मेलबर्न में क्वॉरन्टाइन नियमों के लिए अंकिता रैना पहले से थीं तैयार 

पिछले साल की यात्रा, खेल प्रतिस्पर्धा में भाग लेने और बायो-बबल में रहने से रैना हो गई इसकी आदत      

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

रैना उन 12 'लकी लूजर' में शामिल हैं, जो सीजन के पहले ग्रैंड स्लैम की प्रतीक्षा सूची में हैं। 

तीन फ्लाइटों में प्रतिभागियों के सह-यात्रियां कोरोना टेस्ट पॉजीटिव आने के बाद ऑस्ट्रेलियाई ओपन के आयोजकों ने कोविड-19 क्वारैंटाइन प्रोटोकॉल को कड़ाई से लागू कर दिया है।

72 खिलाड़ियों को 14 दिनों के लिए पूर्ण आइशोलेशन में रखा गया है, जबकि बाकी को दिन में पांच घंटे ही प्रशिक्षण के लिए बाहर जाने की अनुमति दी गई है।

भारत की अंकिता रैना भाग्यशाली हैं, क्योंकि उन्हें दूसरी श्रेणी में रखा गया है। वो वर्तमान में ग्रैंड स्लैम महिला एकल मुख्य ड्रॉ में देश की तीसरी खिलाड़ी बनने का इंतजार कर रही हैं। वह 12 'लकी लूजर' (पुरुष और महिला) में से एक हैं, जो ऑस्ट्रेलियाई ओपन के मुख्य आयोजन में स्थान पक्का करने की उम्मीद लगाये बैठे हैं। 

अंतिम क्वालीफाइंग राउंड में बाहर होने वाले खिलाड़ियों को लकी लूजर समूह में रखा जाता है और बाद में उनकी रैंकिंग के आधार पर मुख्य ड्रॉ से बाहर निकलने वालों की जगह को भरने के लिए शामिल किया जाता है। 

एकल में 180वें स्थान पर काबिज रैना को 4 फरवरी को ड्रॉ से पहले अपनी किस्मत का पता लग जाएगा। वह महिला वर्ग में छह 'लकी लूजर' की सूची में अंतिम स्थान पर हैं। 

अंकिता ने ईएसपीएन से कहा, "मेरे साथ ट्रैवलिंग कोच (हेमंत बेंद्रे अकादमी से) हैं। हमने 14-दिन के क्वॉरन्टाइन अवधि को ध्यान में रखते हुए रेडीमेड इंडियन फूड पैक किया और मानसिक रूप से जब हम दुबई के लिए रवाना हुए, तो हम मेलबर्न में रहने के लिए तैयार थे।"  

जबकि अन्य खिलाड़ियों ने सख्त नियम-कायदे, भोजन और अन्य सुविधाओं की शिकायत की, लेकिन रैना को इनसे कोई परेशानी नहीं थी। 

"मुझे अभी तक भोजन को लेकर कोई परेशानी नहीं है। पिछले साल से यात्रा करने, प्रतिस्पर्धा करने और बायो-बबल में रहने की शायद मुझे आदत हो गई है। मैंने 40 बार से ज्यादा अपना टेस्ट कराया, यहां तक की दुबई में पिछले हफ्ते अपने जन्मदिन पर भी।"

मैच में हारने के बाद अंकिता रैना

उसे लगता है कि प्रतिस्पर्धी कार्रवाई से लंबे समय के विराम के बाद मुकाबले में वापसी करना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए उसने फ्रेंच ओपन क्वालीफाइंग में बाहर होने के बाद पेरिस में WTA मनोवैज्ञानिक कैरोलिन ज़दीना से परामर्श लेने का फैसला किया। 

"मैदान में उतरने में मुझे समय लग रहा था। कैरोलीन के साथ काम करना मेरे लिए मददगार रहा है, क्योंकि महामारी के बाद दौरे पर फिर से खेलने की शुरूआत करना मुश्किल था। लॉकडाउन के दौरान पुणे में मनोवैज्ञानिक देबाश्री मराठे से मुलाकात भी तब बहुत मददगार साबित हुई थी। क्योंकि उस वक्त न तो हम अभ्यास कर सकते थे और न ही बाहर प्रशिक्षण लेने के लिए जा सकते थे।" 

मारिया शारापोवा और सेरेना विलियम्स के बीच 2004 विंबलडन ग्रैंड स्लैम फाइनल उनकी स्मृति में बना हुआ है। इसमें रूसी खिलाड़ी ने सीधे सेटों (6-1, 6-4) में ग्रैंड स्लैम विजेता को मात दी। हालांकि, उन्हें विलियम्स बहनों को जीत दर्ज करते हुए देखना पसंद है।

उन्होंने कहा, "सेरेना और वीनस के बीच मैच हमेशा से मेरा पसंदीदा रहा है। सानिया (मिर्जा) को भी सेरेना की तरह खेलते हुए देखना अच्छा लगता था।"  

उन्होंने कहा, "14 साल की उम्र में मैंने पहली बार उन्हें ऑस्ट्रेलियन ओपन में देखा था। मैं तब मेलबर्न में एशियाई मास्टर्स के लिए आई हुई थी।"