भारत के अग्रणी स्कीट शूटर मेराज खान को पहले पुरस्कार के रूप में मिले थे 30 रुपये

ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतकर मेराज खान रचना चाहते हैं इतिहास 

लेखक भारत शर्मा ·

मेराज खान ने शूटिंग में जीती पहली पुरस्कार राशि क्रिकेट का बैट खरीदने पर खर्च की थी। उन्हें सबसे पहले क्रिकेट से ही लगाव था, लेकिन बाद में शूटिंग ने उनकी किस्मत बदल दी।

खान सितंबर 2015 में स्कीट शूटिंग में क्वालीफाई कर रियो ओलंपिक में स्थान पक्का करने वाले पहले भारतीय बने।

भारत में स्कीट शूटिंग के पथ प्रदर्शक 45 वर्षीय इस खिलाड़ी की खेल यात्रा एक सुखद घटना के साथ शुरू हुई। 12 वर्ष की उम्र में उत्तर प्रदेश स्टेट राइफल प्रतियोगिता के जूनियर वर्ग में तीसरे स्थान पर रहे खान को पुरस्कार के रूप में मात्र 30 रुपये दिए गए। मेराज इसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं क्योंकि उन्होंने बिना किसी प्रशिक्षण के पोडियम फिनिश हासिल किया।

खान ने ओलंपिक चैनल से कहा, "केवल 12 साल की उम्र में पहली बार मैंने उत्तर प्रदेश राज्य राइफल प्रतियोगिता (जूनियर श्रेणी) में भाग लिया था। इसमें मैंने तीसरा स्थान हासिल किया। मुझे मात्र 30 रूपए नकद पुरस्कार मिला, जो कि उस समय बिना किसी प्रशिक्षण के मेरे लिए यह बड़ी उपलब्धि थी। इसलिए 30 रूपए मेरे लिए बहुत मायने रखते थे।"

स्कीट निशानेबाज मेराज खान

उन्होंने कहा, "इनाम पाकर मैं खुशी से दौड़ता हुआ एक क्रिकेट बैट खरीदने चला गया। क्योंकि मैं हमेशा से क्रिकेट में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए भारतीय ध्वज वाली पोशाक पहनना चाहता था। यह सपना तब ही पूरा हो सकता था जब मैं क्रिकेट खेलूंगा, लेकिन मुझे पता नहीं था कि यह सपना शूटिंग के जरिए पूरा होगा।"

खान ने नवंबर 2019 में दोहा में एशियाई चैम्पियनशिप में अपने हमवतन अंगद बाजवा को 1-2 से हराते हुए टोक्यो ओलंपिक के लिए अपना स्थान पक्का किया। यह उनकी चार साल में होने वाले आयोजन में दूसरी उपस्थिति होगी, लेकिन ओलंपिक में भारतीय तिरंगा ऊंचा उठाने का सपना सच होना अभी बाकी है।

उन्होंने कहा, "मेरा असली लक्ष्य स्कीट शूटिंग में इतिहास रचते हुए देश को सर्वोच्च पदक दिलाना है और भारत के लिए मेरे सपने को सच करेगा। इसके साथ ही लोग मेरे माध्यम से इस खेल को भी जान सकेंगे, क्योंकि अब तक यह उतना लोकप्रिय नहीं है जितना इसे लोगों के बीच होना चाहिए।"