहुत जरूरी ब्रेक दिया है और उनका कहना है कि इसकी वजह से वो अपनी बेटी में पेस परिवार के खेल मूल्यों को स्थापित करने में सफल हो रहे हैं।

"मैं उसे पारिवारिक विरासत की बारीकियों को सिखा रहा हूं, जो शारीरिक फिटनेस, खुशी और मानसिक फिटनेस है।"

इस युवा खिलाड़ी ने पहले ही लिएंडर पेस को अपनी महत्वाकांक्षाओं के बारे में बता दिया है। पेस ने कहा कि, "वो खुद एक ओलंपिक चैंपियन बनना चाहती हैं और जब मैं तीसरी पीढ़ी के ओलंपिक पदक विजेता के बारे में सोचता हूं तो मुझे बहुत खुशी मिलती है। मैं उसके (सपने) को पूरा करने की कोशिश करुंगा।”

निश्चित रूप से उसके पास दो सबसे अच्छे रोल मॉडल हैं जिनमें से वो किसी से भी अपने सपने को पूरा करने के लिए मदद ले सकती है।

लिएंडर पेस ने हंसते हुए कहा, “अगर मेरी बेटी पदक जीत लेती है या अपने पिता और दादा से आगे निकल जाती है और रजत हासिल करती है तो ये वाकई शानदार होगा। वो तब डाइनिंग टेबल पर बैठ सकती है।”

खेल लिएंडर पेस के घराने का जीवन रहा है

खेल हमेशा से ही पेस घराने की रगों में ख़ून की तरह दौड़ रहा है- भारतीय टेनिस दिग्गज की मां जेनिफ़र भी एक शीर्ष स्तरीय एथलीट थीं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारतीय महिला बास्केटबॉल टीम की कप्तानी की थी।

46 साल के इस दिग्गज टेनिस खिलाड़ी ने अंत में कहा कि, "भारतीय समुदाय के इस तरह के एक परिवार से होने के नाते आप एक ओलंपिक एथलीट होने की ज़िम्मेदारी सीखते हैं, 1.3 बिलियन लोगों के लिए खेलने की ज़िम्मेदारी का एहसास होता है।"

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