एमसी मैरीकॉम ने नहीं छोड़ी ओलंपिक क्वालिफायर के लिए कोई कसर

अगले महीने मुक्केबाज़ी क्वालिफायर से पहले एमसी मैरीकॉम और नई मुक्केबाज़ साक्षी चौधरी योजनाबद्ध तरीके से तैयारी कर रही हैं।

2020 ओलंपिक के लिए एशिया मुक्केबाज़ी क्वालिफायर के लिए महज़ एक महीने से भी कम समय शेष रह गया है। ऐसे में तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। जॉर्डन में होने वाले इस इवेंट में भारतीय महिला मुक्केबाज़ मैरी कॉम (पद्म भूषण से सम्मानित होने वाली पहली महिला खिलाड़ी) और युवा मुक्केबाज़ साक्षी चौधरी (Sakshi Chaudhary) हिस्सा लेंगी।

51 किग्रा वर्ग में पांचवें स्थान पर रहीं मैरीकॉम (Mary Kom) ने एशियन क्वालिफायर में जगह बनाने के लिए निकहत ज़रीन (Nikhat Zareen) के खिलाफ बीएफआई ट्रायल बाउट में जीत हासिल की, जबकि युवा साक्षी चौधरी ने 57 किग्रा वर्ग में सोनिया लाथेर को हराया।

"मैं अच्छी हूं लेकिन मैं और भी बेहतर करना चाहती हूं"

ओलंपिक कांस्य पदक और आठ वर्ल्ड एमेच्योर मुक्केबाज़ी चैंपियनशिप के साथ मैरीकॉम भारत की सबसे कुशल महिला मुक्केबाज़ हैं।

मैरीकॉम ने लंदन में 2012 ओलंपिक में ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता था लेकिन रियो ओलंपिक के लिए वह क्वालिफाई नहीं कर पाईं। अब वह न केवल रियो की निराशा को पीछे छोड़ने की इच्छा अपने मन में रख रही हैं बल्कि टोक्यो 2020 में मेडल हासिल करने के इरादे से तैयारी कर रही हैं।

बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया से बात करते हुए 36 वर्षीय मुक्केबाज़ ने कहा कि वह बॉक्सिंग क्वालीफायर के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं।

उन्होंने कहा, “मेरी तैयारी बहुत अच्छी चल रही है। मैं अपनी कमजोरियों पर अधिक काम कर रही हूं - धीरज, गति और निश्चित रूप से कई अन्य कौशल हैं जिन्हें मुझे (अभी भी) सुधारना है।” अंत में उन्होंने अपनी बात को खत्म करते हुए संक्षेप में कहा, “हां, मैं अच्छी हूं, लेकिन मैं और भी बेहतर करना चाहती हूं।”

साक्षी चौधरी ने भी अपनी कमियों में किया सुधार

इस बीच दूसरे छोर पर तैयारी और अनुभव हासिल करने में साक्षी चौधरी भी व्यस्त हैं। मुक्केबाज़ी क्वालिफायर के लिए क्वालिफाई करने के बाद से नई दिल्ली की यह उभरती हुई युवा मुक्केबाज़ अब जुलाई 2020 में होने वाले ओलंपिक खेलों को ध्यान में रखते हुए तैयारी कर रही हैं।

साक्षी चौधरी ने बीएफआई से बात करते हुए कहा, "हमारी ट्रेनिंग बहुत अच्छी चल रही है। पहले हम में से 50 एक समूह के रूप में प्रशिक्षण लेते थे, अब हम में से केवल पांच हैं। हम सभी को अलग से प्रशिक्षित किया जाता है।”

इस दृष्टिकोण ने सभी को व्यक्तिगत तौर पर अपने खेल में सुधार करने में मदद की है। उन्होंने कहा, “अब प्रत्येक कोच हमारी गलतियों को बताता है। छोटे समूह में हमारे अंदर जो सुधार आता है, वह हमें समग्र रूप से खुद को बेहतर बनाने में मदद करता है। हम अब शीर्ष स्तर पर हैं और ओलंपिक के लिए क्वालिफाई करने के प्रयास में अपना सर्वश्रेष्ठ दे रहे हैं।"

ओलंपिक क्वालिफायर में भारतीय मुक्केबाज़ों के लिए आगे क्या है?

एशिया/महासागरीय मुक्केबाज़ी क्वालिफायर जो मूल रूप से चीन के वुहान में आयोजित होने वाला था, जिसे कोरोनो वायरस के प्रकोप के बाद 3 से 11 मार्च तक जॉर्डन के अम्मान में आयोजित किए जाएंगे।

जो लोग एशिया/महासागरीय मुक्केबाज़ी क्वालिफायर में क्वालिफाई करने में विफल रहते हैं, उन्हें 13-20 मई तक पेरिस में होने वाले विश्व मुक्केबाज़ी क्वालिफायर में अपने 2020 ओलंपिक टिकट को हासिल करने का एक और मौका मिलेगा। बॉक्सिंग से जुड़ी हर एक ख़बर को जानने के लिए आप सभी ओलंपिक चैनल से जुड़े रहें।

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