‘मैंने अपने हीरो को खो दिया’: सौरव गांगुली ने भी डिएगो माराडोना को दी श्रद्धांजलि

60 साल की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से माराडोना की मृत्यु हो गई, उन्होंने अपने शानदार खेल से कई लोगों को फुटबॉल से प्यार करना सीखा दिया।

लेखक विवेक कुमार सिंह ·

फुटबॉल के दिग्गज डिएगो माराडोना (Diego Maradona) का बुधवार रात अर्जेंटीना में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वो 60 वर्ष के थे।

भारत के कई खिलाड़ियों ने अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी को श्रद्धांजलि अर्पित की। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने कहा कि उन्होंने अपने हीरो को खो दिया है।

माराडोना ने 2017 में एक चैरिटी फुटबॉल मैच के लिए गांगुली के शहर कोलकाता का दौरा किया था, जहां फुटबॉल का क्रेज बहुत है। वहां उनका भव्य तरीके से स्वागत किया गया था, यहां तक कि शहर में माराडोना की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया।

गोवा में इसी तरह की श्रद्धांजलि की योजना बनाई गई है। ये भी उन राज्यों में आता है, जहां लोग फुटबॉल से बहुत प्यार करते हैं। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि युवाओं को प्रेरित करने के लिए कैंडोलिम या कैलंगुट समुद्र तटों में से किसी एक पर माराडोना की एक प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

डिएगो माराडोना ने 2012 में भारत का दौरा किया था, तब वो एक आभूषण की दुकान के अनावरण के लिए केरल आए थे। माराडोना का एक हाथ से तैयार स्केच अभी भी उस होटल की दीवारों को पर है, जहां वो ठहरे थे।

दिसंबर 2008 में, माराडोना ने कोलकाता का दौरा किया था, जहां हवाई अड्डे पर उनका स्वागत 15,000 फैंस ने की थी। इसके बाद उन्होंने मोहन बागान मैदान का दौरा किया जहां उन्होंने फैंस के मनोरंजन के लिए कुछ फुटबॉल ट्रिक्स दिखाएं और कुछ युवा फुटबॉल खिलाड़ियों से मुलाकात की।

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा भले ही माराडोना के शानदार प्रदर्शनों को नहीं देखा हो, लेकिन बाद में उन्होंने माराडोना की प्रतिभा देखी।

भारतीय ओलंपिक निशानेबाज जॉयदीप कर्माकर और भारतीय हॉकी खिलाड़ी देविन्दर वाल्मीकि भी डिएगो माराडोना के बड़े फैन थे

महानतम फुटबॉल खिलाड़ियों में से एक माराडोना ने 1986 के फीफा विश्व कप में अर्जेंटीना को लगभग अकेले ही दम पर जीत दिलाई थी और अपनी टीम को 1990 में फाइनल में भी पहुंचाया, जहां वे वेस्ट जर्मनी से हार गए थे।

माराडोना के सबसे यादगार प्रदर्शनों में से एक 1986 फीफा विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ आया था, जहां माराडोना ने पांच मिनट के अंतराल में दो गोल किए थे।

पहला प्रसिद्ध हैंड ऑफ गॉड गोल था - जहां मैराडोना ने एक हेडर लगाने के लिए ऊंची छलांग लगाई और जब वो ऐसा करने में असमर्थ रहे, तो गेंद को अपने बाहरी हाथ से गोल में मारकर अर्जेंटीना को बढ़त दिला दी।

पांच मिनट बाद, माराडोना ने वो गोल कर दिया, जो फीफा के 'गोल ऑफ द सेंचुरी' के रूप में नॉमिनेट हुआ। उन्होंने अपने हाफ में पोजीशन लिया और गेंद को अपने कब्जे में किया फिर दो इंग्लिश मिडफील्डर्स को चकमा देकर गोलकीपर को भी चकमा दिया और गोल कर दिया।

डिएगो माराडोना ने 1986-86 और 1989-90 में दो सिरी-ए खिताब के साथ इटली के क्लब नापोली को भी अपने इतिहास में खिताबी जीत दिलाई थी।