जानिए विश्व युवा मुक्केबाजी चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करने वाली मुक्केबाज अल्फिया खान के बारे में रोचक तथ्य 

ट्रायल से पहले मुक्केबाजी महासंघ द्वारा शीर्ष खिलाड़ियों के लिए फरवरी में एक शिविर आयोजित करने की संभावना 

लेखक दिनेश चंद शर्मा ·

देश में बॉक्सिंग टैलेंट पूल की प्रगति जारी है, क्योंकि युवा भारतीय मुक्केबाज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। यह हमेशा से ही एक ऐसा खेल रहा है जिसमें भारत ने एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों सहित अन्य अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धाओं में ख्याति और पदक हासिल किए हैं। महिला मुक्केबाजी में भारत की मैरी कॉम ने लंदन 2012 में कांस्य भी जीता है।

देश में बहुत सी आगामी मुक्केबाजी प्रतिभाएं हैं, जो देश का भविष्य होंगी। नवोदित भारतीय मुक्केबाजी सनसनी नागपुर निवासी अल्फिया खान इसे बड़ा बनाने की उम्मीद कर रही हैं।

कौन है अल्फिया खान?

17 वर्षीय खान, ने +81 किग्रा वर्ग में खेलो इंडिया रैंकिंग स्पर्धा के माध्यम से विश्व युवा मुक्केबाजी चैंपियनशिप ट्रायल के लिए क्वालीफाई किया है। इस प्रक्रिया के तहत ट्रायल के लिए क्वालीफाई करने वाली वो महाराष्ट्र से एकमात्र लड़की हैं। 

 भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BAI) की ओर से रोहतक के नेशनल बॉक्सिंग अकादमी (NBA) में विश्व स्तर पर युवा प्रतिभाओं की खोज करने के लिए रैंकिंग प्रतियोगिता आयोजित की थी। 

खान, ने इस प्रतियोगिता में अपने भार वर्ग से ज्यादा में मुक्केबाजी की। उन्होंने दूसरे राउंड के पहले मिनट में ही पंजाब की जोरा सिंह को पछाडा और सेमीफाइनल में असम की सानिका बोरो को 40 सेकंड में हराया।

उनके कोच गणेश पुरोहित का मानना है कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने उन्नत कौशल सीखने पर जो काम किया, इसका उन्हें फायदा मिला था।

पुरोहित ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “लॉकडाउन के दौरान हमने कुछ आधुनिक कौशल पर काम किया। यह प्रदर्शन उनके नए विकसित कौशल और परिपक्वता की झलक है।" 

14 वर्ष की उम्र में शुरू की मुक्केबाजी

पुलिस कांस्टेबल की बेटी अल्फिया ने 2017 में केवल 14 साल की उग्र में मुक्केबाजी शुरू कर दी थी। उनके भाई भी एक मुक्केबाज है, लेकिन अल्फिया अपने परिवार में पहली है जिसने खेल को करियर के रूप में चुना। 

उन्होंने अमनप्रीत कौर और गणेश पुरोहित के साथ रोहतक में खेलो इंडिया-साई नेशनल बॉक्सिंग अकादमी में प्रशिक्षण लिया है।

पदक जीतने के बाद भारतीय मुक्केबाज अल्फिया खान

नागपुर से पहली अंतर्राष्ट्रीय मुक्केबाज

अल्फिया खान को घरेलू स्तर पर सफलता जल्द मिली। जूनियर बॉक्सर के रूप में उनका पहला साल सफल रहा। उन्होंने भारतीय महिला स्कूल नेशनल गेम्स और महिला जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में पदक जीते।

2018 में खेलो इंडिया स्पॉन्सरशिप पाने वाली वह नागपुर की पहली खिलाड़ी बन गई।

घरेलू स्तर पर मिली सफलता के कारण उन्हें सर्बिया में 2018 में होने वाले दूसरे नेशंस कप इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैम्पियनशिप के लिए भारतीय जूनियर टीम में शामिल किया गया था। इस तरह से वो एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए भारत की ओर से चुनी जाने वाली नागपुर की पहली बॉक्सर बन गई।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता

खान पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय मंच पर अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं। 2018 में अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रजत पदक के रूप में मिली सफलता के कारण उन्हें विदेशों में खेलने वाली प्रतिभा के रूप में चुना गया।

2019 में उन्होंने सर्बिया के वरबस में तीसरे नेशनल कप इंटरनेशनल बॉक्सिंग चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीता था। खान 80+ किलोग्राम वर्ग में रूसी मुक्केबाज वोरोंत्सोवा वेलेरिया से हारने के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच गईं।

जूनियर एशियन चैंपियन

कुछ हफ्तों बाद उन्होंने 80+ किग्रा वर्ग में एशियाई जूनियर चैंपियन का खिताब हासिल किया। यूएई के फुजैराह में आयोजित पहली एशियन जूनियर चैंपियनशिप में खान ने कजाखस्तान की मगाउयेव दैना को हराकर स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही उन्होंने दो स्वर्ण, दो सिल्वर और राष्ट्रीय टूर्नामेंट में कांस्य पदक अपने नाम किए हैं।

खतरनाक मुक्केबाज के रूप में मिली ख्याति

2019 में महाराष्ट्र स्टेट मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में प्रतिद्वंदियों को पछाड़कर उन्होंने एशियाई सफलता हासिल कर खतरनाक मुक्केबाज के रूप में पहचान बनाई। उन्होंने 80+ श्रेणी में प्री-क्वार्टर फ़ाइनल, क्वार्टर फ़ाइनल और फाइनल मुकाबलों में 30 सेकंड के भीतर जीत हासिल की।

वह सभी में शीर्ष पर रही। सेमीफाइनल में तो उनकी प्रतिद्वंदी माया राजपूत मुकाबला शुरू होने से पहले ही रिंग से बाहर चली गईं।

अगला क्या?

मुक्केबाजी महासंघ द्वारा ट्रायल से पहले शीर्ष खिलाड़ियों के लिए फरवरी माह में एक शिविर आयोजित करने की संभावना है। इसके बाद AIBA यूथ चैम्पियनशिप 10 से 24 अप्रैल तक पोलैंड में शुरू होगी।