वर्ल्ड कप विजेता और ओलंपिक कांस्य पदक जीतने वाले भारतीय हॉकी खिलाड़ी माइकल किंडो का निधन

माइकल किंडो उस भारतीय टीम के सदस्य थे जिसने 1972 ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और 1975 वर्ल्ड कप का ख़िताब अपने नाम किया था।

लेखक सैयद हुसैन ·

पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी माइकल किंडो (Michael Kindo) का गुरुवार को राउरकेला में 73 साल की उम्र में निधन हो गया। माइकल किंडो 1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली टीम और 1975 वर्ल्ड कप की विजेता रही भारतीय टीम के सदस्य रह चुके थे।

किडों ने 1975 वर्ल्ड कप में अहम भूमिका निभाई थी जहां भारतीय हॉकी टीम ने फ़ाइनल में चिर प्रतिद्वंदी पाकिस्तान को हराकर ख़िताब अपने नाम किया था, ये भारत का पहला और अब तक का एकमात्र भारतीय वर्ल्ड कप ख़िताब है।

पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी पिछले कुछ वक़्त से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे और वह डिप्रेशन से भी ग्रसित थे। उन्होंने राउरकेला के इस्पात जेनरल हॉस्पिटल में आख़िरी सांस ली, वह अपने पीछे एक बेटा, दो बेटी और पत्नी को छोड़ गए हैं।

20 जून 1947 को जन्में किंडो दुनिया के सर्वश्रेष्ठ डिफ़ेंडर्स में से एक थे और उन्हें भारतीय हॉकी का दिग्गज माना जाता था।

माइकल किंडो की मृत्यु की ख़बर सुनकर पूर्व भारतीय गोलकीपर मीर रंजन नेगी (Mir Ranjan Negi) ने अफ़सोस ज़ाहिर किया। उन्होंने ओलंपिक चैनल के साथ बातचीत में इसे हॉकी जगत के लिए एक बड़ी क्षति बताया।

“माइकल किंडो दुनिया के बेहतरीन डिफ़ेंडर्स में से एक थे। एक समय था जब हॉकी में ज़्यादातर डिफ़ेंडर्स पंजाब से आते थे और उनका शरीर भारी-भरकम होता था, तब किंडो उनसे अलग लेकिन बेहद चपल खिलाड़ी थे। वह बेहतरीन अंदाज़ में गेंद को आक्रामक खिलाड़ियों से बचा ले चले जाते थे, ठीक वैसे ही जैसे घर में लोग दूध में गिरी मक्खी को चम्मच से निकाल लेते हैं। हमने एक दिग्गज हॉकी खिलाड़ी को खो दिया है, जिनकी जगह कोई नहीं ले सकता।“

1972 म्यूनिख ओलंपिक के दौरान माइकल किंडो ने तीन बेहतरीन गोल भी दागे थे और देश को कांस्य पदक जिताने में अहम भूमिका निभाई थी।

हॉकी इंडिया ने भी माइकल किंडो के निधन पर गहरा शोक जताया है।

प्रमुख तस्वीर: ट्विटर/स्पोर्ट्स ओडिशा