लिएंडर पेस: वह चिराग जिसने ओलंपिक में भारत के मेडल के सूखे को किया खत्म 

लेखक जतिन ऋषि राज ·

अटलांटा ओलंपिक 1996, यू.एस.ए, भारतीय खेल के लिए मुश्किल दौर साबित हो रहा था। इससे पिछले 16 सालों में कोई भी भारतीय खिलाड़ी ओलंपिक मेडल जीतने में असफल रहा और इस साल भी यह सिलसिला ऐसे ही आगे बढ़ रहा था। भारत के लिए आख़िरी ओलंपिक मेडल 1980 मास्को में चल रही प्रतियोगिता में आया और यह वी.भास्करन की अगुवाई के दौरान भारतीय हॉकी टीम के नाम रहा।

अटलांटा ओलंपिक 1996 में एक तरफ भारत मेडल के लिए जूझ रहा था और वहीं दूसरी तरफ लिएंडर पेस को कुछ और ही मंज़ूर था। पेस के बेहतरीन प्रदर्शन ने भारत को ब्रॉन्ज़ मेडल से सम्मानित किया और वह साल बन गया इस टेनिस प्लेयर के लिए सबसे ख़ास। यह जीत इसलिए भी ख़ास थी क्योंकि यह व्यक्तिगत खेलों में भारत के लिए दूसरी बार मेडल ला, इससे पहले रेसलर खाशाबा दादासाहेब जाधव ने व्यक्तिगत खेलों में भारत की झोली में मेडल डाला था।

कोर्ट का किंग

1996 अटलांटा गेम्स में पेस एक वाइल्डकार्ड प्लयेर के रूप में हिस्सा लेते नज़र आए। अपने पहले राउंड में पेस की भिडंत लोकल फेवरेट रिची रेनेबर्ग से हुई।हालांकि 6-7, 7-6 से मैच टाई पर चल रहा था लेकिन चोट लगने के कारण रिची को खेल बीच में छोड़ना पड़ा और इस तरह से पेस को 1996 अटलांटा ओलंपिक में पहली जीत हासिल हुई।

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पेस का आगे का सफ़र मानों तेज़ी से चला और इस 22 वर्षीय भारतीय स्टार ने सेमीफाइनल में अपनी जगह बना ली। हर खेल प्रेमी के लिए यह सफ़र यादगार बना और पेस के खेल करियर में एक नया अध्याय खुल गया।

पेस का अगला मैच अमरीकी स्टार आंद्रे अगासी के साथ था। उस समय अगासी टेनिस की दुनिया के सबसे बड़े सितारों में से एक थे जो कि तकनीक और टेम्परामेंट के धनी थे। हालांकि कोई जानता नहीं था कि भारत के लिएंडर पेस आंद्रे को बेहद कड़ी टक्कर दे पाएंगे और जीत की राह उनके लिए मुश्किल कर पाएंगे। पेस यह मैच हार तो गए लेकिन अपने दमदार प्रदर्शन की वजह से सभी के दिलों में जगह बनाने में सफल रहे। इस मैच का फाइनल स्कोर आंद्रे के हक मे 6-7, 3-6 से गया। ं

अब बारी थी ब्रॉन्ज़ पर कब्ज़ा करने की और अपना आख़िरी मैच खेलते हुए पेस ने फर्नांडो मेलिगेनी 3–6, 6–2, 6–4 से पटकनी देते हुए मुकाबले को अपने नाम किया। इस बेहद दिलचस्प मुकाबले ने भारत को ब्रॉन्ज़ और एक नया उभरता सितारा दे दिया। वह सितारा जिसने भारत में टेनिस खेल को एक नया आयाम देने का काम किया।

जब भारतीय सरज़मीं पर उतरा सितारा

लिएंडर पेस ने अटलांटा की ज़मीन पर भारत का नाम रोशन किया और भारत ने भी उनके स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी। इनकी इस उपलब्धि पर उन्हें राजीव गांधी खेल रत्न से नवाज़ा गया। ओलंपिक 1996 के तर्जुर्बे ने मानों पेस को एक नया हौसला दे दिया जिसने उनके खेल करियर को आगे बढ़ाने में मदद की। आज पेस की गिनती विश्व के बड़े टेनिस खिलाड़ियों के साथ की जाती है। उनका परिवार भी भारतीय खेल संस्कृति से वाकिफ था जिसके चलते खेल के शौकीन रह चुके पेस के पिता 1972 ओलंपिक खेलों में हॉकी खेलते हुए भारत का नाम रोशन किया और उनकी मां ने लंबे अरसे तक बास्केटबॉल खेलते हुए भारत के गौरव को ऊंचा रखा।ने